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मोहब्बत की मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं..., राहत इंदौरी की शायरी ने जीते युवा दिल, खूब बटोरी दाद

Fri, 14 Feb 2020 01:32 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 14 Feb 2020 01:32 PM IST
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Rahat Indori poetry won young hearts at kavi sammelan in Miet Meerut
rahat indori - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में एमआईईटी में गुरुवार रात कवि सम्मेलन में कवियों और शायरों ने अपनी पंक्तियों से हर किसी का दिल लूट लिया। कवियों ने शृंगार, ओज, व्यंग और हास्य रस की प्रस्तुति पर खूब दाद बटोरी। 


 
Rahat Indori poetry won young hearts at kavi sammelan in Miet Meerut
rahat indori - फोटो : अमर उजाला

मशहूर शायर राहत इंदौरी ने शुरुआत यूं की ... ‘राज जो कुछ हो इशारों में बता भी देना और हाथ जब मिलाना तो उसे दबा भी देना’... पर पूरा माहौल तालियों से गूंज गया। उन्होंने सुनाया कि ‘शहरों में तो बारूदों का मौसम है, गांव चलो यह अमरूदों का मौसम है’। उनके इस शेर पर हर कोई दीवाना हो गया। 

Rahat Indori poetry won young hearts at kavi sammelan in Miet Meerut
college - फोटो : अमर उजाला

जब उन्होंने पढ़ा कि ...‘मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना... लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना’। ‘अगर खिलाफ है तो होने दो जान थोड़ी है, यह सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है.. लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है’। 


 
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Rahat Indori poetry won young hearts at kavi sammelan in Miet Meerut
rahat indori - फोटो : अमर उजाला

थोड़ा रूमानी होते हुए राहत इंदौरी ने अपनी शायरी कुछ यूं आगे बढ़ाई कि ‘अपना आवारा सर झुकाने को तेरी दहलीज देख लेता हूं, और फिर कुछ दिखाई दे कि ना दे काम की चीज देख लेता हूं’। आगे सुनाया कि ‘तेरी परछाई मेरे घर से नहीं जाती है, तू कहीं हो मेरे अंदर से नहीं जाती है, एक मुलाकात का जादू उतरता ही नहीं, तेरी खुशबू मेरी चादर से नहीं जाती है’। 

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Rahat Indori poetry won young hearts at kavi sammelan in Miet Meerut
college - फोटो : अमर उजाला

अगली शायरी में उन्होंने पढ़ा कि ‘फैसला जो कुछ भी हो मंजूर होना चाहिए, जंग हो या इश्क हो भरपूर होना चाहिए’। उन्होंने सुनाया कि ‘मोहब्बत की मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं, हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं.. जो यह दीवार का सुराख है, साजिश है लोगों की.. साजिश है मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं’ सुनाकर हर एक को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। 


 
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