{"_id":"669fc7ad3c5a8acb12039691","slug":"nayan-se-badi-cheej-koi-nahi-meerut-news-c-14-1-mrt1002-606146-2024-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: सावन ऋतु में शब्दों की मादकता से मदहोश हो गए रसिक श्रोता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: सावन ऋतु में शब्दों की मादकता से मदहोश हो गए रसिक श्रोता
विज्ञापन
कवियों की प्रिय सावन ऋतु का आगमन हो चुका है। बरखा बहार से क्यारी दमक रही है। कोयल के गान पर मन मयूर सा नाचने को आतुर है। प्रकृति के रंगों में श्रृंगार समेत नवरस झलकने लगे हैं। यह नजारा मंगलवार को मेरठ में साक्षात देखने को मिला। मेला नौचंदी में दो अलग-अलग कविसम्मेलनों में देश के नामचीन कवियों ने अपने रस, छंद और अलंकारों से दिलकश माहौल में मादकता घोल दी। दोपहर के वक्त रिमझिम फुहारों के बीच फिल्मी गीतकार संतोष आनंद ने अपने अमर गीतों को गुनगुनाया तो रात में वीर रस के अमिट हस्ताक्षर हरिओम पंवार समेत कई प्रसिद्ध कवियों ने देशभक्ति और इंसानी दर्द को अपने गीतों का अमलीजामा पहना दिया। दोनों महफिलों में रसिक श्रोता मदहोश हो गए।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
काव्य
- मंगलवार को मेला नौचंदी के पटेल मंडप में हुए दो कविसम्मेलन
- दिन और रात में सजी महफिलों में नामचीन कवियों ने समा बांधा
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
संतोष के गीतों पर आनंद में डूब गए कद्रदान
माई सिटी रिपोर्टरमेरठ। जिंदगी की खुरदुरी जमीन पर नंगे पांव चलते हुए रूमानियत को पनाह देने वाले फिल्मी गीतकार संतोष आनंद आज भले ही 85 साल के हो गए हों, लेकिन शब्दों का यह बाजीगर आज भी अपने गीतों से युवाओं और बुजुर्गों पर जादू सा कर देता है। मंगलवार को संतोष आनंद मेरठ में थे। उनके आगमन पर मानो प्रकृति भी न्यौछावर हो गई। बादलों ने गड़गड़ाहट के साथ संतोष आनंद समेत सभी कवियों का स्वागत किया। आनंद ने पूरे ओज के साथ अपने गीतों की प्रस्तुति दी। इक प्यार का नगमा है समेत उन्होंने तमाम गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विज्ञापन
दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण डाॅ. सोमेंद्र तोमर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विनोद भारती द्वारा की गई। मंच संचालन कार्यक्रम संयोजिका तुषा शर्मा ने किया। कवयित्री तुषा शर्मा ने कहा कि वक्त के साथ जो मुश्किल कोई टल जाएगी, इसका मतलब नहीं तकदीर बदल जाएगी, सोचकर आप अगर देंगे मोहब्बत का जवाब, इतने अरसे में तो दुनिया ही बदल जाएगी आदि गीतों पर सभी का मनमोह लिया। इस बीच विजेंद्र सिंह परवाज ने सुनाया कि ये जिंदगी भी कैसे बहाने में कट गई, जैसा नहीं हूं वैसा दिखाने में कट गई। हास्य कवि लटूरी लठ ने गुदगुदाया कि वो हिंदी के दम सारी दुनिया डोल लेता है, अंग्रेजी तो पउआ पीकर भी बोल लेता है। लखीमपुर खीरी से आए आशीष अनल ने कवियों की महिमा को अपने गीत में इस तरह पिरोया कि कवि का हर एक शब्द राष्ट्र हित में ही अर्पण होता है, आदिकाल से सुना है कवि सत्ता का दर्पण होता है। राज कौशिक, कुशल कुशलेंद्र, मुकेश शर्मा ने भी कविता पाठ किया। इस जितेंद्र त्यागी, कमलेश शर्मा, बृजपाल शर्मा, चंद्रशेखर मयूर, मुनीश कुमार, मुकेश शर्मा, महिपाल भड़ाना आदि रहे।
-- --
जिसने पिस्टल की गोली से इंकलाब को भाषा दी है
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नौचंदी पटेल मंडप में रात में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य मंचों के शिखर पुरुष कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपने चिरपरिचित अंदाज में पढ़ा कि शेखर महायज्ञ का नायक, गौरव भारत भू का है, जिसका भारत की जनता से रिश्ता आज लहू का है, जिसके जीवन के दर्शन ने हिम्मत को परिभाषा दी, जिसने पिस्टल की गोली से इंकलाब को भाषा दी है, जिसकी यशगाथा भारत के घर-घर में नभचुंबी है, जिसकी बेहद अल्प आयु भी कई युगों से लंबी है।