Nikay Chunav: सभी बागी चुनाव मैदान में, पार्टी प्रत्याशियों को छुड़ा रहे हैं पसीने, सपा-कांग्रेस में रार
मेरठ टिकट न मिलने के बाद वर्षों पुराने पार्टी कार्यकर्ता नाराज हो गए हैं। कई वार्डों में भाजपा, बसपा, सपा और कांग्रेस दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। अधिकतर बड़े दलों के ही कार्यकर्ता बागी बनकर पार्टी के प्रत्याशी के सामने चुनाव की ताल ठोक रहे हैं।
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नामांकन पत्रों की जांच के बाद सभी बागियों ने अपने-अपने वार्डों में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। अधिकतर बड़े दलों के ही कार्यकर्ता बागी बनकर पार्टी के प्रत्याशी के सामने चुनाव की ताल ठोक रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता दो खेमों में बंट गए हैं, जिसका नुकसान पार्षद पद पर ही नहीं बल्कि महापौर प्रत्याशियों को भी झेलना पड़ सकता है।
फूलबाग काॅलोनी वार्ड 60 से निर्वतमान पार्षद नीरज सिंह की पत्नी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। इनके सामने भाजपा ओबीसी मोर्चा के सहमीडिया प्रभारी मनोज वर्मा की पत्नी ज्योति वर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है। इससे भाजपा के कार्यकर्ता दो खेमों में बंट गए हैं।
वार्ड 18 से भाजपा नेता विपिन त्यागी ने भाजपा के पार्षद प्रत्याशी के सामने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकते हुए चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। वार्ड 13 से नरेंद्र कश्यप भी भाजपा से बागी होकर पार्षद का चुनाव लड़ रहे हैं।
त्यागी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश त्यागी ने भाजपा से नाराजगी जताते हुए भाजपा के बहिष्कार की चेतावनी दी है। बसपा, कांग्रेस और सपा में भी बागियों की कोई कमी नहीं है। कांशीराम आवासीय काॅलोनी के लोगों ने तो टिकट न मिलने पर बसपा जिला कार्यालय पर भी हंगामा किया था। ऐसे ही कई वार्डों में बागी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोके रहे हैं। जिनका असर महापौर प्रत्याशी पर भी पड़ेगा।
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इस संबंध में बसपा जिलाध्यक्ष मोहित आनंद का कहना है कि शहर में 18 वार्ड ऐसे हैं जिनमें बागियों के कारण ही हमने पार्टी का सिंबल देकर प्रत्याशी नहीं उतारा है। कांग्रेस में तो नामांकन के अंतिम समय गुटबाजी मुखर होती दिखी। जिसका वार्डों में साफ असर दिखाई दे रहा है। सपा से बागियों ने तो टिकट न मिलने पर जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष पर ही आरोप लगा दिए। इसके उपरांत कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में ताल ठोक दी।
भाजपा में अंदरूनी उठापटक, पार्षद टिकटों पर कई वार्डों में असंतोष
भाजपा में नगर निगम के कई वार्डों में टिकटों को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष दिख रहा है। तीन वार्डों में बूथ और वार्ड अध्यक्षों समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई वार्डों में पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं की वजह दूसरे लोगों को टिकट दे दिया गया है।
ऐसे में इन वार्डों में पार्टी को बागी कार्यकर्ता नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि इस मामले में भाजपा के महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल का कहना है कि भाजपा में टिकट कोई एक या दो लोग नहीं करते हैं, स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में हर वार्ड से नाम लिए जाने के बाद क्षेत्रीय कार्यालय और लखनऊ से टिकटों पर मुहर लगी है। हमारा कोई कार्यकर्ता नाराज नहीं हैं। सभी
मिलकर भाजपा के सभी पार्षदों और महापौर को चुनाव जिताएंगे।
बता दें कि भाजपा ने पूर्व महापौर हरिकांत अहलूवालिया को महापौर का प्रत्याशी बनाया है। भाजपा में महापौर प्रत्याशी के लिए 54 दावेदारों ने आवेदन किए थे। नगर निगम के 90 वार्डों में से 88 पर प्रत्याशी उतारे हैं। दो वार्डों में निर्विरोध पार्षदों का चुना जाना तय हो गया है।
