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नोटबंदी के बाद मेरठ में एक भी नया प्रोजेक्ट नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:50 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी का बड़ा असर रीयल एस्टेट पर पड़ा। इस एक साल में मेरठ में एक भी नया प्रोजेक्ट सही तरीके से लांच नहीं हो पाया। बड़े उद्यमियों ने अपने हाथ रोके रखे। इसका तगड़ा असर मेरठ विकास प्राधिकरण भी पड़ा और विकास शुल्क के नाम पर एमडीए का कोष भी खाली ही रहा। यहां तक कि कई छोटे छोटे प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो नोटबंदी के बाद तत्काल बीच में अटक गए थे, जो आज तक भी शुरू नहीं हो पाए।
दिल्ली के नजदीक होने के कारण मेरठ में डेवलेपमेंट के संभावनाएं लगातार आकार ले रही थीं। हालांकि रीयल एस्टेट पिछले कई साल से कुछ मंदा ही चल रहा था पर नोटबंदी ने इस धंधे को तगड़ा झटका दे दिया। कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम बंद हो गया तो कई ऐसे प्रोजेक्ट रहे शुरू होने से पहले ही बंद हो गए। मेरठ विकास प्राधिकरण में इस एक साल में एक भी अहम प्रोजेक्ट लांच करने के लिए मानचित्र का आवेदन ही नहीं किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि विकास शुल्क के नाम पर एमडीए के पास पैसा नहीं आया।
बस समेट रहे पुराने प्रोजेक्ट को
एडको डेवलेपर की बात करें तो इस साल एक भी नया प्रोजेक्ट इस डेवलेपर ने लांच नहीं किया। यही हाल एपेक्स डेवलेपर का भी है। अंसल डेवलेपर के कई प्रोजेक्ट को निपटाने पर जोर दिया गया तो सुशांत सिटी जैसे कई अहम प्रोजेक्ट अभी अटके ही हैं। हालांकि कवायद तेजी से चल रही है कि ये प्रोजेक्ट आगे बढें। सुपरटेक का भी अपना पूरा जोर पाम ग्रीन प्रोजेक्ट को ही पूरा करने पर है।
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सिमट गए छोटे बिल्डर
जमीन लेकर छोटे छोटे मकान बनाने वाले बिल्डराें का धंधा नोटबंदी में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। शहर की कई बड़ी कालोनियों में ऐसे कई बड़े भूखंड खाली पड़े हैं जहां काम शुरू ही नहीं हो पाया।
पेमेंट ने कर दिया परेशान
डेवलेपर का कहना है कि प्रत्येक प्रोजेक्ट में काफी काम ऐसा होता है, जिसके लिए डेवलेपर को सीधा भुगतान करना होता है। मजदूरी कैश दी जाती है। काफी निर्माण सामग्री ऐसी होती है, जिसका भुगतान भी सीधा दिया जाता है। मसलन रोड़ी, डस्ट, लोहे का सामान, सेटरिंग का सामान यहां तक कि सामान की ढुलाई भी कैश दी जाती है। नोटबंदी बंद होने का असर इसी भुगतान पर सबसे ज्यादा आया है। पाई पाई का हिसाब रखने के लिए अब पूरा सिस्टम बनाना पड़ रहा है।
नोटबंदी के बाद सीधा असर रीयल एस्टेट पर आया, जिससे अभी तक यह व्यवसाय उठा नहीं है। नया कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है। केवल पुराने प्रोजेक्ट को ही समेटने का काम चल रहा है। रही सही कसर रेरा पूरी कर रहा है।
- वरूण अग्रवाल डायरेक्टर एडको डेवलेपर
नया कोई काम शुरू नहीं किया बल्कि अन्य व्यवसायों की तरफ अब बिल्डर अग्रसर हो रहे हैं। कारण कि यह धंधा अब आसान नहीं रहा है। मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। नोटबंदी का अच्छा असर इस धंधे पर नहीं हुआ।
- अतुल गुप्ता, डायरेक्टर एपेक्स डेवलेपर
नोटबंदी ने रीयल एस्टेट की कमर तोड़ दी है। सड़कों आदि के निर्माण कार्य भी प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं, प्राधिकरण की आवासीय योजनाआें पर भी काम नहीं हो पाया है। यह व्यवसाय एक साल से समझो ठप ही है।
-मुकेश चौहान कंाट्रेक्टर
नोटबंदी से काम बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। पूरे साल नए काम शुरू नहीं हो पाए। कारण स्पष्ट है कि निर्माण के काफी काम सीधे कैश में होते हैं। यह भी व्यवस्था का एक अंग है। अब रीयल एस्टेट बिल्कुल ठहरा है।- ओमपाल सिंह, काट्रेक्टर