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद मां सरस्वती वंदना की गई। कवि सम्मेलन का संचालन पद्मभूषण डॉ. सुनील जोगी ने किया। इटावा से आए कवि डॉ. राजीव राज ने पढ़ा कि गीत मकरंद है, महकेंगे हमेशा यारों, सांस की पंखुड़ी तो सूख के झड़ जानी है। ओज के कवि विनीत चौहान ने सुनाया कि यह धरती रण में दुश्मन का, कोई एहसान नहीं रखती, जुगनू की ड्योरी पूजे जो, ऐसा दिनमान नहीं रखती। डॉ. कीर्ति काले ने माता-पिता की महिमा का गुनगान किया कि काशी में ढूंढोगे तो भोलेनाथ मिल जाएंगे, मगर मां बाप के चरणों में तो चारों धाम मिलते हैं। युवा कवि प्रियशु गजेंद्र ने पढ़ा कि सुनता हूं वे लोग बड़े हैं, जो गीता और वेद पढ़े हैं, हमने तो पूरी रामायण में शबरी के दो बेर पड़े हैं। सुदीप भोला ने सुनाया कि न केवल मंदिर के निर्माण, न केवल पूजा विधि विधान, न केवल भक्तों के भगवान ये होगा, उनसब का सम्मान जो योग में देह दे गए दान। कवि सम्मेलन में डा. प्रवीण शुक्ल, सुमनेश सुमन, आलोक सिसोदिया, विवेक रस्तौगी, नरेंद्र राष्ट्रवादी, संजय जेन, नासिर सैफी, चंद्रशेखर मयूर आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
काव्य
- मंगलवार को मेला नौचंदी के पटेल मंडप में हुए दो कविसम्मेलन
- दिन और रात में सजी महफिलों में नामचीन कवियों ने समा बांधा
संतोष के गीतों पर आनंद में डूब गए कद्रदान
माई सिटी रिपोर्टरमेरठ। जिंदगी की खुरदुरी जमीन पर नंगे पांव चलते हुए रूमानियत को पनाह देने वाले फिल्मी गीतकार संतोष आनंद आज भले ही 85 साल के हो गए हों, लेकिन शब्दों का यह बाजीगर आज भी अपने गीतों से युवाओं और बुजुर्गों पर जादू सा कर देता है। मंगलवार को संतोष आनंद मेरठ में थे। उनके आगमन पर मानो प्रकृति भी न्यौछावर हो गई। बादलों ने गड़गड़ाहट के साथ संतोष आनंद समेत सभी कवियों का स्वागत किया। आनंद ने पूरे ओज के साथ अपने गीतों की प्रस्तुति दी। इक प्यार का नगमा है समेत उन्होंने तमाम गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विज्ञापन
दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण डाॅ. सोमेंद्र तोमर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विनोद भारती द्वारा की गई। मंच संचालन कार्यक्रम संयोजिका तुषा शर्मा ने किया। कवयित्री तुषा शर्मा ने कहा कि वक्त के साथ जो मुश्किल कोई टल जाएगी, इसका मतलब नहीं तकदीर बदल जाएगी, सोचकर आप अगर देंगे मोहब्बत का जवाब, इतने अरसे में तो दुनिया ही बदल जाएगी आदि गीतों पर सभी का मनमोह लिया। इस बीच विजेंद्र सिंह परवाज ने सुनाया कि ये जिंदगी भी कैसे बहाने में कट गई, जैसा नहीं हूं वैसा दिखाने में कट गई। हास्य कवि लटूरी लठ ने गुदगुदाया कि वो हिंदी के दम सारी दुनिया डोल लेता है, अंग्रेजी तो पउआ पीकर भी बोल लेता है। लखीमपुर खीरी से आए आशीष अनल ने कवियों की महिमा को अपने गीत में इस तरह पिरोया कि कवि का हर एक शब्द राष्ट्र हित में ही अर्पण होता है, आदिकाल से सुना है कवि सत्ता का दर्पण होता है। राज कौशिक, कुशल कुशलेंद्र, मुकेश शर्मा ने भी कविता पाठ किया। इस जितेंद्र त्यागी, कमलेश शर्मा, बृजपाल शर्मा, चंद्रशेखर मयूर, मुनीश कुमार, मुकेश शर्मा, महिपाल भड़ाना आदि रहे।
जिसने पिस्टल की गोली से इंकलाब को भाषा दी है
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नौचंदी पटेल मंडप में रात में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य मंचों के शिखर पुरुष कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपने चिरपरिचित अंदाज में पढ़ा कि शेखर महायज्ञ का नायक, गौरव भारत भू का है, जिसका भारत की जनता से रिश्ता आज लहू का है, जिसके जीवन के दर्शन ने हिम्मत को परिभाषा दी, जिसने पिस्टल की गोली से इंकलाब को भाषा दी है, जिसकी यशगाथा भारत के घर-घर में नभचुंबी है, जिसकी बेहद अल्प आयु भी कई युगों से लंबी है।
दीप प्रज्ज्वलन के बाद मां सरस्वती वंदना की गई। कवि सम्मेलन का संचालन पद्मभूषण डॉ. सुनील जोगी ने किया। इटावा से आए कवि डॉ. राजीव राज ने पढ़ा कि गीत मकरंद है, महकेंगे हमेशा यारों, सांस की पंखुड़ी तो सूख के झड़ जानी है। ओज के कवि विनीत चौहान ने सुनाया कि यह धरती रण में दुश्मन का, कोई एहसान नहीं रखती, जुगनू की ड्योरी पूजे जो, ऐसा दिनमान नहीं रखती। डॉ. कीर्ति काले ने माता-पिता की महिमा का गुनगान किया कि काशी में ढूंढोगे तो भोलेनाथ मिल जाएंगे, मगर मां बाप के चरणों में तो चारों धाम मिलते हैं। युवा कवि प्रियशु गजेंद्र ने पढ़ा कि सुनता हूं वे लोग बड़े हैं, जो गीता और वेद पढ़े हैं, हमने तो पूरी रामायण में शबरी के दो बेर पड़े हैं। सुदीप भोला ने सुनाया कि न केवल मंदिर के निर्माण, न केवल पूजा विधि विधान, न केवल भक्तों के भगवान ये होगा, उनसब का सम्मान जो योग में देह दे गए दान। कवि सम्मेलन में डा. प्रवीण शुक्ल, सुमनेश सुमन, आलोक सिसोदिया, विवेक रस्तौगी, नरेंद्र राष्ट्रवादी, संजय जेन, नासिर सैफी, चंद्रशेखर मयूर आदि रहे।