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खादर में धधक रही हैं तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां
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खादर में धधक रही हैं तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां
मेरठ/हस्तिनापुर। गंगा खादर में कच्ची शराब का धंधा कुटीर उद्योग की तरह फैला है। हालात ये हैं कि गंगा के बीच टापू पर और गंगा किनारे रामराज खादर से लेकर गढ़मुक्तेश्वर तक तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां चल रही हैं। इस अवैध कारोबार को पुलिस और आबकारी विभाग दोनों का संरक्षण है, जहां से मोटी कमाई इन दोनों विभागों को होती है।
शराब बनाने की विधि
पुराने और सड़े गुड़ को पानी में घोलकर इसमें यूरिया आदि मिलाकर कई दिन तक धूप में सड़ाया जाता है। जब लहन तैयार हो जाता है तो उसे एक ड्रम में भरकर उसके नीचे गैस की भट्टी लगा दी जाती है। लहन से भरे ड्रम को ऊपर से थोड़ा काटकर उसके ऊपर एक बर्तन रख दिया जाता है। उस बर्तन के ऊपर नीचे से कटा खाली बर्तन लगा दिया जाता है। उस बर्तन के ऊपर पानी से भरा पतीला लगाया जाता है। पानी के पतीले और ड्रम के बीच में लगाए जाने वाले बर्तन से एक पाइप निकाली जाती है। लहन गर्म होने पर पतीले के नीचे लगे पाइप के जरिये निकलने वाली भाप बर्तन में बूंद-बूंद करके टपकती रहती है। इस बर्तन में एकत्र होने वाला द्रव ही शराब होती है। पहली बार में निकली लगभग दो से पांच लीटर शराब अलग रख दी जाती है, क्योंकि यह मिथाइल अल्कोहल होती है, जो जहरीली होती है। इसके बाद वाली शराब को इकट्ठा कर सप्लाई किया जाता है।
कच्ची शराब में मिलाने की सामग्री
अवैध कच्ची शराब के कारोबारी नशा बढ़ाने के लिए कच्ची शराब में यूरिया, नोसादर, गाची नामक केमिकल, चूना, धतूरे के बीज, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आदि इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इन केमिकल के इस्तेमाल से गुड़ का लहन शराब बनाने के लिए जल्दी तैयार हो जाता है।
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कच्ची शराब की बिक्री से यह होती है बचत
एक गैस सिलिंडर कीमत लगभग पांच सौ रुपये से लगभग दो ड्रम लहन फूंककर करीब 80 लीटर कच्ची शराब बनाई जाती है। दो ड्रम लहन में 80 लीटर शराब तैयार होती है। 36 सौ रुपये का 80 किलो गुड़ और दो मजदूरों की दिहाड़ी छह सौ रुपये मिलाकर 80 लीटर कच्ची अवैध शराब तैयार करने में लगभग पांच हजार रुपये का खर्च आता है। 80 लीटर शराब में 20 लीटर पानी मिलाकर इसे सौ लीटर बना लिया जाता है। इस सौ लीटर शराब को 10 हजार रुपये में बेच दिया जाता है। सीधा मुनाफा दोगुना हो जाता है।
फ्लेवर वाली शराब भी होती है तैयार
कई शराब माफिया अपने कारोबार में पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। उनके यहां ऑन डिमांड फ्लेवर वाली शराब तैयार होती है। इसमें अंगूर, संतरा, सेव, सौंफ, इलायची आदि के फ्लेवर होते हैं। कोरोना काल में कुछ लोगों ने तो काढ़ा में प्रयुक्त होने वाले मसालों को मिलाकर कच्ची शराब दो सौ रुपये लीटर तक में बेची है।
एक भट्टी से पांच हजार रुपये
पुलिस के कच्ची शराब की भट्टी के हिसाब से रेट तय होते हैं। एक भट्टी का रेट इस समय पांच हजार रुपये प्रतिमाह है। अकेले हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत खादर क्षेत्र में ही दो हजार से ज्यादा भट्टियां हैं। जिनका बंधा हुआ पैसा जाता है। इसमें कुछ लोग एक भट्टी का पैसा देकर तीन चार भट्टी तक एक ही जगह पर चला लेते हैं।
