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नेताजी के हर कदम के साथी थे मेरठवासी, शहीद स्मारक संग्रहालय में सहेजी हैं यादें

Sat, 23 Jan 2021 03:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Sat, 23 Jan 2021 03:53 PM IST
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'Meerutwas were companions of Netaji's every step'
वर्दी व टोपी - फोटो : अमर उजाला

नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन में मेरठवासी हमेशा साथी बने। कांग्रेस हाईकमान से मनमुटाव के बाद जब नेताजी कुछ नया करने की सोच से मेरठ आए तो यहां युवाओं ने उनका पूरा साथ दिया। आईएनए के गठन के सपने को पूरा करने में युवाओं ने सहभागिता निभाई। इन यादों की गवाही आज भी टाउनहॉल और घंटाघर देता है।

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इतिहासकार डॉ. केडी शर्मा के अनुसार नेताजी 1940 में मेरठ में आए थे। यहां टाउनहाल में उनका पहला भाषण हुआ था। इसमें नेताजी ने युवाओं को आजादी की लड़ाई में सहभागिता के लिए ललकारा था। बीएवी इंटर कॉलेज से रिटायर हुए बीएन पाराशर के अनुसार नेताजी 1940 में मेरठ आए थे। 1969 में यहां हमने नेताजी सुभाष जन्मदिवस समिति का गठन किया था।
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संग्रहालय में सहेजी हैं यादें
राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में आईएनए के सिपाही की वर्दी, बैज, टोपी है। नेताजी के 210 फोटो हैं जो विभिन्न मुद्राओं में हैं। नेताजी के मित्रों की तस्वीरें, बैज हैं। प्रमुख पत्र शामिल हैं। इनमें अधिकांश फोटो कोलकाता स्थित नेताजी रिसर्च ब्यूरो से एकत्र किए गए हैं।
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नेताजी को समर्पित घंटाघर, प्रेक्षागृह
शहर का प्रमुख स्मारक घंटाघर द्वार नेताजी के नाम पर है। चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर प्रेक्षागृह है। 1957 में मेरठ नगर पालिका ने घंटाघर का नाम नेताजी के नाम पर किया। नेताजी के भतीजे अमीय नाथ बोस भी 1970 से 1980 के बीच कई बार मेरठ आए। कमिश्नरी के सामने के पार्क का नाम भी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर 23 जनवरी 1985 को रखा गया था, बाद में यह नाम बदल गया।

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रेलवे स्टेशन से घंटाघर तक जय सुभाष
1940 में नेताजी मेरठ आए तो खंदक बाजार से रईस नामक व्यक्ति की बग्गी में बैठाकर नेताजी को रेलवे स्टेशन से शहर में जुलूस के रूप में लाया गया था। हजारों लोगों का हुजूम नेताजी के जयघोष कर रहा था। पंडित प्यारेलाल शर्मा व शांति त्यागी नेताजी के साथ जनसभा में पहुंचे। टाउनहाल के बाद जीआईसी गए, बेगमबाग मैदान में बैठक हुई, कचहरी पुल आरएफ ब्रदर्स होटल गए और पं. पीएल शर्मा के यहां विश्राम किया। जानकारों के अनुसार अप्सरा सिनेमा के मैनेजर देवेंद्र जैन एक टिकट का चार आना ज्यादा लेते थे। टिकट के इन पैसों से नेताजी के कार्यक्रम होते थे।

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दो लोगों ने दी थी मौत की गवाही
पुस्तक नेताजी की रहस्यमय मृत्यु का जिक्र ‘सुभाष बोस की अज्ञात यात्रा’ में है। नेताजी की रहस्यमयी मौत की जांच के लिए 1970 में इंदिरा गांधी सरकार ने आयोग का गठन किया था। आयोग में पंजाब हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश जीडी खोसला थे। मेरठ के महेश चंदर ने गवाही में कहा कि सात अक्तूबर 1967 को नेताजी मेरठ आए थे, मैं उनसे मिला था।

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