मेरठ : सुई नहीं हवा के दबाव से लगेगी वैक्सीन, एएनएम को दिया जा रहा प्रशिक्षण
मेरठ में शहरी क्षेत्र में अब बिना सुई के हवा के दबाव यानी एयर प्रेशर से लगने वाली वैक्सीन जायकोव डी के शिविर लगाए जाएंगे। इसके लिए चिकित्सका अधिकारियों ने एएनएम को प्रशिक्षण दिया।
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मेरठ के शहरी क्षेत्र में अब बिना सुई के हवा के दबाव (एयर प्रेशर) से लगने वाली वैक्सीन जायकोव-डी के शिविर लगाए जाएंगे। सोमवार को सीएमओ कार्यालय में चिकित्सा अधिकारियों ने एएनएम को वैक्सीन लगाने का प्रशिक्षण दिया। प्रोजेक्टर के माध्यम से भी समझाया।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रवीण गौतम ने बताया कि इस वैक्सीन की तीन डोज लगवानी पड़ेंगी। पहली डोज लगने के 28 दिन बाद दूसरी और 56 दिन बाद तीसरी डोज लगाई जाएगी। प्वाइंट एक-एक एमएल वैक्सीन दोनों कंधों के पास लगाई जाएगी। यह एक डोज होगी। इसे फार्माजेट मशीन से लगाया जाएगा, जो जिले को 20 मिली हैं। वैक्सीन की शीशी में 10 डोज हैं। चार घंटे तक एक शीशी का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह वैक्सीन नए व्यक्ति को लगेगी। जिसे कोवाक्सिन या कोविशील्ड की डोज लग चुकी है, उसे यह नहीं लगाई जाएगी। फिलहाल इसके शिविर शहरी क्षेत्रों में लगाए जाएंगे।
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कोवाक्सिन और कोविशील्ड से है अलग
कोवाक्सिन और कोविशील्ड की प्वाइंट 5 एमएल की डोज एक बार में लगाई जाती है। यह एक बार में एक ही हाथ पर लगती है। इनकी दो डोज लगाई जाती हैं।
पहली खेप में मिलेंगी 67 हजार डोज
डब्ल्यूएचओ की मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर प्रिया ने बताया कि जिले में शुरू में 67 हजार डोज मिलेंगी। फिलहाल कुल दो लाख डोज मिलनी हैं। इसके लिए कोवाक्सिन और कोविशिल्ड से अलग शिविर लगाए जाएंगे।
डीएनए आधारित वैक्सीन
डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि इस वक्त जहां दुनियाभर में आरएनए वैक्सीन की मौजूदगी सबसे ज्यादा है, वहीं जायडस कैडिला की ये वैक्सीन विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है। जायकोव-डी बगैर सुई के दी जाएगी। यह बच्चों को भी आसानी से लगाई जा सकती है।