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धोखा: सर्च इंजन पर नंबर था टोल फ्री, पड़ा महंगा, इंटरनेट पर जानकारी जुटाने के चक्कर में ठगे जा रहे लोग

Wed, 29 Dec 2021 04:18 PM IST
Dimple Sirohi अश्वनी जौहरी, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अश्वनी जौहरी, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 29 Dec 2021 04:18 PM IST
सार

इंटरनेट पर जानकारी जुटाने के लिए सर्च इंजन का प्रयोग करते हैं तो थोड़ा सतर्क हो जाएं। साइबर अपराधियों ने इन सर्च इंजनों पर नकली साइट का जाल फैला दिया है।

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number on the search engine was toll free, it was expensive, people are being cheated in the matter of gathering information on the Internet
cyber crime news - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंटरनेट पर जानकारी जुटाने के लिए सर्च इंजन का प्रयोग करते हैं तो थोड़ा सतर्क हो जाएं। साइबर अपराधियों ने इन सर्च इंजनों पर नकली साइट का जाल फैला दिया है। जिले का साइबर सेल भी इसकी गवाही दे रहा है। यहां सालभर में 1300 से अधिक शिकायत पहुंची हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत सर्च इंजन से जुड़ी हैं।   

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केस-1 : मेडिकल थाना क्षेत्र की शिक्षिका ने अपने खाते से जुड़ी जानकारी के लिए एक सर्च इंजन से अपने बैंक का टोल फ्री नंबर जुटाया। नंबर पर संपर्क कर उसके दिशा निर्देशों का पालन किया तो बैंक खाते से 2.50 लाख रुपये कट गए। 
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केस-2 : सदर निवासी युवक ने क्रेडिट कार्ड के लिए सर्च इंजन का प्रयोग किया। एक साइट पर आवेदन कर दिया। अगले दिन फोन आ गया। बैंककर्मी बनकर उनसे ऐसा सॉफ्टवेयर मोबाइल में डाउनलोड करा दिया, जिससे फोन हैक हो गया और खाते से 70 हजार रुपये कट गए।
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क्या है सर्च इंजन?
सर्च इंजन एक प्रकार का प्रोग्राम है, जिससे वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू) पर मौजूद कोई भी जानकारी जुटाई जा सकती है। गूगल, याहू, बिंग, जस्ट डायल, एपिक, रेडिफ, नीवा आदि ऐसे सर्च इंजन हैं, जिनका प्रयोग लोग जानकारी जुटाने के लिए करते हैं। 

इस तरह कर रहे ठगी 
-सर्च इंजन पर मौजूद टोल फ्री नंबर के जरिये।
-ओएलएक्स की तरह दिखने वाली फेक साइट से।  
-रिश्तेदार बन खाते में रुपये भेजने का झांसा देकर। 
-मदद की आड़ में एटीएम कार्ड बदलकर। 

लालच, लापरवाही और जानकारी के अभाव से लोग साइबर अपराधियों का शिकार हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर अगर बैंक से जानकारी लेनी है तो पासबुक भूलकर सर्च इंजन पर तलाश शुरू कर देते हैं। सूझबूझ से काम लेकर साइबर अपराधियों को नाकाम किया जा सकता है। - राघवेंद्र सिंह, प्रभारी, साइबर सेल

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