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उच्च शिक्षा में नए शोध और गुणवत्ता को बढ़ाएं : प्रो. राठौर
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें गुणवत्ता, समानता और वैश्विक उत्कृष्टता के साथ बेहतर उच्च शिक्षा पर मंथन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. एचसीएस राठौर ने कहा कि उच्च शिक्षा में नए शोध और गुणवत्ता को बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान की खोज और उत्कृष्टता को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों से गुणवत्ता उन्नयन पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। प्रो. जेएस राजपूत ने शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के समन्वय को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। इसके साथ ही बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने को आवश्यक बताया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक ज्ञान के समन्वय की भी वकालत की। प्रो. राजपूत ने कहा कि विश्वविद्यालयों में जिज्ञासा, स्वतंत्र चिंतन और सृजनात्मकता का माहौल होना चाहिए।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अटल सभागार में सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सम्मेलन संयोजक प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। सह-संयोजक प्रो. जेएस भारद्वाज ने सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों के बारे में बताया। अतिथि वक्ता प्रो. एनसी लोहानी ने सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने, बहुभाषिकता और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज को बढ़ावा देने की बात कही। स्लोवाकिया की प्रो. अलेना हास्कोवा ने ऑनलाइन संबोधन में वैश्विक स्तर पर समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विचार व्यक्त किए।
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प्रो. पायल मागो ने डिजिटल युग में शिक्षण पद्धति और एआई के संतुलित उपयोग पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान) प्रो. बीरपाल सिंह ने शोध उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान संस्कृति मजबूत करने की आवश्यकता बताई। प्रो. सुरक्षा पाल ने भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने पर जोर दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने उच्च शिक्षा को बहुविषयक, समावेशी और शोध-आधारित बनाने पर जोर दिया। अंत में प्रो. विजय जायसवाल ने सभी का आभार जताया।
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उन्होंने कहा कि ज्ञान की खोज और उत्कृष्टता को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों से गुणवत्ता उन्नयन पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया। प्रो. जेएस राजपूत ने शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के समन्वय को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। इसके साथ ही बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाने को आवश्यक बताया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक ज्ञान के समन्वय की भी वकालत की। प्रो. राजपूत ने कहा कि विश्वविद्यालयों में जिज्ञासा, स्वतंत्र चिंतन और सृजनात्मकता का माहौल होना चाहिए।
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इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अटल सभागार में सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सम्मेलन संयोजक प्रो. राकेश कुमार शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। सह-संयोजक प्रो. जेएस भारद्वाज ने सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों के बारे में बताया। अतिथि वक्ता प्रो. एनसी लोहानी ने सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने, बहुभाषिकता और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज को बढ़ावा देने की बात कही। स्लोवाकिया की प्रो. अलेना हास्कोवा ने ऑनलाइन संबोधन में वैश्विक स्तर पर समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विचार व्यक्त किए।
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प्रो. पायल मागो ने डिजिटल युग में शिक्षण पद्धति और एआई के संतुलित उपयोग पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के निदेशक (अनुसंधान) प्रो. बीरपाल सिंह ने शोध उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान संस्कृति मजबूत करने की आवश्यकता बताई। प्रो. सुरक्षा पाल ने भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने पर जोर दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने उच्च शिक्षा को बहुविषयक, समावेशी और शोध-आधारित बनाने पर जोर दिया। अंत में प्रो. विजय जायसवाल ने सभी का आभार जताया।