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#Pulwama: आतंकियों ने बुझा दिए थे घर के चिराग, ...वो मंजर याद कर कांप जाता है पिता का कलेजा

Mon, 04 Mar 2019 05:12 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 04 Mar 2019 05:12 PM IST
सार

  • कश्मीर में दूधली के सुधीर और संदीप की दहशतगर्दों ने की थी हत्या, पुलवामा आतंकी हमले के बाद से उद्वेलित हैं पीड़ित पिता मास्टर रामपाल।

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#Pulwama: terrorists killed two son of master rampal From Muzaffarnagar
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विस्तार

यूपी के मुजफ्फरनगर में रहने वाले दूधली गांव के मास्टर रामपाल सिंह पुलवामा में सीआरपीएफ के 42 जवानों के बलिदान के बाद से उद्वेलित हो गए हैं। पुलवामा में ही दहशतगर्दों ने अगवा कर उनके दोनों बेटों की हत्या कर दी थी। उनका एक बेटा रेलवे में इंजीनियर था। दोनों बेटों की हत्या से बेटों को खोने के बाद उनकी पत्नी भी चल बसीं। 

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कश्मीर में आतंकी हमलों में देश के हजारों परिवारों ने अपने बेटों को देश की रक्षा में खो दिए हैं। चरथावल ब्लॉक के गांव दूधली के ठाकुर रामपाल सिंह के दो बेटे सुधीर और संदीप पुंडीर थे। बताते हैं कि इंजीनियर बनने के बाद बड़े बेटे सुधीर पुंडीर की नियुक्ति इरकॉन कंपनी में हो गई थी। उनकी कंपनी को उधमपुर कटरा रेलवे लाइन बनाने का प्रोजेक्ट मिला। 

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सुधीर पुलवामा में ही रहता था। यह वर्ष 2004 की बात है। छोटा भाई संदीप अपनी मां रामवती के साथ 18 जून को वैष्णो देवी माता दर्शन को कश्मीर गए थे। 23 जून को काजीगुड़-बारामुला रेलवे लाइन का निरीक्षण करना था। बड़े भाई के साथ कश्मीर देखने की चाह में संदीप भी चला गया। आतंकियों ने दोनों भाइयों को अगवा कर लिया। 25 जून को दोनों की सिर कटी लाशें बारामुला के जंगल में मिली। 

बेटों के साथ अगवा किए रेलवे ठेकेदार अशरफ और ड्राइवर को आतंकियों ने छोड़ दिया। बेटों को खो देने का वियोग मां रामवती सहन नहीं कर पाई। छह साल पहले वह गुजर गईं। दो बेटियां है, उन्हीं के सहारे जिंदगी कट रही है। रामपाल ने कहा कि पता नहीं क्या कसूर रहा कि आतंकियों ने घर के चिराग बुझा दिए। 

आतंकी हमले में जिन परिवारों के बेटे वतन की खातिर शहीद हो गए, उनका दर्द मुझे सोने नहीं देता। खेतीबाड़ी बंटाई पर दे रखी है। जैसे तैसे जिंदगी की सांझ को बिता रहा हूं। जब तक कश्मीर में आतंकवाद जड़ से खत्म नहीं होगा, देश के बेटों की शहादत नहीं रुकेगी।

#Pulwama: terrorists killed two son of master rampal From Muzaffarnagar
पूर्व सैनिक लांसनायक रतिराम

जीवना के रतिराम ने लड़ी पाक के खिलाफ दो जंग
मंसूरपुर के जीवना निवासी पूर्व सैनिक लांसनायक रतिराम ने भी वर्ष 1965 तथा 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ी थी। लड़ाई के दौरान गोला उनके नजदीक गिरने  के कारण उसके कान का पर्दा फट गया था।
जीवना के साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रतिराम बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही कुश्ती का शौक था। वर्ष1962 में हाथी खाना मेरठ में सेना की भर्ती चल रही थी, वह भी भर्ती होने के लिए चले गए।

वहां सैनिक के रूप में भर्ती हो गए। पहली पोस्टिंग जम्मू क्षेत्र में अंधेरी कैंप में हुई। 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी पोस्टिंग जम्मू जिले के तहसील लखनूर क्षेत्र में थी। युद्ध के दौरान कुछ पाकिस्तानी सैनिक सूखी नदी से गायों की आड़ लेकर क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे थे। हम समझ गए कि रात के समय यहां गाय नहीं आ सकती। माजरा कुछ और है। हमने फायरिंग की, तो गाय दूर भाग गई। पीछे पाकिस्तानी सैनिक थे। गोलीबारी करके पाक के सात सैनिकों को मार गिराया।

