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निगम की करोड़ों की भूमि पर कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 26 Sep 2015 12:22 AM IST
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नगर निगम की भूमि को भू माफिया लगातार कब्जा कर बेच रहे हैं। खड़ौली में निगम की करोड़ों रुपये की भूमि पर प्लाटिंग कर दी गई। जहां पर मकान बनकर खड़े हो गए। शिकायत के बाद नगर निगम प्रशासन जागा तो सरकारी भूमि पर अपना हक जताने वालों की लाइन लग गई। शनिवार को भी एक व्यक्ति ने स्वयं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कई प्रदेश के कई आईएएस का मित्र बताते हुए निगम अधिकारियों पर दबाव बनाया। साथ ही भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग की। हालांकि बाद में वह व्यक्ति सरकारी भूमि संबंधी कुछ बैनामे देखकर खिसक लिया।
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक खसरा नंबर 43-7 में 14540 वर्ग मीटर भूमि है। इसमें से लगभग तीन हजार वर्ग मी. भूमि पर माफिया ने प्लाटिंग कर दी है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये हैं। यहां कुछ पर चारदीवारी है तो कुछ पर भवन खड़े हो गए हैं। निगम की जमीन पर भवन बनाने वालों के खिलाफ पीपी एक्ट का मामला न्यायालय में शुरू हो गया है। वहीं बाकी खाली पड़ी कुछ भूमि पर नगर निगम ने डूडा को रैनबसेरा बनाने की अनुमति दी है।
जहां निर्माण कार्य चल रहा है। माफिया आए दिन रैनबसेरे का विरोध कर रहे हैं। शनिवार को एक व्यक्ति अपने तीन चार साथियों को साथ लेकर संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार के पास पहुंचा। उस व्यक्ति ने अपना नाम सरफराज बताते हुए स्वयं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई प्रदेशों के आईएएस अधिकारी का मित्र बताया। साथ ही संपत्ति अधिकारी पर रौब गालिब करते हुए भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग करने लगा। जब नगर निगम अधिकारियों ने उस व्यक्ति को सरकारी भूमि के किए गए बैनामे दिखाने शुरू किए तो वह भाग खड़ा हुआ। यानी निगम की सरकारी भूमि को कब्जाने के लिए अभी भी लोगों की लंबी लाइन है।
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नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक खसरा नंबर 43-7 में 14540 वर्ग मीटर भूमि है। इसमें से लगभग तीन हजार वर्ग मी. भूमि पर माफिया ने प्लाटिंग कर दी है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये हैं। यहां कुछ पर चारदीवारी है तो कुछ पर भवन खड़े हो गए हैं। निगम की जमीन पर भवन बनाने वालों के खिलाफ पीपी एक्ट का मामला न्यायालय में शुरू हो गया है। वहीं बाकी खाली पड़ी कुछ भूमि पर नगर निगम ने डूडा को रैनबसेरा बनाने की अनुमति दी है।
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जहां निर्माण कार्य चल रहा है। माफिया आए दिन रैनबसेरे का विरोध कर रहे हैं। शनिवार को एक व्यक्ति अपने तीन चार साथियों को साथ लेकर संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार के पास पहुंचा। उस व्यक्ति ने अपना नाम सरफराज बताते हुए स्वयं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित कई प्रदेशों के आईएएस अधिकारी का मित्र बताया। साथ ही संपत्ति अधिकारी पर रौब गालिब करते हुए भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग करने लगा। जब नगर निगम अधिकारियों ने उस व्यक्ति को सरकारी भूमि के किए गए बैनामे दिखाने शुरू किए तो वह भाग खड़ा हुआ। यानी निगम की सरकारी भूमि को कब्जाने के लिए अभी भी लोगों की लंबी लाइन है।
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