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मेरठ के टेंडर मथुरा की साइट पर डालकर किया खेल

Mon, 25 Feb 2019 02:49 AM IST
Gaurav sharma न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला
न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 25 Feb 2019 02:49 AM IST
सार

- डूडा के अधिकारियों ने मथुरा की वेबसाइट पर डालकर टेंडर खोले
- रि-टेंडर प्रक्रिया में भी सांठगांठ हुई उजागर
- 15 करोड़ से मलिन बस्तियों में होना है विकास कार्य
- साठगांठ के खेल में शहर का विकास हो रहा है लेट

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Meerut tender by putting on the site of Mathura
online e tender - फोटो : File Photo

विस्तार


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 विकास कार्यों के लिए निकाले जाने वाले टेंडरों से माफिया गिरी खत्म नहीं हो रही है। सरकार ने भले ही टेंडरों में भ्रष्टटाचार दूर करने के लिए  ई टेंडरिंग की व्यवस्था शुरू की पर सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों की मिली भगत इस व्यस्था को भी फेल कर रही है। मेरठ में यह खेल खुलकर सामने आया है। यहां के टेंडरों को डूडा के अधिकारियों ने मथुरा की वेबसाइट पर डालकर खोल दिया ताकि यहां के अधिकतर ठेकेदारों को इसका पता ही न चले और मनचाहे ठेकेदारों को ठेके दिए जा सकें।
 सरकार द्वारा शुरू की गयी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अधिकारियों के हाथों में पहुंचते ही ठेकेदारों के इशारों पर चलने लगी है।जहां सांठगांठ के खेल में टेंडर पूल कराकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है, वहीं ई-टेंडरिंग प्रक्रिया ध्वस्त करने के लिए प्रदेश के दूसरे जनपद की वेबसाइट पर टेंडर निकाले जा रहे हैं। यह खेल डूडा में खुलकर सामने आया है। गजब यह है कि डूडा अधिकारी इसको व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं।
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यह है मामला
  उप्र सरकार ने 15 करोड़ रुपये शहर की मलिन बस्तियों के विकास के लिए जारी किया। इसके लिए सरकार ने ठेकेदारों को ई-टेंडरिंग के माध्यम से जोड़ने का आदेश दिया। साफ कहा गया कि मेन्युअल टेंडर नहीं होंगे। ऑनलाइन ही पूरी प्रक्रिया होगी। डूडा में  सरकार के आदेश के अनुपालन में ई-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन इसमें खेल कर दिया। ठेकेदारों से साठगांठ करके ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को ही डायवर्ट कर दिया। 15 करोड़ से होने वाले विकास कार्यों के प्रस्ताव के टेंडर मेरठ डूडा की वेबसाइट पर डालने की बजाय मथुरा की वेबसाइट पर डाल दिए गए।
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50 कार्य ऐसे पकड़े जिनमें थे एक एक ठेकेदार
डूडा ने कारस्तानी को अंजाम देने में पूरी तन्मयता दिखाई। टेंडर खोलने की पूरी प्रक्रिया भी कर दी। नगरायुक्त से लेकर डीएम तक  ने भी स्वीकृति दे दी। हालांकि लगभग 50 कार्य ऐसे पकड़े गए जिनपर एक-एक ठेकेदार ने ही भाग लिया था। मामले का भंडाफोड़ होने पर डीएम ने फिर से टेंडर निकालने के आदेश दिए। जिसके बाद पिछले सप्ताह दोबारा टेंडर निकाले गए। इस बार पिछले फर्जीवाडे़ को दबाने के लिए डूडा ने मेरठ की वेबसाइट पर ही टेंडर निकाले। एक दिन पहले ही ये टेंडर भी खुल चुके हैं। कुछ ठेकेदारों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि जिन ठेकेदारों ने दिसंबर माह में हुई टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया था, उन्हीं ठेकेदारों को टेंडर मिले हैं।

कैसे हो शहर का विकास
शहर का विकास इस स्थिति में कैसे हो। ठेकेदारों की पूलिंग और इस तरह के खेल में काम अटके हैं।  कुछ काम घाटे पर छोड़े जा रहे हैं। 10 से 30 प्रतिशत घाटे से टेंडर छूट रहे हैं। ऐसे में गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं। कई काम केवल टेंडरों में इसी तरह की कारस्तानी से अटके हैं। चाहे एमडीए हो, निगम होया डूडा। टेंडरों में गड़बड़ी के कारण मामले अटक ही गए।


गलती हो गई थी
गलती से मथुरा की वेबसाइट पर टेंडर डाले गए थे। इस बार मेरठ की वेबसाइट पर ही टेंडर डाले हैं। जिन ठेकेदारों को काम नहीं मिला है वह साठगांठ का आरोप लगा रहे हैं - आशीष गौड़ पीओ डूडा
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