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निगम का कारनामा: मां को पुरुष बनाया, भटक रही एनआरआई बेटी, वारिसान साबित करने में छूट रहे पसीने

Tue, 02 Jul 2024 11:39 AM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 02 Jul 2024 11:39 AM IST
सार

मेरठ नगर निगम ने शिक्षिका मां को पुरुष दर्शाकर मृत्यु प्रमाण जारी कर दिया है। शिक्षिका के तीन मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर बैंक मैनेजर हैरान रह गई है।

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Mothes gender written man by Nigam: NRI daughter is wandering, having trouble proving her inheritance
राखी समीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ये नगर निगम है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में भ्रष्टाचार के साथ-साथ अजीबोगरीब खेल करने में भी निगम माहिर है। निगम के कारनामे के चलते एनआरआई बेटी तीन महीने से अपने हक के लिए चक्कर काट रही है।

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नगर निगम ने शिक्षिका मां को पुरुष दर्शाकर मृत्यु प्रमाण जारी कर दिया है। शिक्षिका के तीन मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर बैंक मैनेजर हैरान रह गई है। सीआरएस पोर्टल द्वारा प्रमाण पत्र पर बार-कोड भी नहीं है। प्रमाण पत्र फर्जी मानते हुए बैंक ने बेटी को वारिसान मानने से इंकार कर दिया है। नतीजा है कि शिक्षिका के बैंक खाते से न पैसा और न ही लॉकर खुल पा रहा है।
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कांतकुंज साकेत निवासी प्रकाश विरेश्वर पत्नी विरेश्वर त्यागी की आठ अक्तूबर 2016 को मौत हो गई थी। वह आरजी कॉलेज में शिक्षिका थीं। बेटी राखी समीर अपने पति के साथ सिंगापुर में रहती हैं। प्रकाश विरेश्वर के पुत्र-पुत्रवधू की भी मृत्यु हो चुकी है।
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एनआरआई बेटी राखी ने अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए निगम में आवेदन किया। निगम ने प्रकाश विरेश्वर को पुरुष दर्शाकर प्रमाण पत्र जारी कर दिया। बेटी ने मृत्यु प्रमाण की कॉपी जिला सहकारी बैंक में लगा दी। प्रमाण पत्र पर बैंक ने आपत्ति लगा दी, तभी एक घंटे बाद बेटी ने निगम से दूसरा प्रमाण पत्र जारी करा लिया है। 

जिस पर बैंक ने निगम को चिट्ठी लिखकर दोनों प्रमाण पत्र का हवाला देकर जवाब मांगा। निगम ने लिखित में भी   प्रकाश को पुरुष होना बता दिया है। 
प्रकाश विरेश्वर के तीन मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर बैंक मैनेजर ने बेटी को वारिसान मानने से मना कर दिया। अब बेटी ने नगर आयुक्त डॉ. अमित पाल शर्मा और अपर नगर आयुक्त को पत्र भेजकर प्रमाणित के साथ मां का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने की मांग की। 

नगर स्वास्थ्य अधिकारी गजेंद्र सिंह का कहना है कि जांच बैठा दी गई है। दोषी पर कार्रवाई की जाएगी। 

30 हजार लग गए, प्रमाण पत्र असली नहीं बना 
एनआरआई बेटी राखी समीर का कहना कि 30 हजार रुपए लग गए, लेकिन मां का मृत्यु प्रमाण पत्र असली नहीं मिल रहा, जिससे वे बैंक का कार्य पूरा कर सके। वह अपने पति के घर सिंगापुर भी नहीं जा पा रही है। निगम के किस अधिकारी और कर्मचारी ने कितना पैसा लिया है, यह बात को राखी ने नहीं बताई। राखी का कहना है कि तीन महीने से चक्कर काट रही हूं। निगम तीन बार उसको मृत्यु प्रमाण पत्र दे चुका, लेकिन बैंक मानने को तैयार नहीं है। 

राखी की मां की मृत्यु के तीन प्रमाण पत्र निगम द्वारा जारी हैं। एक प्रमाण पत्र में महिला को पुरुष दर्शाया है। बैंक ने चिट्ठी भेजकर निगम से जवाब मांगा, जिसमें निगम ने पुरुष ही लिखकर भेज दिया। निगम स्पष्ट लिखकर दे कि प्रकाश विरेश्वर महिला है और उनकी मृत्यु हो चुकी है। उसके बाद ही बैंक आगे की कार्रवाई करेगा। -बीना रानी, मैनेजर जिला सहकारी बैंक

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