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यूपी पंचायत चुनाव: भाजपा प्रत्याशियों ने अपनी हार के पीछे मानी ये बड़ी वजह, पढ़िए खास रिपोर्ट

Sat, 08 May 2021 05:40 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, अनिज मित्तल, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, अनिज मित्तल, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 08 May 2021 05:40 PM IST
सार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले अति आत्मविश्वास से लवरेज भाजपा अब बैकफुट पर नजर आ रही हैं। पश्चिमी क्षेत्र के नेता जहां सर्वाधिक सीट आने की बात कहते हुए अपनी सफाई पेश करने में लग गए हैं।

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Panchayat Chunav 2021:  BJP candidates are telling the reason for their defeat to the farmer movement
भाजपा (सांकेतिक चित्र) - फोटो : social media

विस्तार

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले अति आत्मविश्वास से लवरेज भाजपा अब बैकफुट पर नजर आ रही हैं। पश्चिमी क्षेत्र के नेता जहां सर्वाधिक सीट आने की बात कहते हुए अपनी सफाई पेश करने में लग गए हैं, वहीं मेरठ के संगठन और जनप्रतिनिधियों ने किसान आंदोलन को लेकर पैदा आक्रोश के सिर हार का ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया है। आलाकमान इससे संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर भी फेरबदल हो सकता है। भाजपा के संगठनात्मक दृष्टि से पश्चिमी क्षेत्र के जनपदों में जिला पंचायत की 446 सीटें आती हैं। इनमें भाजपा ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की है। जो अन्य दलों की तुलना में सर्वाधिक हैं। संगठन ने दावा किया था कि वह आधे से ज्यादा सीटें जीतकर जिला पंचायतों सरकार बनाएंगे। ऐसे में भाजपा को 220 से ज्यादा सीट चाहिए थी, लेकिन वह इस लक्ष्य से कोसों दूर रह गई।

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इसके विपरीत भले ही अलग-अलग चुनाव लड़े हों, लेकिन सपा और रालोद ने 123 सीटें जीती हैं, जबकि बसपा का भी 83 सीट जीतकर प्रदर्शन बेहतर रहा है। कांग्रेस मात्र 11 सीटों पर सिमट गई। अन्य दलों और निर्दलीयों ने 129 सीटें जीती हैं।
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मेरठ में स्थिति काफी खराब
मेरठ में भाजपा का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। वर्ष 2010 और 2015 में जब बसपा और सपा की सरकार थी तब भी भाजपा आठ से दस सीटें जीत कर आई थी, लेकिन अपनी ही सरकार में मात्र पांच सीटें जैसे कैसे जीतना और बाकी अधिकांश प्रत्याशियों का जमानत तक ना बचा पाना पूरी तरह जनप्रतिनिधियों और संगठन पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब इस हार का ठीकरा किसान आंदोलन की नाराजगी पर फोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके विपरीत हाईकमान तक एक गुट यह बात भी पहुंचा चुका है कि किसान आंदोलन की नाराजगी सिवालखास क्षेत्र तक ही सीमित थी, थोड़ा बहुत क्षेत्र सरधना विधानसभा का लगता है। बाकी विधानसभा क्षेत्रों में कमजोर और अनजान चेहरों को प्रत्याशी बनाने का नुकसान भाजपा को मिला है।
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जिपं अध्यक्ष ब्लाक प्रमुख पर नहीं हो रहा मंथन
चुनाव परिणाम आए तीन दिन हो चुके हैं। चर्चा है कि ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव भी मई में ही संपन्न कराए जाने की तैयारी है लेकिन, संगठन स्तर पर अभी तक भी इसे लेकर कोई मंथन शुरू नहीं हुआ है। दावेदार खुद से सक्रिय हैं। ऐसे में फिर से भितरघात और बगावत की तैयारी शुरू हो गई है। 


विपक्ष ने बढ़ाई सक्रियता
भाजपा जहां हार के झटके से निष्क्रिय नजर आ रही है तो विपक्ष ने जोड़-तोड़ के बीच सक्रियता बढ़ा दी है। सपा ने अपना अध्यक्ष बनाने के लिए रालोद के साथ ही बसपा निर्दलीय सदस्यों से संपर्क साधना शुरू कर दिया। सूत्रों की मानें तो अतुल प्रधान और पूर्व विधायक योगेश वर्मा इसे लेकर लगातार सक्रिय हैं। इसके लिए दोनों ने अखिलेश यादव से भी संपर्क साधा है।

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