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पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी भाजपा में शामिल
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 11 Aug 2016 02:03 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा परिवार में बुधवार को पश्चिमी क्षेत्र से अति पिछड़ा वर्ग के एक और कद्दावर नेता पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी शामिल हो गए। रालोद से एमएलसी रहे हरपाल का पश्चिमी क्षेत्र के सैनी समाज में खासा असर माना जाता है। अहम बात ये है कि एक दिन पूर्व ही उनके भाई समय सिंह सैनी ने भी भाजपा ज्वाइन की थी।
कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले हरपाल सैनी की गिनती आक्रामक और तेज तर्रार नेताओं में होती है। पश्चिमी क्षेत्र के सैनी समाज में हरपाल सैनी का खासा असर माना जाता है। हरपाल सैनी ने 1996 में कांग्रेस छोड़कर बसपा ज्वाइन की और सरधना विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन बहुत कम अंतर से चुनाव हार गये थे। इसके बाद उन्होंने बसपा से ही सरधना विधानसभा से 2002 में चुनाव लड़ा, लेकिन यह भी हार गये। हरपाल सैनी इसके बाद राजनीति में निष्क्रिय से हो गए। लेकिन 21 मार्च 2105 को उन्होंने फलावदा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बड़ी रैली करायी और सपा की सदस्यता ग्रहण की। लेकिन सपा में आने के बाद वह लगभग उपेक्षित ही रहे। पिछले दिनों जब बसपा के पूर्व विधायक विनोद हरित और पूर्व एमएलसी लोकेश प्रजापति भाजपा में आये तो चर्चा हुई कि एक और पूर्व एमएलसी भाजपा में जाने की तैयारी में हैं। इस चर्चा पर बुधवार को हरपाल सैनी के भाजपा में जाते ही विराम लग गया। हरपाल सैनी ने बताया कि उन्होंने बसपा से भाजपा में आये स्वामी प्रसाद मौर्य के संपर्क में आकर भाजपा ज्वाइन की है। सैनी ने कहा कि सपा माफिया की पार्टी है और वहां पर हर नेता इस समय धन कमाने में लगा है। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा जनता और राष्ट्र की सेवा के लिए ज्वाइन की है।
पश्चिम में प्रभावित करता है सैनी समाज
सैनी समाज का पश्चिम में खास असर है। वह लगभग प्रत्येक विधानसभा सीट पर असर डालता है। अकेले मेरठ जनपद में ही करीब डेढ़ लाख सैनी हैं, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में इनकी संख्या करीब 15 लाख बताई जाती है। ऐसे में हरपाल सैनी के भाजपा में आने से सपा के लिए झटका माना जा रहा है।
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कांग्रेस से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले हरपाल सैनी की गिनती आक्रामक और तेज तर्रार नेताओं में होती है। पश्चिमी क्षेत्र के सैनी समाज में हरपाल सैनी का खासा असर माना जाता है। हरपाल सैनी ने 1996 में कांग्रेस छोड़कर बसपा ज्वाइन की और सरधना विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन बहुत कम अंतर से चुनाव हार गये थे। इसके बाद उन्होंने बसपा से ही सरधना विधानसभा से 2002 में चुनाव लड़ा, लेकिन यह भी हार गये। हरपाल सैनी इसके बाद राजनीति में निष्क्रिय से हो गए। लेकिन 21 मार्च 2105 को उन्होंने फलावदा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बड़ी रैली करायी और सपा की सदस्यता ग्रहण की। लेकिन सपा में आने के बाद वह लगभग उपेक्षित ही रहे। पिछले दिनों जब बसपा के पूर्व विधायक विनोद हरित और पूर्व एमएलसी लोकेश प्रजापति भाजपा में आये तो चर्चा हुई कि एक और पूर्व एमएलसी भाजपा में जाने की तैयारी में हैं। इस चर्चा पर बुधवार को हरपाल सैनी के भाजपा में जाते ही विराम लग गया। हरपाल सैनी ने बताया कि उन्होंने बसपा से भाजपा में आये स्वामी प्रसाद मौर्य के संपर्क में आकर भाजपा ज्वाइन की है। सैनी ने कहा कि सपा माफिया की पार्टी है और वहां पर हर नेता इस समय धन कमाने में लगा है। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा जनता और राष्ट्र की सेवा के लिए ज्वाइन की है।
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पश्चिम में प्रभावित करता है सैनी समाज
सैनी समाज का पश्चिम में खास असर है। वह लगभग प्रत्येक विधानसभा सीट पर असर डालता है। अकेले मेरठ जनपद में ही करीब डेढ़ लाख सैनी हैं, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में इनकी संख्या करीब 15 लाख बताई जाती है। ऐसे में हरपाल सैनी के भाजपा में आने से सपा के लिए झटका माना जा रहा है।
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