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सावधान: गन्ने की 20 हजार करोड़ी प्रजाति हो रही रोग का शिकार, इस तरह करें बचाव

Tue, 12 Feb 2019 12:56 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़ , अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़ , अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 12 Feb 2019 12:56 PM IST
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Meerut, special sugarcane variety affected by disease, farmers can preventing like this
sugar cane - फोटो : amar ujala

प्रदेश के गन्ना किसानों व शुगर इंडस्ट्री को मालामाल कर प्रदेश को चीनी उत्पादन में नंबर वन बनाने वाली गन्ने की सबसे सफल प्रजाति को-0238 लाल सड़न (रेड रोट) रोग का शिकार होने लगी है। अगर किसान और शुगर इंडस्ट्री समय रहते नहीं चेती तो किसानों के खातों में 20 हजार करोड़ से ज्यादा भरने वाली यह प्रजाति खत्म हो जाएगी। गन्ना विशेषज्ञों के मुताबिक खेत की तैयारी से लेकर बुआई और पकने तक की प्रक्रिया में कुछ सावधानियां अपनाकर इसे बचाया जा सकता है।

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पिछले कुछ सालों से शुगर इंडस्ट्री और किसानों के लिए गन्ना प्रजाति को-0238 इतनी मुफीद साबित हुई है कि किसानों ने इसका उत्पादन 90 फीसदी तक करना शुरू कर दिया है। भरपूर चीनी और बंपर उत्पादन के साथ ही सामान्य गन्ने के मुकाबले 10 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा मिलने से यह प्रजाति सिरमौर साबित हो रही है।
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गत पेराई सत्र 2017-18 में प्रदेश के करीब 35 हजार करोड़ गन्ना मूल्य भुगतान में इस प्रजाति का हिस्सा 20 हजार करोड़ से ज्यादा रहा है। लेकिन पिछले दो साल से इस प्रजाति में भी लाल सड़न रोग दिखाई देने लगा है। इससे शुगर इंडस्ट्री के साथ ही गन्ना विभाग की नींद उड़ी हुई है। 

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इस तरह बचा सकते हैं   
त्रिवेणी शुगर मिल देवबंद के जीएम एवं गन्ना विशेषज्ञ डॉ. बीएस तोमर ने बताया कि इस समय बसंत कालीन गन्ना बुआई चल रही है। किसानों को चाहिए कि वो प्रजाति को-0238 को बचाने के लिए खेत की तैयारी करते समय गहरी जुताई करें। इसके अलावा निम्न उपाय भी किए जा सकते हैं: -

-तैयार खेत में शाम के समय ट्राइकोडर्मा 2 किलोग्राम प्रति एकड़ का प्रयोग करें। इससे फसल को लाल सड़न रोग की फफूंदी से बचाया जा सकता है।
-बीज का चुनाव करते हुए ध्यान रखें कि उस खेत का बीज न लें जिसमें पानी भरता हो।
-बीज को सदैव दो-दो आंख वाले टुकड़े काटकर ही बुआई करें।
-बुआई से पहले इन टुकड़ों को थियोमिनेट मिथाइल 250 ग्राम प्रति एकड़ अथवा कार्वाडाजिम प्लस मेंकोजेब के घोल से उपचारित कर लें।
-गन्ना बुआई से पूर्व खेत में गोबर की खाद या मिल की सड़ी हुई मैली का प्रयोग करें। इससे मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है।
-गन्ना बुआई में लाइन से लाइन की दूरी कम से कम 4 फीट रखनी चाहिए।
-ट्रैंच विधि से बुआई करने से पैदावार कम से कम 20 फीसदी बढ़ जाती है।
-गन्ना प्रजाति को-0238 को बचाने के लिए पौधशाला ऊपरी 1/3 भाग की ही लगाएं। उसकी उम्र अधिकतम 10 माह होनी चाहिए।

इन प्रजातियों को भी वरीयता दें किसान 
को-0118, को-98014, कोजा-88, कोशा-8272 एवं कोपीबी-92 प्रजाति भी शानदार हैं। किसान को-0238 के साथ इन प्रजातियों को उगाकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। गन्ना फसल में कीटनाशक व रासायनिक उर्वरक का प्रयोग समय पर करना जरूरी है। इसके बाद कीटनाशक का प्रयोग करना लाभ की बजाय मिट्टी की गुणवत्ता खराब करते हैं।

को-0238 प्रजाति बेहद शानदार प्रजाति है। इसमें कुछ क्षेत्रों में लाल सड़न रोग देखा गया है। इसके चलते किसानों को गोष्ठियों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। विभाग कर्मी किसानों को जानकारी और अच्छा बीज मुहैया करा रहे हैं। -हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

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