मेरठ से सटे इस गांव में पंचायत चुनाव के बाद से अब तक हो चुकी हैं 20 मौत, स्वास्थ्य विभाग नहीं ले रहा सुध
लोग एक तरफ गांवों में हो रही मौतों के बाद से दहशत में हैं, वहीं स्वास्थ्य अधिकारी गांव की सुध तक नहीं ले रहे। ग्रामीणों ने कैंप लगाकर कोरोना जांच कराने की मांग की है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से गांव में कैंप आयोजित नहीं किया गया। लोग बुखार से पीड़ित हैं और जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों में ही दम तोड़ रहे हैं। लोगों का दावा है कि अगर गांव में कैंप लगाकर जांच कराई जाए तो कोरोना के काफी मरीज निकलेंगे।
दुल्हेड़ा में अब तक महावीर, निर्मला, सुरेशवती, जयचंद, बबली, बाबूराम आदि की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को महेंद्र भी दुनिया छोड़कर चले गए। गांव के आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण अस्पताल में भर्ती हैं। बड़ी संख्या में ग्रामीण बुखार से पीड़ित हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. आशुतोष का कहना है कि जल्द गांव में कैंप लगाया जाएगा।
अस्सा में सात दिन में 11 लोगों की मौत
बहसूमा क्षेत्र के गांव अस्सा में एक सप्ताह के भीतर बाप बेटे की मौत समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है। जिससे गांव में दहशत का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाकर कोरोना की जांच की मांग की है।
चुनाव के बाद गांव में संक्रमण ने पैर पसार लिए है। गांव में लगातार मौतों का सिलसिला जारी है। आशा गांव में नीशू 40 वर्ष पुत्र समय सिंह की तीन मई को से मौत हो गई थी इसके बाद इनके पिता समय सिंह भी संक्रमित हो गए थे। समय सिंह ने भी 12 मई को इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। बुखार हो या संक्रमण गांव में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
इसके साथ ही अकबरपुर सादात में 15 दिनों में 12 मौत हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से कोरोना की जांच की मांग की है। पूर्व प्रधान पति प्रमोद कुमार ने बताया कि वह और उसका बेटा भी पॉजिटिव हो गए थे लेकिन अब स्वस्थ हैं। ग्राम प्रधान पूजा ने बताया कि गांव में बुखार से दर्जनों लोग ग्रसित हैं। गांव को सैनिटाइज भी कराया गया है। जल्द स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर गांव में कैंप लगवाया जाएगा।