फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   More than three thousand raw liquor furnaces are burning in Khadar

खादर में धधक रही हैं तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां

Sat, 10 Oct 2020 02:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 02:24 AM IST
विज्ञापन
More than three thousand raw liquor furnaces are burning in Khadar
खादर में धधक रही हैं तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां
विज्ञापन

मेरठ/हस्तिनापुर। गंगा खादर में कच्ची शराब का धंधा कुटीर उद्योग की तरह फैला है। हालात ये हैं कि गंगा के बीच टापू पर और गंगा किनारे रामराज खादर से लेकर गढ़मुक्तेश्वर तक तीन हजार से ज्यादा कच्ची शराब की भट्टियां चल रही हैं। इस अवैध कारोबार को पुलिस और आबकारी विभाग दोनों का संरक्षण है, जहां से मोटी कमाई इन दोनों विभागों को होती है।
शराब बनाने की विधि
पुराने और सड़े गुड़ को पानी में घोलकर इसमें यूरिया आदि मिलाकर कई दिन तक धूप में सड़ाया जाता है। जब लहन तैयार हो जाता है तो उसे एक ड्रम में भरकर उसके नीचे गैस की भट्टी लगा दी जाती है। लहन से भरे ड्रम को ऊपर से थोड़ा काटकर उसके ऊपर एक बर्तन रख दिया जाता है। उस बर्तन के ऊपर नीचे से कटा खाली बर्तन लगा दिया जाता है। उस बर्तन के ऊपर पानी से भरा पतीला लगाया जाता है। पानी के पतीले और ड्रम के बीच में लगाए जाने वाले बर्तन से एक पाइप निकाली जाती है। लहन गर्म होने पर पतीले के नीचे लगे पाइप के जरिये निकलने वाली भाप बर्तन में बूंद-बूंद करके टपकती रहती है। इस बर्तन में एकत्र होने वाला द्रव ही शराब होती है। पहली बार में निकली लगभग दो से पांच लीटर शराब अलग रख दी जाती है, क्योंकि यह मिथाइल अल्कोहल होती है, जो जहरीली होती है। इसके बाद वाली शराब को इकट्ठा कर सप्लाई किया जाता है।
विज्ञापन

कच्ची शराब में मिलाने की सामग्री
अवैध कच्ची शराब के कारोबारी नशा बढ़ाने के लिए कच्ची शराब में यूरिया, नोसादर, गाची नामक केमिकल, चूना, धतूरे के बीज, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन आदि इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इन केमिकल के इस्तेमाल से गुड़ का लहन शराब बनाने के लिए जल्दी तैयार हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कच्ची शराब की बिक्री से यह होती है बचत
एक गैस सिलिंडर कीमत लगभग पांच सौ रुपये से लगभग दो ड्रम लहन फूंककर करीब 80 लीटर कच्ची शराब बनाई जाती है। दो ड्रम लहन में 80 लीटर शराब तैयार होती है। 36 सौ रुपये का 80 किलो गुड़ और दो मजदूरों की दिहाड़ी छह सौ रुपये मिलाकर 80 लीटर कच्ची अवैध शराब तैयार करने में लगभग पांच हजार रुपये का खर्च आता है। 80 लीटर शराब में 20 लीटर पानी मिलाकर इसे सौ लीटर बना लिया जाता है। इस सौ लीटर शराब को 10 हजार रुपये में बेच दिया जाता है। सीधा मुनाफा दोगुना हो जाता है।
फ्लेवर वाली शराब भी होती है तैयार
कई शराब माफिया अपने कारोबार में पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। उनके यहां ऑन डिमांड फ्लेवर वाली शराब तैयार होती है। इसमें अंगूर, संतरा, सेव, सौंफ, इलायची आदि के फ्लेवर होते हैं। कोरोना काल में कुछ लोगों ने तो काढ़ा में प्रयुक्त होने वाले मसालों को मिलाकर कच्ची शराब दो सौ रुपये लीटर तक में बेची है।

एक भट्टी से पांच हजार रुपये
पुलिस के कच्ची शराब की भट्टी के हिसाब से रेट तय होते हैं। एक भट्टी का रेट इस समय पांच हजार रुपये प्रतिमाह है। अकेले हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत खादर क्षेत्र में ही दो हजार से ज्यादा भट्टियां हैं। जिनका बंधा हुआ पैसा जाता है। इसमें कुछ लोग एक भट्टी का पैसा देकर तीन चार भट्टी तक एक ही जगह पर चला लेते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed