फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Modi's wave fails in West, BJP must be re understood, Mood of the West

कैराना: नहीं चला मोदी का जादू, भाजपा को नए सिरे से समझना होगा पश्चिम का मिजाज

Fri, 01 Jun 2018 01:13 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Fri, 01 Jun 2018 01:13 PM IST
विज्ञापन
Modi's wave fails in West, BJP must be re understood, Mood of the West
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश अपनी अलग अहमियत रखता है और उसमें भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भूमिका अहम होती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पिछले आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो यह भाजपा के लिए बहुत ही मुफीद क्षेत्र रहा है। लेकिन इस उपचुनाव के आंकड़ों ने भाजपा को फिर से पश्चिम के मिजाज को देखते हुए नये सिरे से समीक्षा करने को मजबूर कर दिया है। पश्चिमी क्षेत्र का मिजाज जातिगत और धार्मिक आधार पर ज्यादा चलता रहा है। यह बात अलग है कि वर्ष 2014 में मोदी लहर के बीच भाजपा को पश्चिमी क्षेत्र की 14 विधानसभा सीटों पर एकतरफा जीत हासिल हुई थी। 

विज्ञापन


इसके बाद विधानसभा चुनाव में भाजपा को पश्चिमी क्षेत्र से लगभग 36 विधानसभा सीटों में से 24 पर जीत हासिल हुई थी। जबकि इससे पहले के चुनावों में भाजपा जातिगत और धार्मिक समीकरण के चलते पिछड़ गयी थी। अब उपचुनाव के जो परिणाम आए हैं, वह भाजपा को यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि लहर या विकास नहीं बल्कि जातिगत व धार्मिक समीकरण पश्चिमी क्षेत्र में अहम होंगे।  
विज्ञापन


पढ़ें : गन्ना बकाया और कर्जमाफी में खेल से फेल हुई भाजपा, किसानों में था आक्रोश
विज्ञापन
विज्ञापन


पश्चिमी क्षेत्र मुस्लिमों के साथ ही जाट, गुर्जर, राजपूत, वैश्य और अति पिछड़ा वर्ग बहुल क्षेत्र है। जहां पर मतदाताओं की संख्या को देखते हुए समीकरण तय होते हैं। इसमें जातिगत आंकड़ों के साथ सांप्रदायिक आधार भी चुनावी गणित को तय करता है। लेकिन भाजपा ने पश्चिमी क्षेत्र में पिछले दो चुनाव की तरह उपचुनाव को भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ाया और झटका खा गयी। ऐसे में पश्चिमी क्षेत्र में अब भाजपा को इस बदली रणनीति के साथ लोकसभा चुनाव में उतरना होगा। यदि उसे पिछले चुनाव के इतिहास को दोहराना है तो उसे जाट मतों को भी साधना होगा। लेकिन सिर्फ जाट मतों से काम नहीं चलेगा, इसके अलावा गुर्जर, राजपूत, वैश्य, सैनी आदि अति पिछड़ों को भी साधना होगा। जिसके लिए यदि क्षेत्रीय दलों से गठबंधन भी करना पड़े तो उसे यह रणनीति अपनानी होगी। उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दल चुनावी गणित को बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। क्योंकि पिछले चुनावों में मुस्लिम प्रत्याशी अकेले रह गए थे। उन्हें सिर्फ मुस्लिमों के वोट प्राप्त हुए थे। लेकिन उपचुनाव ने इस सोच को बदल दिया है।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed