मेरठ के गंगानगर एफ ब्लॉक निवासी एवं मेरठ कॉलेज के कर्मचारी व प्रॉपर्टी डीलर फेरम सिंह ने रविवार को अम्हेड़ा स्थित अपने ऑफिस में फांसी लगा ली। उन्हें बीते सोमवार सपा नेता श्रवण कुमार के घर में हुई डकैती के मामले में पुलिस ने तीन दिन तक पूछताछ के नाम पर थाने में बैठाकर रखा था। परिजनों का आरोप था कि पुलिस की प्रताड़ना से वह तनाव में थे। थाने से आकर खाना भी नहीं खाया था। घटना को लेकर परिजनों ने सीओ सदर देहात व थाना प्रभारी को घेर लिया और करीब तीन घंटे तक हंगामा किया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
Meerut: पुलिस के डर से प्रॉपर्टी डीलर ने की आत्महत्या, तनाव में छोड़ा था खाना, कही थी ये आखिरी बात
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परिजनों के यह है आरोप
15 नवंबर को गंगानगर के अमर विहार में सपा नेता एवं व्यापारी श्रवण कुमार के यहां बदमाशों ने 30 लाख की डकैती डाली थी। घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी की फुटेज में पुलिस ने वाहनों के आवागमन को देखा। परिजनों के अनुसार, फेरम सिंह का उसी रास्ते पर हॉस्टल व नशा मुक्ति केंद्र भी है। वह अपनी वैगनआर कार से वहां गए थे। शक के आधार पर पुलिस ने 16 नवंबर को सरधना तहसील से फेरम सिंह और चचेरे भाई गौरव को हिरासत में ले लिया। एक अन्य युवक को भी उठाया था।
पुलिस ने परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी। रात में फेरम सिंह घर नहीं लौटे तो परिजन थाने पहुंचे, वहां हिरासत में लेने का पता चला। परिजनों के मुताबिक, तीन दिन तक पुलिस ने उन्हें थाने में बैठाकर रखा और प्रताड़ित किया। कई सत्तारूढ़ पार्टियों के नेताओं के कहने पर पुलिस ने 18 नवंबर की शाम उन्हें छोड़ा। फेरम सिंह के भतीजे प्रिंस के मुताबिक, चाचा थाने से आने के बाद से तनाव में थे। उन्होंने खाना भी नहीं खाया था। उन्हें समाज में हुई बदनामी का डर था। उन्हें लग रहा था कि पुलिस फिर से उन्हें उठा लेगी।
कुछ देर में आने की कहकर निकले थे फेरम
भतीजे प्रिंस के मुताबिक, वह घर से कुछ देर में आने की बात कहकर करीब साढ़े तीन बजे कार से निकले। पत्नी ने उन्हें कॉल मिलाई तो वह रिसीव नहीं हुई। कई बार कॉल रिसीव न होने पर भतीजे प्रिंस को थाने पर दिखवाने भेजा। प्रिंस थाने पर देखने के बाद उनके ऑफिस पहुंचा तो देखा कार बाहर खड़ी थी। अंदर से ऑफिस का दरवाजा बंद था।
किसी तरह दरवाजा तोड़कर अंदर गए तो उन्हें फंदे पर लटके पाया। इसके बाद उन्हें उतारकर बक्सर टेंपो स्टैंड स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। फेरम सिंह का कुशल व्यवहार रहा। परिवार में उनकी पत्नी गीता, तीन बेटे 10 वर्षीय प्रणव, सात वर्षीय हिमांशु और चार वर्षीय कार्तिक हैं। घटना का पता लगने पर पत्नी बेहोश हो गई। परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें संभाला।
आखिर किससे मिलने गए थे फेरम सिंह
गंगानगर पुलिस के मुताबिक, डकैती की घटना के बाद बीटीएस उठाकर कई सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ली थी। कॉलोनी की रहने वाली एक महिला से फेरम सिंह के संबंध थे। कार सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी। घटना से पहले लोकेशन आसपास पाई गई थी। उसी शक के आधार पर फेरम सिंह को उठाकर पूछताछ की गई थी। डकैती मामले से कोई जुड़ाव न पाए जाने पर उन्हें छोड़ दिया था। पुलिस ने महिला से भी पूछताछ की है, जिसने भी फेरम सिंह के आने की बात कबूल की है।
पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था
पूछताछ के लिए गंगानगर पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप गलत है। कोई भी घटना हो जाती है तो उसके बाद पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाता है। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी, मेरठ