नोटबंदी का एक साल ओवरऑल खराब नहीं है। हालांकि एक साथ सारे काम कराने से सरकार की प्रतिबद्धता साबित नहीं हो रही है। टैक्स बढ गए हैं। जीएसटी लागू हो गया। मार्केट में उपभोक्ता तो वही हैं। सुविधाएं दे तो निर्णय सही साबित हो। हालांकि सही खरीददार निकलकर सामने आ रहा है।- सुनील तनेजा, सीनियर जनरल मैनेजर मार्केटिंग, अंसल डेवलेपर
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दिल्ली के नजदीक होने के कारण मेरठ में डेवलेपमेंट के संभावनाएं लगातार आकार ले रही थीं। हालांकि रीयल एस्टेट पिछले कई साल से कुछ मंदा ही चल रहा था पर नोटबंदी ने इस धंधे को तगड़ा झटका दे दिया। कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम बंद हो गया तो कई ऐसे प्रोजेक्ट रहे शुरू होने से पहले ही बंद हो गए। मेरठ विकास प्राधिकरण में इस एक साल में एक भी अहम प्रोजेक्ट लांच करने के लिए मानचित्र का आवेदन ही नहीं किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि विकास शुल्क के नाम पर एमडीए के पास पैसा नहीं आया।
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बस समेट रहे पुराने प्रोजेक्ट को
एडको डेवलेपर की बात करें तो इस साल एक भी नया प्रोजेक्ट इस डेवलेपर ने लांच नहीं किया। यही हाल एपेक्स डेवलेपर का भी है। अंसल डेवलेपर के कई प्रोजेक्ट को निपटाने पर जोर दिया गया तो सुशांत सिटी जैसे कई अहम प्रोजेक्ट अभी अटके ही हैं। हालांकि कवायद तेजी से चल रही है कि ये प्रोजेक्ट आगे बढें। सुपरटेक का भी अपना पूरा जोर पाम ग्रीन प्रोजेक्ट को ही पूरा करने पर है।
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सिमट गए छोटे बिल्डर
जमीन लेकर छोटे छोटे मकान बनाने वाले बिल्डराें का धंधा नोटबंदी में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। शहर की कई बड़ी कालोनियों में ऐसे कई बड़े भूखंड खाली पड़े हैं जहां काम शुरू ही नहीं हो पाया।
पेमेंट ने कर दिया परेशान
डेवलेपर का कहना है कि प्रत्येक प्रोजेक्ट में काफी काम ऐसा होता है, जिसके लिए डेवलेपर को सीधा भुगतान करना होता है। मजदूरी कैश दी जाती है। काफी निर्माण सामग्री ऐसी होती है, जिसका भुगतान भी सीधा दिया जाता है। मसलन रोड़ी, डस्ट, लोहे का सामान, सेटरिंग का सामान यहां तक कि सामान की ढुलाई भी कैश दी जाती है। नोटबंदी बंद होने का असर इसी भुगतान पर सबसे ज्यादा आया है। पाई पाई का हिसाब रखने के लिए अब पूरा सिस्टम बनाना पड़ रहा है।
नोटबंदी के बाद सीधा असर रीयल एस्टेट पर आया, जिससे अभी तक यह व्यवसाय उठा नहीं है। नया कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है। केवल पुराने प्रोजेक्ट को ही समेटने का काम चल रहा है। रही सही कसर रेरा पूरी कर रहा है।
- वरूण अग्रवाल डायरेक्टर एडको डेवलेपर
नया कोई काम शुरू नहीं किया बल्कि अन्य व्यवसायों की तरफ अब बिल्डर अग्रसर हो रहे हैं। कारण कि यह धंधा अब आसान नहीं रहा है। मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। नोटबंदी का अच्छा असर इस धंधे पर नहीं हुआ।
- अतुल गुप्ता, डायरेक्टर एपेक्स डेवलेपर
नोटबंदी ने रीयल एस्टेट की कमर तोड़ दी है। सड़कों आदि के निर्माण कार्य भी प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं, प्राधिकरण की आवासीय योजनाआें पर भी काम नहीं हो पाया है। यह व्यवसाय एक साल से समझो ठप ही है।
-मुकेश चौहान कंाट्रेक्टर
नोटबंदी से काम बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। पूरे साल नए काम शुरू नहीं हो पाए। कारण स्पष्ट है कि निर्माण के काफी काम सीधे कैश में होते हैं। यह भी व्यवस्था का एक अंग है। अब रीयल एस्टेट बिल्कुल ठहरा है।- ओमपाल सिंह, काट्रेक्टर
नोटबंदी का एक साल ओवरऑल खराब नहीं है। हालांकि एक साथ सारे काम कराने से सरकार की प्रतिबद्धता साबित नहीं हो रही है। टैक्स बढ गए हैं। जीएसटी लागू हो गया। मार्केट में उपभोक्ता तो वही हैं। सुविधाएं दे तो निर्णय सही साबित हो। हालांकि सही खरीददार निकलकर सामने आ रहा है।- सुनील तनेजा, सीनियर जनरल मैनेजर मार्केटिंग, अंसल डेवलेपर