{"_id":"678816ad0b933350a70c2af6","slug":"mother-is-the-legal-guardian-of-daughter-who-is-fathers-darling-high-court-meerut-news-c-14-1-mrt1026-759405-2025-01-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी पापा की लाडली पर कानूनी संरक्षक सिर्फ मां : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटी पापा की लाडली पर कानूनी संरक्षक सिर्फ मां : हाईकोर्ट
विज्ञापन
-पिता की अपील खारिज कर कोर्ट ने कहा, पांच साल से कम उम्र के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक है मां
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पांच साल से कम उम्र की बेटी पापा की लाडली है, लेकिन कानूनी संरक्षक सिर्फ मां है। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने पिता की ओर से बेटी की अभिरक्षा की मांग वाली अपील खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति डी.रमेश की खंडपीठ ने मेरठ निवासी अमित धामा की अपील पर दिया।
23 मई 2010 को अमित की शादी हुई थी। दो अप्रैल 2013 को बेटे और 29 सितंबर 2020 को बेटी पैदा हुई। इसके बाद दंपती के बीच वैवाहिक विवाद शुरू हो गया। बात इतनी बढ़ी कि पति ने तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। वहीं, पत्नी ने पांच वर्षीय बेटी की अभिरक्षा के लिए पारिवारिक न्यायालय में अर्जी दाखिल की, जो स्वीकार कर ली गई। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
वकील की दलील दी थी कि बेटी पिता की लाडली है। दोनों खुशी से रह रहे हैं। पिता उसकी अच्छे से देखभाल कर रहा है। यदि पिता को उससे अलग किया गया तो बेटी को गहरा सदमा लगेगा। वहीं, प्रतिवादी वकील ने इसका विरोध किया। कहा कि कानूनी रूप से पांच साल के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक मां होती है। लिहाजा, बेटी मां को ही मिलनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पांच साल से कम उम्र की बेटी पापा की लाडली है, लेकिन कानूनी संरक्षक सिर्फ मां है। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने पिता की ओर से बेटी की अभिरक्षा की मांग वाली अपील खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति डी.रमेश की खंडपीठ ने मेरठ निवासी अमित धामा की अपील पर दिया।
23 मई 2010 को अमित की शादी हुई थी। दो अप्रैल 2013 को बेटे और 29 सितंबर 2020 को बेटी पैदा हुई। इसके बाद दंपती के बीच वैवाहिक विवाद शुरू हो गया। बात इतनी बढ़ी कि पति ने तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। वहीं, पत्नी ने पांच वर्षीय बेटी की अभिरक्षा के लिए पारिवारिक न्यायालय में अर्जी दाखिल की, जो स्वीकार कर ली गई। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
विज्ञापन
वकील की दलील दी थी कि बेटी पिता की लाडली है। दोनों खुशी से रह रहे हैं। पिता उसकी अच्छे से देखभाल कर रहा है। यदि पिता को उससे अलग किया गया तो बेटी को गहरा सदमा लगेगा। वहीं, प्रतिवादी वकील ने इसका विरोध किया। कहा कि कानूनी रूप से पांच साल के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक मां होती है। लिहाजा, बेटी मां को ही मिलनी चाहिए।
विज्ञापन