{"_id":"60185e398ebc3e5b9c3e5b83","slug":"pm-samman-nidhi-s-budget-increased-to-help-farmers-meerut-news-mrt523310398","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों साधने के लिए पीएम सम्मान निधि का बजट बढ़ाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों साधने के लिए पीएम सम्मान निधि का बजट बढ़ाया
विज्ञापन
किसानों साधने के लिए पीएम सम्मान निधि का बजट बढ़ाया
मेरठ। किसान आंदोलन के बीच कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों के लिए वित्त मंत्री ने सोमवार को बड़ी घोषणाएं कर दीं। किसानों को साधने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के बजट में बढ़ोतरी कर इसे 75 हजार करोड़ कर दिया। फसल ऋण के लिए भी 16.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह भी बताया कि आने वाले दिनों में गेहूं खरीद के लिए 75 हजार करोड़ रुपये और धान खरीद के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
हालांकि किसान इससे नाइत्तफाकी जता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का पूरा फोकस किसानों को फसल ऋण के बोझ तले दाबने का रहा है। इसीलिए हर बजट में फसल ऋण का बजट बढ़ा रही है। किसानों को फसल के लिए ऋण नहीं चाहिए। किसान आत्मनिर्भर होना चाहता है। सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के हिसाब से फसल का डेढ़ गुणा एमएसपी देने का गलत दावा करती है। किसानों को फसल खरीद की गारंटी भी चाहिए, ताकि उसकी फसल कोई भी एमएसपी से कम पर नहीं खरीद सके।
किसानों की प्रतिक्रिया
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करे सरकार
स्वामीनाथन आयोग ने सीटू प्लस एफएल फॉर्मूले से एमएसपी की सिफारिश की थी, जिसे किसी भी पार्टी की सरकार ने लागू नहीं किया है। फॉर्मूले को लागू करने पर गेहूं का एमएसपी 2800 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा होगा। - वरुण सांगवान, प्रगतिशील किसान, गांव पाथौली
विज्ञापन
महंगे उत्पादों से लगातार बढ़ रही फसल की लागत
1971-72 में डीजल करीब 84 पैसे लीटर था। एक किलो गेहूं बेंचकर एक लीटर डीजल आता था। आज चार किलो गेहूं बेंचकर एक लीटर डीजल आ रहा है। फसल उत्पादन में प्रयोग होने वाले इनपुट भी महंगे हो गए हैं। - जयराज सिंह, प्रगतिशील किसान, गांव डालमपुर
विज्ञापन
मेरठ। किसान आंदोलन के बीच कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों के लिए वित्त मंत्री ने सोमवार को बड़ी घोषणाएं कर दीं। किसानों को साधने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के बजट में बढ़ोतरी कर इसे 75 हजार करोड़ कर दिया। फसल ऋण के लिए भी 16.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह भी बताया कि आने वाले दिनों में गेहूं खरीद के लिए 75 हजार करोड़ रुपये और धान खरीद के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
हालांकि किसान इससे नाइत्तफाकी जता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का पूरा फोकस किसानों को फसल ऋण के बोझ तले दाबने का रहा है। इसीलिए हर बजट में फसल ऋण का बजट बढ़ा रही है। किसानों को फसल के लिए ऋण नहीं चाहिए। किसान आत्मनिर्भर होना चाहता है। सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के हिसाब से फसल का डेढ़ गुणा एमएसपी देने का गलत दावा करती है। किसानों को फसल खरीद की गारंटी भी चाहिए, ताकि उसकी फसल कोई भी एमएसपी से कम पर नहीं खरीद सके।
विज्ञापन
किसानों की प्रतिक्रिया
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करे सरकार
स्वामीनाथन आयोग ने सीटू प्लस एफएल फॉर्मूले से एमएसपी की सिफारिश की थी, जिसे किसी भी पार्टी की सरकार ने लागू नहीं किया है। फॉर्मूले को लागू करने पर गेहूं का एमएसपी 2800 रुपये प्रति कुंतल से ज्यादा होगा। - वरुण सांगवान, प्रगतिशील किसान, गांव पाथौली
विज्ञापन
महंगे उत्पादों से लगातार बढ़ रही फसल की लागत
1971-72 में डीजल करीब 84 पैसे लीटर था। एक किलो गेहूं बेंचकर एक लीटर डीजल आता था। आज चार किलो गेहूं बेंचकर एक लीटर डीजल आ रहा है। फसल उत्पादन में प्रयोग होने वाले इनपुट भी महंगे हो गए हैं। - जयराज सिंह, प्रगतिशील किसान, गांव डालमपुर