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Navratr 2023: दुर्गा अष्टमी आज, सर्वार्थ सिद्धि योग में कन्या पूजन, ये है नारी शक्ति के सम्मान का पर्व

Sun, 22 Oct 2023 11:43 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 22 Oct 2023 11:43 AM IST
सार

दुर्गा अष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जा रहा है। सुबह महागौरी की पूजा के बाद नौ कन्याओं और एक बालक को घर पर आमंत्रित किया जाता है। इनकी पूजा के बाद उन्हें हल्वा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। देखें शुभ मुहूर्त।

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Navratr 2023: Durga Ashtami today, girl worship in Sarvartha Siddhi Yoga
दुर्गा अष्टमी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दुर्गाष्टमी का पर्व रविवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग में मनाया जाएगा। नवरात्र के नौ दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। महिलाएं और पुरुष व्रत कर आठवें दिन दुर्गाष्टमी नौवें दिन महानवमी पर कन्याओं का पूजन कर व्रत का पारण करते हैं। हर घर में परंपरा अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है।
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धर्मशास्त्रों के अनुसार महाअष्टमी को दुर्गा पूजा का मुख्य दिन माना जाता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा होती है। माना जाता है कि अष्टमी के दिन ही देवी दुर्गा ने चंडमुंड का संहार किया।
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इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सुबह महागौरी की पूजा के बाद नौ कन्याओं और एक बालक को घर पर आमंत्रित किया जाता है। इनकी पूजा के बाद उन्हें हल्वा, पूरी और चने का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा उन्हें भेंट और उपहार देकर विदा किया जाता है।

उन्होंने बताया कि बालक को बटुक भैरव के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने हर शक्तिपीठ में माता की सेवा के लिए बटुक भैरव को तैनात किया हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर किसी शक्तिपीठ में भैरव के दर्शन न किए जाएं तो मां के दर्शन अधूरे माने जाते हैं।

नारी शक्ति के सम्मान का है पर्व
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि नवरात्र पर कन्याओं का पूजन कर उनके प्रति आदर और सम्मान का भाव जागृत होता है। यह नारी शक्ति के सम्मान का पर्व है। चार वर्ष की कन्या कल्याणी कहलाती है। कल्याणी कन्या का नित्य पूजन करना चाहिए। तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति कहते हैं। इनका पूजन करने से धर्म, अर्थ, काम की पूर्ति होती है। धन धान्य का आगमन होता है।

दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन मुहूर्त 
लाभामृत चौघड़िया : सुबह 9:15 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक
शुभ की चौघड़िया : दोपहर 1:30 से 02:55 बजे तक
त्याज्य राहु काल: शाम 4:30 से 06:00 बजे तक

अष्टमी पर योग 
सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:26 से शाम 06:44 बजे तक।
रवि योग : सुबह 06:44 से अगले दिन सुबह 06:27 बजे तक।

नवमी पूजन 
शुभ चौघड़िया: सुबह 09:15 से 10:40 बजे तक
त्याज्य राहु काल : सुबह 7:30 से 09:00 बजे तक

दुर्गाष्टमी- रविवार 22 अक्तूबर यानी आज
महानवमी- सोमवार 23 अक्तूबर

 
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