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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना : अब दो किस्तों में मिलेंगे पांच हजार रुपये
Tue, 21 Mar 2023 02:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Tue, 21 Mar 2023 02:04 AM IST
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मेरठ। सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) 2.0 लागू कर दी है। नए नियमों के तहत अब तीन किस्तों में मिलने वाले पांच हजार दो किस्तों में मिलेंगे। इसके अलावा योजना का लाभ पाने के लिए पिता के आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। दूसरा बच्चा लड़की होने पर योजना की पूरी धनराशि मिलेगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब बच्चा पैदा होने के 270 दिन तक लाभार्थी पंजीकरण कर सकेंगे। इस संबंध में केंद्रीय (भारत सरकार) अपर सचिव ललित ग्रोवर की ओर से जारी निर्देश जारी किए गए हैं। योजना के नोडल अधिकारी डा. आरके सिरोहा ने बताया कि योजना को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। इसमें फार्म भरने की जरूरत नहीं है, आशा कार्यकर्ता और एएनएम पोर्टल पर सीधे लाभार्थी का ब्योरा भर सकेंगी। योजना में पहले पिता का आधार कार्ड होना अनिवार्य था, अब यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे अब उन महिलाओं को भी लाभ मिल सकेगा जो तलाकशुदा और सिंगल मदर हैं। केवल मां के आधार कार्ड पर योजना का लाभ मिल सकेगा। दूसरा बच्चा होने पर पहली किस्त (तीन हजार रुपये) तो मिलेगी, लेकिन दूसरी किस्त तभी मिलेगी जब दूसरा बच्चा बालिका होगी। यह राशि बालिकाओं के प्रति सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए है।
ऐसे मिलेगी योजना में धनराशि
पहले प्रथम किस्त के रूप में 1000 रुपये, दूसरी किस्त के रूप में (गर्भावस्था के छह माह बाद) 2000 रुपये और बच्चे के जन्म का पंजीकरण होने और बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर तीसरी किस्त के रूप में 2000 रुपये दिए जाते थे। अब प्रथम किस्त (तीन हजार रुपये) प्रसव पूर्व कम से कम एक जांच होने पर और दूसरी किस्त (दो हजार रुपये) बच्चे के जन्म का पंजीकरण, बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर मिलेगी। बच्चे का जन्म होने के 270 बाद तक योजना का लाभ लिया जा सकेगा।
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अब तक 81311 फार्म पंजीकृत
योजना की जिला कार्यक्रम समन्वयक रिचा श्रीवास्तव ने बताया केंद्र सरकार की ओर से मिले लक्ष्य के सापेक्ष अब तक (एक जनवरी 2017 से) 81311 फार्म पंजीकृत किए जा चुके हैं। अब तक 34.13 करोड़ रुपये का भुगतान लाभार्थियों को किया जा चुका है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) एक जनवरी 2017 से लागू है। योजना का उद्देश्य गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब बच्चा पैदा होने के 270 दिन तक लाभार्थी पंजीकरण कर सकेंगे। इस संबंध में केंद्रीय (भारत सरकार) अपर सचिव ललित ग्रोवर की ओर से जारी निर्देश जारी किए गए हैं। योजना के नोडल अधिकारी डा. आरके सिरोहा ने बताया कि योजना को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। इसमें फार्म भरने की जरूरत नहीं है, आशा कार्यकर्ता और एएनएम पोर्टल पर सीधे लाभार्थी का ब्योरा भर सकेंगी। योजना में पहले पिता का आधार कार्ड होना अनिवार्य था, अब यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे अब उन महिलाओं को भी लाभ मिल सकेगा जो तलाकशुदा और सिंगल मदर हैं। केवल मां के आधार कार्ड पर योजना का लाभ मिल सकेगा। दूसरा बच्चा होने पर पहली किस्त (तीन हजार रुपये) तो मिलेगी, लेकिन दूसरी किस्त तभी मिलेगी जब दूसरा बच्चा बालिका होगी। यह राशि बालिकाओं के प्रति सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए है।
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ऐसे मिलेगी योजना में धनराशि
पहले प्रथम किस्त के रूप में 1000 रुपये, दूसरी किस्त के रूप में (गर्भावस्था के छह माह बाद) 2000 रुपये और बच्चे के जन्म का पंजीकरण होने और बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर तीसरी किस्त के रूप में 2000 रुपये दिए जाते थे। अब प्रथम किस्त (तीन हजार रुपये) प्रसव पूर्व कम से कम एक जांच होने पर और दूसरी किस्त (दो हजार रुपये) बच्चे के जन्म का पंजीकरण, बच्चे के प्रथम चक्र का टीकाकरण पूरा होने पर मिलेगी। बच्चे का जन्म होने के 270 बाद तक योजना का लाभ लिया जा सकेगा।
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अब तक 81311 फार्म पंजीकृत
योजना की जिला कार्यक्रम समन्वयक रिचा श्रीवास्तव ने बताया केंद्र सरकार की ओर से मिले लक्ष्य के सापेक्ष अब तक (एक जनवरी 2017 से) 81311 फार्म पंजीकृत किए जा चुके हैं। अब तक 34.13 करोड़ रुपये का भुगतान लाभार्थियों को किया जा चुका है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) एक जनवरी 2017 से लागू है। योजना का उद्देश्य गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है।