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मेरठ/हस्तिनापुर। गंगा खादर में कच्ची शराब का धंधा कुटीर उद्योग की तरह फैला है। हालात ये हैं कि गंगा के बीच टापू पर और गंगा किनारे रामराज खादर से लेकर गढ़मुक्तेश्वर तक तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां चल रही हैं। इस अवैध कारोबार को पुलिस और आबकारी विभाग दोनों का संरक्षण है, जहां से मोटी कमाई इन दोनों विभागों को होती है।
शराब बनाने की विधि
पुराने और सड़े गुड़ को पानी में घोलकर इसमें यूरिया आदि मिलाकर कई दिन तक धूप में सड़ाया जाता है। जब लहन तैयार हो जाता है तो उसे एक ड्रम में भरकर उसके नीचे गैस की भट्टी लगा दी जाती है। लहन से भरे ड्रम को ऊपर से थोड़ा काटकर उसके ऊपर एक बर्तन रख दिया जाता है। उस बर्तन के ऊपर नीचे से कटा खाली बर्तन लगा दिया जाता है। उस बर्तन के ऊपर पानी से भरा पतीला लगाया जाता है। पानी के पतीले और ड्रम के बीच में लगाए जाने वाले बर्तन से एक पाइप निकाली जाती है। लहन गर्म होने पर पतीले के नीचे लगे पाइप के जरिये निकलने वाली भाप बर्तन में बूंद-बूंद करके टपकती रहती है। इस बर्तन में एकत्र होने वाला द्रव ही शराब होती है। पहली बार में निकली लगभग दो से पांच लीटर शराब अलग रख दी जाती है, क्योंकि यह मिथाइल अल्कोहल होती है, जो जहरीली होती है। इसके बाद वाली शराब को इकट्ठा कर सप्लाई किया जाता है।
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कच्ची शराब में मिलाने की सामग्री
अवैध कच्ची शराब के कारोबारी नशा बढ़ाने के लिए कच्ची शराब में यूरिया, नोसादर, गाची नामक केमिकल, चूना, धतूरे के बीज, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आदि इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इन केमिकल के इस्तेमाल से गुड़ का लहन शराब बनाने के लिए जल्दी तैयार हो जाता है।
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कच्ची शराब की बिक्री से यह होती है बचत
एक गैस सिलिंडर कीमत लगभग पांच सौ रुपये से लगभग दो ड्रम लहन फूंककर करीब 80 लीटर कच्ची शराब बनाई जाती है। दो ड्रम लहन में 80 लीटर शराब तैयार होती है। 36 सौ रुपये का 80 किलो गुड़ और दो मजदूरों की दिहाड़ी छह सौ रुपये मिलाकर 80 लीटर कच्ची अवैध शराब तैयार करने में लगभग पांच हजार रुपये का खर्च आता है। 80 लीटर शराब में 20 लीटर पानी मिलाकर इसे सौ लीटर बना लिया जाता है। इस सौ लीटर शराब को 10 हजार रुपये में बेच दिया जाता है। सीधा मुनाफा दोगुना हो जाता है।
फ्लेवर वाली शराब भी होती है तैयार
कई शराब माफिया अपने कारोबार में पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। उनके यहां ऑन डिमांड फ्लेवर वाली शराब तैयार होती है। इसमें अंगूर, संतरा, सेव, सौंफ, इलायची आदि के फ्लेवर होते हैं। कोरोना काल में कुछ लोगों ने तो काढ़ा में प्रयुक्त होने वाले मसालों को मिलाकर कच्ची शराब दो सौ रुपये लीटर तक में बेची है।
एक भट्टी से पांच हजार रुपये
पुलिस के कच्ची शराब की भट्टी के हिसाब से रेट तय होते हैं। एक भट्टी का रेट इस समय पांच हजार रुपये प्रतिमाह है। अकेले हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत खादर क्षेत्र में ही दो हजार से ज्यादा भट्टियां हैं। जिनका बंधा हुआ पैसा जाता है। इसमें कुछ लोग एक भट्टी का पैसा देकर तीन चार भट्टी तक एक ही जगह पर चला लेते हैं।