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निगम अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा अवैध होर्डिंग का खेल
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Wed, 21 Jun 2017 02:16 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर में अवैध होर्डिंग के कारोबार में फर्म का नाम बदलकर नगर निगम को हर साल लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यह खेल निगम अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। वहीं निगम अधिकारी अपनी कम छिपाने के लिए अवैध होर्डिंगों को वैध बता रहे हैं।
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शहर में अवैध होर्डिंगाें की भरमार है। शहर की एक फर्म ऐसी है जिसने 2016-2017 में शहर में होर्डिंग का कारोबार किया। अवैध होर्डिंग लगाने पर फर्म को नगर निगम ने 40 लाख का नोटिस दिया था, लेकिन फर्म ने आज तक धनराशि जमा नहीं की। 2017-2018 में इसी फर्म के मालिक ने फर्म का नाम बदलकर आवेदन किया है। इसी तरह और भी कई फर्म निगम को चूना लगा रही हैं। सूत्रों के अनुसार इस खेल में नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत है। ऐसे में सवाल है कि यदि ठेकेदार शहर छोड़कर चला गया तो निगम किससे बकाया वसूली करेगा।
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पौने तीन माह में हो चुका लाखों का कारोबार
निगम अधिकारी अपने बचाव के लिए कह रहे हैं कि वह होर्डिंग कारोबारियों से एक जुलाई से 31 मार्च तक का किराया वसूली करेंगे। लेकिन सवाल है कि जब एक फर्म से ही 40 लाख बकाए की वसूली नहीं कर पाए तो इन फर्मों से वसूली करने का कौन सा रास्ता अपनाएंगे। जिन पुराने ठेकेदारों ने चालू वित्तीय वर्ष में होर्डिंग कारोबार के लिए निगम में आवेदन किए हैं। उन सभी ने शहर में अवैध होर्डिंग लगाए हुए हैं।
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