UP: ज्वैलरी पार्क पर खर्च होंगे 800 करोड़, भूमि चिन्हित, हजारों को रोजगार-सराफा को मिलेगी नई पहचान
मेरठ के वेदव्यासपुरी में 800 करोड़ रुपये की लागत से ज्वैलरी पार्क विकसित किया जाएगा। परियोजना से आभूषण कारोबार को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विस्तार
मेरठ शहर के सराफा कारोबार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। वेदव्यासपुरी में करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से ज्वैलरी पार्क विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है और आगामी दिनों में इसका विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा।
36 हजार वर्गमीटर भूमि पर विकसित होगा पार्क
मेरठ विकास प्राधिकरण की ओर से वेदव्यासपुरी क्षेत्र में लगभग 36 हजार वर्गमीटर भूमि ज्वैलरी पार्क के लिए चिह्नित की गई है। परियोजना का प्रारूप लखनऊ की एक कंपनी ने तैयार किया है। बताया जा रहा है कि अगले 15 दिनों के भीतर परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण सार्वजनिक किया जाएगा।
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एक ही परिसर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
ज्वैलरी पार्क में आभूषण कारोबार से जुड़ी सभी प्रमुख सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां शोरूम, दुकानें, थोक व्यापारियों के कार्यालय, आपूर्तिकर्ताओं के कार्यालय, कारीगरों की कार्यशालाएं, मशीनों के संचालन की सुविधाएं, प्रदर्शनी स्थल, साझा सुविधा केंद्र और बैंक शाखाएं स्थापित की जाएंगी। इससे कारोबारियों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं मिल सकेंगी।
सुरक्षा और कारोबार दोनों पर रहेगा फोकस
परियोजना में एक मुख्य प्रवेश द्वार की व्यवस्था होगी। खरीदारों और विक्रेताओं के ठहरने के लिए आवासीय सुविधा भी विकसित की जाएगी। वहीं शोरूम, थोक व्यापार और उत्पादन इकाइयों के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे सुरक्षा और संचालन दोनों को बेहतर बनाया जा सकेगा।
रोजगार और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल के अनुसार ज्वैलरी पार्क बनने से मेरठ के आभूषण कारोबार को आधुनिक आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को गति मिलेगी और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। कारोबारियों का मानना है कि यह परियोजना मेरठ को देश के प्रमुख आभूषण केंद्रों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भूखंड दरों पर कारोबारियों की नजर
पार्क में भूखंड आवंटन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। हालांकि भूखंडों की दरें अभी घोषित नहीं की गई हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जमीन अपेक्षाकृत किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं कुछ कारोबारी प्रस्तावित दरों को लेकर अपनी चिंताएं भी जता रहे हैं।