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वर्ष 1971 के युद्ध के दौरान वे बंगाल के  बमनवाड़ी क्षेत्र में तैनात थे। वहां 14 दिन चली लड़ाई में उन्होंने तथा उनके साथियों ने 11 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर 94  सैनिकों को बंदी बना लिया। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का एक गोला उनके तथा उनके साथियों के पास आकर गिरा, जिसके धमाके की आवाज से उनका कान का पर्दा फट गया। तभी से उन्हें एक कान से सुनाई देता है।  

प्रमोशन पाकर वे लांस नायक के पद तक पहुंचे और वर्ष 1978 में सेवानिवृत्त हुए। पूर्व सैनिक रतिराम का कहना है कि आज पहले की अपेक्षा सेना के पास आधुनिक संचार तंत्र तथा आधुनिक हथियार हैं। 

भारतीय सैनिकों का मनोबल तो हमेशा ऊंचा ही रहता है, बहुत कुछ राजनैतिक लोगों की इच्छा शक्ति पर भी निर्भर करता है। उनका कहना है कि सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध को निर्णायक मोड़ पर ले जाना चाहिए। वयोवृद्ध रतिराम इस उम्र में भी तीनों बेटों बलबीर, यशपाल तथा यशवीर के साथ खेती करते है।

#Pulwama: terrorists killed two son of master rampal From Muzaffarnagar
पूर्व सूबेदार नारायण सिंह

दुश्मन सेना के दांत खट्टे किए
खतौली में पूर्व सूबेदार नारायण सिंह ने पाकिस्तान के साथ दो बार जंग लड़ी थी। उनमें देशप्रेम का जज्बा उस वक्त फौज में रहते हुए भी रहा और आज भी वहीं जज्बा है। उन्होंने कहा कि विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने जिस तरीके से पाक के अंदर घुसकर अपने शौर्य का पराक्रम दिखाते हुए अपने विमान मिग-21 से पाकिस्तान के एफ-16 विमान को मार गिराया था। पूरा देश उनके बहादुरी को सलाम कर रहा है।

खतौली ब्लाक के गांव खानपुर निवासी पूर्व सूबेदार नारायण सिंह वर्ष 1962 में सेना की 7-जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। उन्होंने वर्ष 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ सियालकोट सेक्टर में दुश्मन मुल्क के सैनिकों के साथ जंग की थी। 

इसके बाद वर्ष 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने को बांग्लादेश में ही पहुंचकर दुश्मन सेना के दांत खट्टे किए थे। जिसमें भारतीय सैनिकों ने जांबाजी दिखाते हुए पाक के हजारों सैनिकों को गिरफ्तार कर उनका सरेंडर कराया था। इस जंग को जीतने के बाद भारतीय सैनिकों को गर्व और खुशी महसूस हुई थी। पूर्व सैनिक ने बताया कि कश्मीर में सरकार में पत्थरबाजों और अलगाववादी नेताओं पर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।

तभी जाकर कश्मीर में शांति स्थापित हो सकती है। आतंकवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादियों के ठिकानों पर इसी प्रकार से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। आतंकवादियों को सीमा में घुसने से पहले ही ढ़ेर करना होगा, तभी भारत में शांति बनी रह सकती है।

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सेवानिवृत्त वारंट ऑफिसर ठाकुर रोहताश सिंह

85 जवानों को छूकर निकल गई थी मौत
बुढ़ाना क्षेत्र के दुर्गनपुर खेड़ा गांव के भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त वारंट ऑफिसर ठाकुर रोहताश सिंह जून 1963 भारतीय वायु सेना में भर्ती हुए थे। वे जून 1978 में वारंट ऑफिसर के पद से रिटायर हुए। 
अमर उजाला के साथ वार्ता में उन्होंने बताया कि 7 सितंबर 1965 में वे 85 जवानों के साथ बाग डोगरा मे तैनात थे। अचानक उनकी बटालियन के ऊपर हवाई अटैक हुआ।

इस हवाई अटैक में आनन फानन में सभी जवानों ने खाई में लेटकर उस अटैक का जवाब दिया था। इस हवाई अटैक में मौत उनके व जवानों के पास से होकर गुजर गई थी। अचानक हुए अटैक के कारण उनके जेट फाइटर वनपायर में ब्रस्ट लगने के कारण वह जल गया था। किसी भी जवान को खरोच नहीं आई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में उन्होंने अपनी बटालियन के साथ तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर हमला किया था।

इस हमले में भारत की तीनों सेनाएं शामिल थी। इस युद्ध में भारत ने दुश्मन को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। पूर्वी पाकिस्तान आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हर बार मुंह की खाई हैै। वायुसेना ने सर्जिकल स्ट्राइक से पाक में आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर अच्छी कार्रवाई की है।

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