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नव विवाहित डॉक्टर दंपती ने दिल जीता, रोजाना 20 घंटे कोविड वार्ड में ड्यूटी, पर नहीं हारी हिम्मत

Sun, 28 Jun 2020 11:34 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 28 Jun 2020 11:34 AM IST
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Newly married doctor couple set a record of twenty hours daily in duty in covid-19 ward in meerut medical, inspires others
नव विवाहित डॉक्टर दंपती डॉ. सूर्य किरण और डॉ. स्नेहा।  - फोटो : amar ujala
मेरठ मेडिकल कॉलेज के कोविड आईसीयू वार्ड में नव विवाहित डॉक्टर दंपती ने तीन माह से मरीजों की सेवा कर सभी का दिल जीत लिया। खास बात यह है कि इस दंपती ने एक साथ ड्यूटी करने की मांग की थी। रोजाना 18-20 घंटे ड्यूटी कर यह चिकित्सक दंपती कोरोना के 100 से ज्यादा मरीजों को स्वस्थ कर घर भेज चुका है।
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डॉ. सूर्य किरण मूल रूप से फुगाना मुजफ्फरनगर निवासी हैं, जो इससे पहले सुभारती मेडिकल में रहे। नवंबर 2019 में इनकी शादी मूल रूप से राजस्थान निवासी डॉ. स्नेहा  मलिक से हुई। यह दंपती वर्तमान में मेरठ में कैंट इलाके में रह रहा है। 
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पांच माह से दे रहे सेवा
मेरठ मेडिकल कॉलेज में इन्हें अपनी सेवाएं देते हुए 5 माह ही हुए हैं। डॉ. स्नेहा ने बताया कि चिकित्सक के रूप में जन सेवा करने के लिए हम दोनों प्रतिज्ञाबद्ध हैं। शादी के बाद हमने निश्चय किया कि हम दोनों एक साथ एक ही जगह पर कार्य करेंगे।

पति सूर्यकिरण सहायक आचार्य हैं। वहीं, स्नेहा सीनियर रेजिडेंट हैं। दोनों ने मेडिसिन विभाग में जिस समय कार्य करना शुरू किया, उस समय कोरोना महामारी के रूप में फैल चुका था। जिसके बाद दोनों की ड्यूटी कोविड आईसीयू वार्ड में लग गई। 

हर घंटे भी देखे गंभीर मरीज
स्नेहा बताती हैं कि कोविड आईसीयू में कार्य करने के दौरान हम रोजाना 18 से 20 घंटे कार्य में व्यस्त रहे। आईसीयू का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। भर्ती मरीजों का रोजाना कई बार चेकअप किया। जिसके लिए पीपीई किट पहनना अनिवार्य था। जिसकी वजह से इतने  उच्च तापमान में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन हमारी यह परेशानी उन मरीजों के सामने कुछ भी नहीं रही, जो जिंदगी व मौत के बीच झूल रहे थे।

पूरे धैर्य एवं क्षमता के साथ मरीजों का इलाज किया। इसमें हमारे सीनियर एवं सहयोगी डॉक्टर एवं कर्मचारियों ने भी पूरा साथ दिया। हमें खुशी है कि 100 से अधिक गंभीर मरीजों को स्वस्थ करने में सफल रहे। आईसीयू में 20 बेड हैं, जो फुल रहते हैं। कोरोना को हराकर जो मरीज अपने घर पहुंचे हैं वही हमारे कार्य का पुरस्कार है। जो मरीज आईसीयू में गंभीर थे हमने हर घंटे भी उन मरीजों को देखा। 

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