हापुड़ अड्डा चौराहा को गोद लेने की प्रक्रिया में जुटा पीडब्लूडी
शहर के सभी चौराहे जाम की चपेट में हैं। चौराहों पर थ्री-व्हीलर, ई-रिक्शा, ठेले और गाड़ियों का अवैध कब्जा है। इतना ही नहीं चौराहों की स्वच्छता पर भी कोई काम नहीं हो रहा है। जिसके कारण शहर की सूरत भी खराब हो गई है। चौराहों से हरियाली, फव्वारे, लाइटिंग गायब हैं। यानी चौराहों की सुंदरता के नाम पर सब कुछ शून्य है।
अनेक बार बने प्लान, सभी धड़ाम
शहर के हापुड़ अड्डा, तेजगढ़ी, बच्चा पार्क, बेगमपुल, फुटबॉल चौराहा, कमिश्नर आवास चौराहा आदि के सौंदर्यीकरण के लिए एमडीए ने अनेकों बार प्रस्ताव तैयार किए। चौराहों के सौंदर्यीकरण की डीपीआर बनवाने पर भी सरकारी खजाना खर्च हुआ। इसको लेकर कई बार जिला प्रशासन के साथ बैठक भी हुई।
इसमें ट्रैफिक पुलिस की भी अहम भूमिका रही थी, लेकिन धरातल पर हुआ कुछ नहीं। यानी तैयार किए गए प्रस्ताव फाइलों में ही कैद होकर रह गए। यानि जिम्मेदार सिर्फ प्रस्ताव तैयार करने में ही जुटे रहे, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।
कमिश्नरी आवास और कार्यालय चौराहा पर पार्क हुए सुंदर
शहर में केवल दो चौराहे ऐसे हैं जिनको पूरी तरह विकसित किया गया है। इनमें जहां कमिश्नरी चौराहा पर चौ. चरण सिंह पार्क है, वहीं कमिश्नरी आवास चौराहा को व्यवस्थित किया गया है।
इन चौराहों पर जहां हरियाली है वहीं लाइटिंग की भी व्यवस्था है। जेब्रा कॉसिंग भी बनाई गई है। कमिश्नरी आवास चौराहा शहर में एक मॉडल के दर्शन कराता है। माना जाता है कि अगर इसी प्रकार सभी चौराहे व्यवस्थित हो जाएं तो जहां चौराहे सुंदर होंगे वहीं शहर के यातायात में भी सुधार होगा।
पीडब्ल्यूडी ने कानपुर की तरफ भी तैयार किया प्रस्ताव
शहर का हापुड़ अड्डा चौराहा हर समय जाम से जूझता है। जबकि चौराहे पर इतनी जगह है कि वह व्यवस्थित होने के बाद जहां सुंदर होगा वहीं यातायात भी सुचारु हो जाएगा। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
हमनें कानपुर में कई चौराहों पर काम किया। उसी की तर्ज पर यहां काम करना चाहते हैं। डीएम के सामने प्रस्ताव को रखकर चौराहे के सौंदर्यीकरण के लिए निवेदन करेेंगे। - अरविंद कुमार, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी