UP: वट सावित्री व्रत पर महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा, परिक्रमा कर परिवार के लिए मांगी सुख-समृद्धि
वट सावित्री व्रत आज शोभन योग में मनाया जा रहा है। इस दिन खास गजकेसरी योग भी बन रहा है। इस दिन महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर परिजनों की खुशहाली की कामना की। वहीं आज शनि जयंती भी मनाई जा रही है।
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वट सावित्री व्रत आज शोभन योग में पड़ रहा है और बृहस्पति तथा चंद्रमा एक साथ मेष राशि में होकर गजकेसरी राजयोग बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्य अंकित चौधरी बताते हैं कि वट सावित्री व्रत के साथ ही इसी दिन शनि जयंती भी है। शनि मंदिरों में भगवान शनि पूजा व उपासना कष्टों से मुक्ति दिलाएगी।
ज्योतिषाचार्य अमित गुप्ता ने बताया कि गुरुवार को रात 9.42 पर अमावस्या का आरंभ हो रहा है। समापन शुक्रवार को रात 9.22 पर होगा। ऐसे में सूर्योदयिनी तिथि के अनुसार 19 मई को व्रत रखा जाएगा। पूजा का मुहूर्त सवेरे 7.19 बजे से 10.45 तक श्रेष्ठ रहेगा। इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर अनेक शुभ योग बन रहे हैं।
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ज्योतिषविद विभोर इंदुसुत कहते हैं कि शनि जयंती पर 30 साल बाद अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में शनि बैठकर शश नामक योग बना रहे हैं। सावित्री ने अपनी साधना और सतीत्व के बल पर यमदेव को सत्यवान के प्राण वापस लौटाने के लिए विवश कर दिया था। तभी से इस दिन को वट सावित्री व्रत के रूप में मनाया जाने लगा।
पंडित विनोद त्रिपाठी कहते हैं कि व्रत पूजन विधि के अनुसार महिलाओं को बरगद के वृक्ष को मीठे जल और दूध से सींचकर घी का दीपक जलाकर सावित्री सत्यवान की प्रतिमा, हाथ का पंखा, फल-फूल, श्रृंगार सामग्री अर्पित कर पति की दीर्घायु की कामना करें।
क्या दान करें
-अपने पितरों के निमित्त दूध और सफेद मिठाई मंदिर में दान दें।
-किसी भी मंदिर में वट वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दिया जलाएं।
-उड़द की दाल की खिचड़ी का प्रसाद वितरित करें। वृद्धाश्रम व कुष्ठाश्रम में भोजन सामर्थ्य अनुसार दान दें।