पंडित जसराज के सुरों से गूंजी थी मेरठ की पुरवाई, खामोशी की अनंत यात्रा पर निकले संगीत मार्तंड
- - पंडित जसराज के सुरों से गूंजी थी मेरठ की पुरवाई
- - आरजी और इस्माइल कॉलेज में आए थे पंडित जसराज
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अधरमं, मधुरमं, वदनमं मधुरमं,
नैनं मधुरमं, हसितं मधुरमं,
हृदय मधुरमं, गमनम मधुरमं,
मधुराधिपते, अखिलम मधुरमं...
मधुराधिपते अखिलमं मधुरमं,
अखिलम मधुरमं...
राम स्वरूप के शतकीय उच्चारण से प्रभु भक्ति में डूबते कंठ को साधना की नई रीति, प्रीति से संवारने वाले संगीत मार्तंड पंडित जसराज शांति की अनंत यात्रा के साथी बन गए। दुनिया के समस्त विशिष्ट संगीत मंचों से सुरों द्वारा भक्ति की राह प्रशस्त करने वाले सरस्वती पुत्र के कदम मेरठ की माटी में भी पड़े। शारदा सुत के सुरों ने मेरठ की पुरवाई को दो बार महकाया।
संगीत के पुराने शौकीनों के अनुसार सुरसाधक पंडित जसराज दो बार मेरठ पधारे। पहली बार उनका आगमन 1971 में आरजी पीजी कॉलेज में हुआ। संस्था के समारोह के मेहमान बने। दूसरी दफा स्पिक मैके के सौजन्य से पंडितजी इस्माईल डिग्री कॉलेज में कांसर्ट के लिए आए।
उस रोज दो चांदनियों के विलक्षण दर्शन
इस्माईल् नेशनल महिला पीजी कॉलेज में संगीत विभाग में एचओडी पद से सेवानिवृत डॉ. सुधा रायजादा ऐसे ही एक पल की साक्षी है। कोरोना के आपातकाल में बुढ़ाना गेट में अपनी कोठी में समय बिता रही डॉ. सुधा पंडितजी के महाप्रयाण का समाचार सुनकर अवाक रह गई।
1985 के दौर को स्मरण कर डॉ. सुधा कहती हैं तब कॉलेज में स्पिक मैके की कोर्डिनेटर थी। स्पिक मैके के तहत ही पंडितजी कॉलेज में कांसर्ट के लिए आए थे। प्रिंसिपल डॉ. शारदा त्यागी थीं और मैँ संगीत विभाग प्रमुख थी। कॉलेज में आयोजन हुआ। धवल चांदनी में हुए कांसर्ट में पंडितजी ने भक्ति सुरों से प्रभु महिमा का अभूतपूर्व दृश्यचित्र खींच दिया। उस रोज मैँने दो चांदनियों के एक साथ विलक्षण दर्शन् किए। आकाश में धवल चांद, मंच पर साधना का निश्चल चंद्रमा था।
मेरठ म्यूजिकल सर्किल के लिए दी प्रस्तुति
शहर की पुरानी संगीत संस्था मेरठ म्यूजिकल सर्किल के लिए पंडितजी पहली दफा मेरठ पधारे। संस्था के संस्थापक आयकर आयुक्त रहे स्व. एएस सिंघल थे। एएस सिंघल के पुत्र अनूप सिंघल उस अनुपम घटना के साक्षी हैं।
रेलवे रोड निवासी अनूप सिंघल कहते हैं 15 अगस्त 1979 को आरजी पीजी कॉलेज में पंडितजी आए थे। 29वीं संगीत सभा व संस्था का दूसरा वार्षिक संगीत महोत्सव था। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. विमला पुरी थीं। आयोजन में विष्णुपुर घराना से पं. मनीलाल सहित कई प्रतिभाएं मेरठ आई थीं। उसमें पंडित जसराज भी थे। तब उन्होंने प्रस्तुति दी थी। अनूप सिंघल कहते हैं उस वर्ष सूखा पड़ा था पंडितजी ने रागबहार गाया था।