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Meerut News: मंकी पॉक्स... संक्रमण मिला तो कोविड की तरह होगी व्यवस्था
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मेरठ। मंकी पॉक्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। मरीज में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कर आइसोलेट करने के लिए कहा गया है। सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसके लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
सीएमओ ने बताया कि मंकी पॉक्स एक वायरल संक्रमण है, जो एक रोगी से दूसरे में फैलता है। मरीज में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कर उसे आइसोलेट किया जाएगा। विभिन्न देशों में मंकी पॉक्स के मरीज मिलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में भी इसके संक्रमण की आशंका जताई है। इसी के तहत अलर्ट जारी किया गया है।
जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि मरीज में मंकी पॉक्स के लक्षण दिखने पर उसके सैंपल एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की माइकऱोबायोलॉजी लैब में भेजे जाएंगे, जहां से उन्हें दिल्ली या लखनऊ भेजकर जांच कराई जाएगी। अगर किसी मरीज में मंकी पॉक्स की पुष्टि होती है तो उसे अलग से वार्ड बनाकर उसमें रखवाया जाएगा। संदिग्ध मरीजों के बारे में तुरंत प्रदेश मुख्यालय पर बनी राज्य सर्विलांस इकाई को सूचित किया जाएगा।
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मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि लैब में जांच का सेटअप है, लेकिन फिलहाल जो सैंपल आएंगे उन्हें लखनऊ केजीएमयू या दिल्ली की अधिकृत लैब में भेजा जाएगा। मरीजों की संख्या बढ़ने पर शासन के अगर निर्देश होंगे तो मेडिकल भी जांच शुरू की जा सकती है।
मरीज के संपर्क में आने वालों की होगी निगरानी
अगर किसी में मंकी पॉक्स की पुष्टि होती है तो कोविड की तर्ज पर अन्य गतिविधियां चलाई जाएंगी। रोगी के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की सूची तैयार कर उसे जिला व राज्य स्तरीय सर्विलांस इकाइयों को उपलब्ध कराई जाएगी।
मंकी पॉक्स के प्रमुख लक्षण
शरीर पर दाने, बुखार और लसिका ग्रंथियों में सूजन मंकीपॉक्स के मुख्य प्रारंभिक लक्षण हैं। ये लक्षण 2 से 4 सप्ताह तक बने रह सकते हैं। रोग की मृत्यु दर 1-10 फीसदी के बीच हो सकती है। मनुष्यों में मंकी पॉक्स रोग पशुओं अथवा अन्य संक्रमित मनुष्यों से आ सकता है। इस रोग का वायरस ब्रोकन स्किन (प्रदर्शित ना होने पर भी), श्वसन पथ, अथवा श्लेश्मिका झिल्लियों (आंख, नाक, या मुंह) के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। मंकी पॉक्स से संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुए गए कपड़ों, बिस्तर, तौलिए, वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स और सतहों पर मंकी पॉक्स वायरस कुछ समय तक बना रह सकता है। वायरस गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में और जन्म के दौरान या उसके बाद त्वचा से संपर्क से या मंकी पॉक्स से संक्रमित माता-पिता से निकट संपर्क के शिशु में भी फैल सकता है।
इन देशों में है मंकी पॉक्स
27 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीका, केन्या, रवांडा, युगांडा, कांगो, लोकतांत्रिक गणराज्य, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो-ब्रेजाविल, कैमरून, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, स्वीडन, पाकिस्तान, फिलीपीन्स तथा थाईलैंड (स्वीडन, पाकिस्तान, फिलीपीन्स तथा थाईलैंड में आयातित मामले) से मंकी पॉक्स के मामले सामने आए हैं। भारत में मंकी पॉक्स संक्रमण का अंतिम रोगी मार्च 2024 में केरल में मिला, जिसका अंतरराष्ट्रीय यात्रा का इतिहास था।
घबराएं नहीं, पुख्ता हैं इंतजाम
सीएमओ ने बताया कि मंकी पॉक्स से निपटने के सभी इंतजाम करने के प्रदेश सरकार से निर्देश मिले हैं। संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग होगी। रोगियों का चिह्निकरण, सैंपल कलेक्शन और उपचार के निर्देश मिले हैं। व्यवस्थाएं एहतियात के तौर पर की जा रही हैं। घबराने की जरूरत नहीं है। पुख्ता इंतजाम हैं। कोई व्यक्ति विदेश से आया है या किसी में लक्षण हैं तो तत्काल जांच कराएं।
