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क्रांतिधरा मेरठ के लोगों ने अटल जी को ऐसे दी श्रद्घांजलि, सोशल मीडिया पर दिन भर छाया रहा मौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 18 Aug 2018 02:04 PM IST
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अटल जी को श्रद्घांजलि देते मेरठ के लोग
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति अपनी आस्था और सम्मान को पश्चिमी यूपी के लोगों ने सोशल मीडिया पर भी बयां किया। किसी ने अपनी प्रोफाइल पर उनकी डीपी लगाई तो किसी ने उनकी पुराने फोटो और कविताएं शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक संदेशों का यह सिलसिला दिनभर जारी रहा। यहां तक कि कई ग्रुप्स में हंसी मजाक बंद था।
अटल जी की जीवनी, उनके राजनीतिक सफर और प्रधानमंत्रित्व काल की बातें सोशल मीडिया पर छाई रहीं। शायद कोई ग्रुप होगा जिसमें अटल जी के बारे कविता या उनसे जुडे़ संस्मरण ना हों। ये अटल जी का व्यक्तित्व ही था कि भाजपाई ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के ग्रुप में भी पूर्व पीएम की यादों से जुडे़ मैसेज चलते रहे।
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अटल जी की जीवनी, उनके राजनीतिक सफर और प्रधानमंत्रित्व काल की बातें सोशल मीडिया पर छाई रहीं। शायद कोई ग्रुप होगा जिसमें अटल जी के बारे कविता या उनसे जुडे़ संस्मरण ना हों। ये अटल जी का व्यक्तित्व ही था कि भाजपाई ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के ग्रुप में भी पूर्व पीएम की यादों से जुडे़ मैसेज चलते रहे।
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शोक में बंद किया गया मेरठ सिटी पोस्ट ऑफिस
- फोटो : अमर उजाला
एक ग्रुप के एडमिन ने शुक्रवार को ग्रुप में कोई भी चुटकुला, हास्य कविता या वीडियो ना भेजने की अपील की। इसका सभी ने पालन कर अटल जी के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। बहुत से लोगों ने अटल जी के सम्मान में अपनी व्हाट्स एप प्रोफाइल में उनकी डीपी लगाई और दूसरों से भी इसकी अपील करते रहे।
कुछ ने कविताओं के माध्यम से उनकी खूबी कुछ यूं बयां की। गली मोहल्लों, बाजारों में लोगों ने श्रद्धांजलि सभाएं कर उन्हें शेयर किया। व्यापारियों ने प्रतिष्ठानों को बंद रखकर, पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धाजंलि दी। हर विपक्षी दल के कार्यकर्ता उनके बारे में अपने मेसेज से उन्हें श्रद्धांजलि देते रहे। कुछ लोगों ने उनसे जुडे़ पुराने फोटो डाले थे।
सोशल मीडिया पर चल रहे थे ये मैसेज
बड़ी रौनक होगी आज भगवान के दरबार में,
एक फरिश्ता पहुंचा है जमीं से आसमान में।
लफ्ज को किताब से ले चला ये कौन है,
फफक रही है जमीं आसमां भी मौन है।
कुछ ने कविताओं के माध्यम से उनकी खूबी कुछ यूं बयां की। गली मोहल्लों, बाजारों में लोगों ने श्रद्धांजलि सभाएं कर उन्हें शेयर किया। व्यापारियों ने प्रतिष्ठानों को बंद रखकर, पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धाजंलि दी। हर विपक्षी दल के कार्यकर्ता उनके बारे में अपने मेसेज से उन्हें श्रद्धांजलि देते रहे। कुछ लोगों ने उनसे जुडे़ पुराने फोटो डाले थे।
सोशल मीडिया पर चल रहे थे ये मैसेज
बड़ी रौनक होगी आज भगवान के दरबार में,
एक फरिश्ता पहुंचा है जमीं से आसमान में।
लफ्ज को किताब से ले चला ये कौन है,
फफक रही है जमीं आसमां भी मौन है।