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सपा में पार्षद के टिकटों पर रार अखिलेश यादव से की शिकायत
पार्षद के टिकटों को लेकर सपाइयों में रार चल रही है। सपा कार्यकर्ता इसके लिए जिला स्तरीय पदाधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं। इसकी शिकायत राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक भी पहुंच गई है। नगर में 90 वार्ड हैं, जिनमें से सपा ने 60 वार्डों से पार्षद प्रत्याशियों को टिकट दिए हैं।
28 वार्डों से रालोद और आजाद समाज पार्टी ने प्रत्याशी उतारे हैं। तीनों पार्टियों का गठबंधन है। दो वार्डों से भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। इन वार्डों से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा गया है। सपाइयों में विवाद की वजह है कि कुछ वार्डों के प्रत्याशी अंतिम समय में बदल दिए गए हैं। ऐसे पांच वार्ड हैं। इनकी सूची भी जारी हो गई थी और इन्होंने नामांकन भी कर दिया था। ये वार्ड 71, 72, 75, 77 और 90 हैं।
इन वार्डों से पहले इसरार, मतीन अंसारी, मुस्तफा अंसारी, महताब की पत्नी और सरताज। अब इनके प्रत्याशी बदले जा चुके हैं। नए प्रत्याशी बनाए गए हैं और उन्होंने भी नामांकन दाखिल किया है। जिनके टिकट कटे हैं, वे इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं।
इसके अलावा सपा के पूर्व महानगर उपाध्यक्ष नईम सैफी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पत्र लिखा है, जिसमें टिकटों के वितरण में धांधली जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस संबंध में सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह का कहना है कि टिकट हाईकमान से ही तय हुए हैं। धांधली जैसे आरोप निराधार हैं।
बसपा के पदाधिकारी पर टिकट के नाम पर पैसे लेने का आरोप
खड़ौली वार्ड 38 निवासी पूर्व पार्षद प्रमोद ने सोमवार को प्रेस नोट जारी करते हुए झांसी के रहने वाले बसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर पैसे लेने का आरोप लगाया है। पूर्व पार्षद का कहना है कि पार्टी से टिकट दिलाने के नाम पर तीन साल में उससे पार्टी फंड के नाम पर साढे छह लाख रुपए लिए गए हैं और अब निकाय चुनाव में टिकट नहीं कराया। पैसे वापस मांगने पर पदाधिकारी ने धमकी दी है। पूर्व पार्षद का कहना है कि अगर बसपा पदाधिकारी ने उसके पैसे वापस नहीं किए तो वह पंचायत करने के लिए मजबूर हो जाएगा।
प्रत्याशियों को लेकर कांग्रेस में रार, गुटबाजी तेज
सत्ता के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस को सभी वार्डों में प्रत्याशी ढूंढे नहीं मिले। पार्टी पदाधिकारियों ने कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि दावा 70 वार्डों में प्रत्याशी उतारने का किया जा रहा है लेकिन सूची तक पदाधिकारियों के पास नहीं है। माना जा रहा है कि महज 50 वार्डों में ही पार्टी की ओर से सिंबल देते हुए दावेदार प्रत्याशी बनाए गए हैं।
परविंदर सिंह ईशु की ओर से अपने वार्ड में पार्टी कार्यकर्ता को टिकट न मिलने के बाद दो प्रत्याशियों के सिंबल लौटा कर चुनाव मैदान में उतारने से पार्टी में खलबली है। पदाधिकारी मान मनौवल कर डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं।
वहीं, कुछ वार्डों में टिकट न मिलने पर बिना पार्टी सिंबल के निर्दलीय के रूप में भी बागी मैदान में आ गए हैं। मामले में जिलाध्यक्ष अवनीश काजला जहां महानगर अध्यक्ष के पाले में गेंद फेंक रहे हैं तो वहीं महानगर अध्यक्ष जाहिद अंसारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
उनका कहना है कि पार्टी की ओर से जमीनी रूप से मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। कितनी सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए हैं, इस सवाल का जवाब पार्टी पदाधिकारियों के पास नहीं है। दावा 70 वार्डों में प्रत्याशी उतारने का किया जा रहा है, वही पार्टी सूत्रों के मुताबिक 50 वार्डों में भी पार्टी अपना उम्मीदवार बमुश्किल उतार पाई है।