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रैन बसेरों पर ताला: टूटी खिड़कियां, गद्दे-रजाई गायब, सर्द रातों में पॉलिथीन में लिपटी फुटपाथ पर सो रही जिंदगी

Tue, 19 Dec 2023 01:40 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 19 Dec 2023 01:40 PM IST
सार

सर्द रातों में गरीबों को आसरा देने की नगर निगम की व्यवस्था बदहाली का शिकार है। रैन बसेरों पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद बेघर लोग खुले में ठिठुरकर तो कहीं पॉलिथीन ओढ़कर सोने को मजबूर हैं। 

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Night shelters locked: broken windows, no mattresses, people sleeping on footpaths wrapped in polythene
फुटपाथ पर सोता व्यक्ति - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गरीबों की सर्द रातें फुटपाथ पर न गुजरें इसके लिए की गई रैन बसेरों की व्यवस्था बदहाल है। कहीं खिड़की टूटी है तो कहीं गद्दे और रजाई नहीं हैं। कई जगह तो रात में ताला लटक जाता है। रैन बसेरों की व्यवस्था व्यवस्थित करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से नगर निगम को दिए गए 45 लाख का बजट कागजों पर ही खर्च हो रहा है और गरीब फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर हैं।

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कड़ाके की ठंड में 15 दिसंबर से 31 जनवरी तक रैन बसेरों में गरीबों के रहने की व्यवस्था की जाती है। महानगर के 12 रैन बसेरों की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। नगर आयुक्त ने 13 नवंबर निरीक्षण कर रैन बसेरों की व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए थे। 
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तीन दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेशभर में रैन बसेरों की व्यवस्था सुधारने की बात कही थी। लेकिन मेरठ के रैन बसेरों में इन निर्देशों को हवा में उठाया जा रहा है। बच्चा पार्क और पल्लवपुरम समेत पांच रैन बसेरों में गद्दे-रजाई तक नहीं हैं। खिड़कियां टूटी हुई हैं। मंगतपुरम, परतापुर और मुल्तानगर में रात दस बजते ही रैन बसेरे में ताला लग जाता है।

रैन बसेरे में रहते हैं एलएंडटी के कर्मचारी 
मंगतपुरम, परतापुर में नगर निगम के रैन बसेरे में रैपिड प्रोजेक्ट पर कार्य करने वाले एलएंडटी के कर्मचारी रहते हैं। कोई गरीब वहां पहुंचता है तो ये कर्मचारी उसे भगा देते हैं। कई बार इसकी शिकायत निगम में की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

शहर में 12 रैन बसेरा 
रैन बसेरों के प्रबंधक राकेश गौड़ ने बताया कि घंटाघर स्थित टाउन हॉल, बच्चा पार्क, मंगतपुरम, सुरजकुंड, शेरगढी, तिरंगा गेट, मेडिकल, पल्लवपुरम, कासमपुर कंकरखेड़ा, खडौली, परतापुर और मुल्तान नगर में नगर निगम के रैन बसेरे है। शहर में अन्य चार रैन बसेरे डूडा परियोजना के तहत है।

रैन बसेरों पर छह-सात लोग आ रहे हैं। व्यवस्था बेहतर बनाने का प्रयास जारी हैं। चार रैन बसेरों का सोमवार को निरीक्षण किया था। भैसाली, सोहराब गेट डिपो व प्यारेलाल अस्पताल में अस्थाई रैन बसेरे भी बनाए गए हैं। -प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त
 

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