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सीएमओ ने बताया कि मंकी पॉक्स एक वायरल संक्रमण है, जो एक रोगी से दूसरे में फैलता है। मरीज में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कर उसे आइसोलेट किया जाएगा। विभिन्न देशों में मंकी पॉक्स के मरीज मिलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में भी इसके संक्रमण की आशंका जताई है। इसी के तहत अलर्ट जारी किया गया है।
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जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि मरीज में मंकी पॉक्स के लक्षण दिखने पर उसके सैंपल एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की माइकऱोबायोलॉजी लैब में भेजे जाएंगे, जहां से उन्हें दिल्ली या लखनऊ भेजकर जांच कराई जाएगी। अगर किसी मरीज में मंकी पॉक्स की पुष्टि होती है तो उसे अलग से वार्ड बनाकर उसमें रखवाया जाएगा। संदिग्ध मरीजों के बारे में तुरंत प्रदेश मुख्यालय पर बनी राज्य सर्विलांस इकाई को सूचित किया जाएगा।
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मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि लैब में जांच का सेटअप है, लेकिन फिलहाल जो सैंपल आएंगे उन्हें लखनऊ केजीएमयू या दिल्ली की अधिकृत लैब में भेजा जाएगा। मरीजों की संख्या बढ़ने पर शासन के अगर निर्देश होंगे तो मेडिकल भी जांच शुरू की जा सकती है।
मरीज के संपर्क में आने वालों की होगी निगरानी
अगर किसी में मंकी पॉक्स की पुष्टि होती है तो कोविड की तर्ज पर अन्य गतिविधियां चलाई जाएंगी। रोगी के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की सूची तैयार कर उसे जिला व राज्य स्तरीय सर्विलांस इकाइयों को उपलब्ध कराई जाएगी।
मंकी पॉक्स के प्रमुख लक्षण
शरीर पर दाने, बुखार और लसिका ग्रंथियों में सूजन मंकीपॉक्स के मुख्य प्रारंभिक लक्षण हैं। ये लक्षण 2 से 4 सप्ताह तक बने रह सकते हैं। रोग की मृत्यु दर 1-10 फीसदी के बीच हो सकती है। मनुष्यों में मंकी पॉक्स रोग पशुओं अथवा अन्य संक्रमित मनुष्यों से आ सकता है। इस रोग का वायरस ब्रोकन स्किन (प्रदर्शित ना होने पर भी), श्वसन पथ, अथवा श्लेश्मिका झिल्लियों (आंख, नाक, या मुंह) के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। मंकी पॉक्स से संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुए गए कपड़ों, बिस्तर, तौलिए, वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स और सतहों पर मंकी पॉक्स वायरस कुछ समय तक बना रह सकता है। वायरस गर्भावस्था के दौरान भ्रूण में और जन्म के दौरान या उसके बाद त्वचा से संपर्क से या मंकी पॉक्स से संक्रमित माता-पिता से निकट संपर्क के शिशु में भी फैल सकता है।
इन देशों में है मंकी पॉक्स
27 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीका, केन्या, रवांडा, युगांडा, कांगो, लोकतांत्रिक गणराज्य, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो-ब्रेजाविल, कैमरून, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया, स्वीडन, पाकिस्तान, फिलीपीन्स तथा थाईलैंड (स्वीडन, पाकिस्तान, फिलीपीन्स तथा थाईलैंड में आयातित मामले) से मंकी पॉक्स के मामले सामने आए हैं। भारत में मंकी पॉक्स संक्रमण का अंतिम रोगी मार्च 2024 में केरल में मिला, जिसका अंतरराष्ट्रीय यात्रा का इतिहास था।
घबराएं नहीं, पुख्ता हैं इंतजाम
सीएमओ ने बताया कि मंकी पॉक्स से निपटने के सभी इंतजाम करने के प्रदेश सरकार से निर्देश मिले हैं। संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग होगी। रोगियों का चिह्निकरण, सैंपल कलेक्शन और उपचार के निर्देश मिले हैं। व्यवस्थाएं एहतियात के तौर पर की जा रही हैं। घबराने की जरूरत नहीं है। पुख्ता इंतजाम हैं। कोई व्यक्ति विदेश से आया है या किसी में लक्षण हैं तो तत्काल जांच कराएं।