प्रशासनिक कार्यालयों पर झुकाए गए राष्ट्रीय ध्वज
- फोटो : अमर उजाला
एक दशक में पहली बार दिन में बंद रहा एसएसपी ऑफिस का गेट
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शुक्रवार को पुलिस विभाग में शोक छाया रहा। पिछले एक दशक में पहली बार दिन में पुलिस ऑफिस बंद रहा। सभी एडिशनल एसपी और सीओ भी अपने-अपने दफ्तरों में नहीं बैठे। चाहे सरकारी अवकाश हो या फिर अन्य कोई कार्यक्रम। एसएसपी ऑफिस का गेट दिन में बंद नहीं किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शुक्रवार को एसएसपी ऑफिस नहीं खोला गया।
एसएसपी राजेश पांडेय ने इस संबंध में सभी एडिशनल एसपी, सीओ को निर्देश दिए थे कि शासन ने राष्ट्रीय शोक में अवकाश घोषित किया था। पुलिस विभाग को भी उसमें शामिल होना चाहिए। संविधान और कानून की रक्षा के लिए ही पुलिस की वर्दी पहनी है। इस दौरान एसपी देहात राजेश कुमार, एसपी सिटी रणविजय सिंह, एसपी क्राइम शिवराम यादव और एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी के ऑफिस भी बंद रहे। दिन में सीओ के ऑफिस भी बंद रहे।
बहुत आघात पहुंचा: एसएसपी
एसएसपी राजेश पांडेय ने बताया कि वह लखनऊ में लंबे समय तक पहले सीओ उसके बाद चार साल तक एसपी सिटी रहे। 1990 के दशक से 2004 तक उन्होंने लखनऊ में अटल विहारी बाजपेयी की 50 से अधिक जनसभाओं को कराया। जब वह लखनऊ सीट से सांसद बने थे तो उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की कोई बात नहीं, पुलिस को अपने हिसाब से काम करना चाहिए। उसके बाद जब वह पहली बार प्रधानमंत्री बनकर लखनऊ पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों से अलग से मिले थे। एसएसपी का कहना है कि उनके निधन पर उन्हें व्यक्तिगत आघात पहुंचा है।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर शुक्रवार को पुलिस विभाग में शोक छाया रहा। पिछले एक दशक में पहली बार दिन में पुलिस ऑफिस बंद रहा। सभी एडिशनल एसपी और सीओ भी अपने-अपने दफ्तरों में नहीं बैठे। चाहे सरकारी अवकाश हो या फिर अन्य कोई कार्यक्रम। एसएसपी ऑफिस का गेट दिन में बंद नहीं किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शुक्रवार को एसएसपी ऑफिस नहीं खोला गया।
एसएसपी राजेश पांडेय ने इस संबंध में सभी एडिशनल एसपी, सीओ को निर्देश दिए थे कि शासन ने राष्ट्रीय शोक में अवकाश घोषित किया था। पुलिस विभाग को भी उसमें शामिल होना चाहिए। संविधान और कानून की रक्षा के लिए ही पुलिस की वर्दी पहनी है। इस दौरान एसपी देहात राजेश कुमार, एसपी सिटी रणविजय सिंह, एसपी क्राइम शिवराम यादव और एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी के ऑफिस भी बंद रहे। दिन में सीओ के ऑफिस भी बंद रहे।
बहुत आघात पहुंचा: एसएसपी
एसएसपी राजेश पांडेय ने बताया कि वह लखनऊ में लंबे समय तक पहले सीओ उसके बाद चार साल तक एसपी सिटी रहे। 1990 के दशक से 2004 तक उन्होंने लखनऊ में अटल विहारी बाजपेयी की 50 से अधिक जनसभाओं को कराया। जब वह लखनऊ सीट से सांसद बने थे तो उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की कोई बात नहीं, पुलिस को अपने हिसाब से काम करना चाहिए। उसके बाद जब वह पहली बार प्रधानमंत्री बनकर लखनऊ पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों से अलग से मिले थे। एसएसपी का कहना है कि उनके निधन पर उन्हें व्यक्तिगत आघात पहुंचा है।
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