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इंसाफ: दो दिन में चार को फांसी की सजा, हत्यारी पत्नियों-प्रेमियों को मृत्युदंड, अदालत ने की सख्त टिप्पणियां

Fri, 16 Oct 2026 05:06 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 16 Oct 2026 05:06 PM IST
सार

मेरठ में दो दिन के भीतर दो हत्याकांडों में चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया। सौरभ राजपूत और अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने अपराध की गंभीरता और सामाजिक विश्वास को लेकर तल्ख टिप्पणियां कीं।

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Meerut: Court Sentences Four Convicts to Death in Two Murder Cases Within Two Days
मेरठ में दो दिन में चार को फांसी की सजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में दो दिन के भीतर दो चर्चित हत्याकांडों में चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया है। पहले बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में 13 अक्तूबर को मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई गई। इसके ठीक दो दिन बाद पति अमित कश्यप की गला घोंटकर हत्या करने और वारदात को सर्पदंश का रूप देने के मामले में रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को भी मृत्युदंड सुनाया गया। दोनों मामलों में अपराध करने का तरीका अलग था, लेकिन अदालतों की टिप्पणियों में विश्वासघात, अपराध की गंभीरता और सामाजिक प्रभाव जैसे पहलू प्रमुखता से सामने आए।

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दोनों मामलों में पत्नियों और उनके प्रेमियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मेरठ में इन फैसलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। युवा वकीलों ने फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि इनसे पुरुषों के बीच बना डर खत्म होने में मदद मिलेगी। वहीं, दोनों मामलों में अदालतों ने अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता को रेखांकित करते हुए सख्त टिप्पणियाें को भी लेकर भी चर्चा है।
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यह भी पढ़ें: मेरठ हत्याकांड: रविता-अमरदीप को मृत्युदंड, अमित को मारकर बिस्तर पर छोड़ा था सांप, फैसला सुन फफक पड़े दोनों 

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Meerut: Court Sentences Four Convicts to Death in Two Murder Cases Within Two Days
अमित हत्याकांड, आरोपी पत्नी व उसका प्रेमी - फोटो : अमर उजाला

सर्पदंश हत्याकांड: विश्वास में लेकर सोते समय की हत्या, अदालत ने कहा- यह विरलतम मामला
अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने रविता और अमरदीप को मृत्युदंड सुनाते हुए अपराध को अत्यंत जघन्य, घृणित और अमानवीय बताया। फैसले में कहा गया कि दोषियों ने सोते समय अमित कश्यप की हत्या की और वारदात को इस तरह अंजाम दिया कि आसपास सो रहे लोगों तक उनकी चीख भी न पहुंचे। अदालत के अनुसार, मृतक की पत्नी रविता और उसके दोस्त अमरदीप ने उस व्यक्ति के विश्वास का फायदा उठाया, जो उन पर भरोसा करता था।

फैसले में हत्या के तरीके का उल्लेख करते हुए कहा गया कि आरोपियों ने मृतक का मुंह दबाकर और गला घोंटकर उसकी जान ली। अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, इस दौरान गर्दन की हायॉइड बोन और थायरॉयड कार्टिलेज को भी नुकसान पहुंचा। अपराध को अंजाम देने के तरीके और उसकी योजना को अदालत ने गंभीर माना।

अदालत ने कहा कि पत्नी और उसके प्रेमी द्वारा पति की हत्या करना केवल एक व्यक्ति के विश्वास की हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी चोट पहुंचाने वाला कृत्य है। फैसले में अपराध को समाज के अंतःकरण को विचलित करने वाला बताते हुए कहा गया कि यह मामला मृत्युदंड के योग्य है और विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में आता है।

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रविता, अमित कश्यप हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
'दंड न हो तो दुष्ट सज्जनों को खा जाएंगे': फैसले में न्याय व्यवस्था के पांच गुणों का उल्लेख
अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने दंड के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दंड से ही संसार नियंत्रण में रहता है और दंड न हो तो दुष्ट व्यक्ति सज्जनों को खा जाएंगे। फैसले में न्याय व्यवस्था के पांच प्रमुख गुणों का भी उल्लेख किया गया। इनमें दुष्टों को दंड देना, सज्जनों का सम्मान करना, न्यायपूर्ण नीति से राज्य के सम्मान में वृद्धि करना, न्याय मांगने वालों के साथ बिना पक्षपात निष्पक्ष व्यवहार करना और राष्ट्र की रक्षा करना शामिल हैं।

अदालत ने अपराध के तरीके, मृतक के साथ किए गए विश्वासघात और हत्या की योजना को सजा निर्धारित करने के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में सामने रखा। फैसले के अनुसार, मृतक को सोते समय इस तरह निशाना बनाया गया कि उसकी आवाज आसपास के लोगों तक न पहुंचे। अदालत ने कहा कि अपराधियों ने मृतक के भरोसे का फायदा उठाया और हत्या करते समय किसी प्रकार की नरमी नहीं दिखाई।

फैसले में यह भी कहा गया कि मृत्युदंड का उद्देश्य केवल पीड़ित के प्रति न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति न्याय और ऐसे अपराधों के लिए निवारक प्रभाव भी महत्वपूर्ण हैं।

यह भी पढ़ें: रविता और अमरदीप को फांसी की सजा: 87 तारीखें-12 गवाह, 13 महीने बाद मिला न्याय, एडीजे-12 कोर्ट ने सुनाया फैसला
 

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सौरभ हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

नीले ड्रम (सौरभ राजपूत) हत्याकांड में भी अदालत की सख्त टिप्पणी
नीला ड्रम केस के नाम से चर्चित हुए सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा के 163 पेज के फैसले में मुस्कान और साहिल के अपराध को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गईं। अदालत ने इस मामले को विरल से विरलतम की श्रेणी में मानते हुए कहा कि नरमी बरतने लायक कोई परिस्थिति नहीं है। फैसले में दोषियों के आचरण और अपराध की प्रकृति का उल्लेख करते हुए उनके सुधार और समाज में पुनर्वास की संभावना पर भी सवाल उठाए गए।

अदालत ने टिप्पणी की कि विवाहेतर संबंध के साथी के साथ मिलकर अपने ही पति की बेरहमी से हत्या करना और शव को सीमेंट से भरे ड्रम में छिपाना सामाजिक विश्वास को गहरी चोट पहुंचाने वाला अपराध है। फैसले में हत्या के बाद शव छिपाने के तरीके को वीभत्स और समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला बताया गया।

अदालत ने घटनास्थल की दीवारों और छतों पर मिले खून के निशानों का भी उल्लेख किया। फैसले के अनुसार, सुनवाई के दौरान दोनों दोषियों में पश्चाताप या अपराध-बोध दिखाई नहीं दिया। अदालत ने उनके व्यवहार को सजा तय करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना और मृत्युदंड का फैसला सुनाया।

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सौरभ के साथ मुस्कान, फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

दो मामलों में एक जैसी सजा, अपराध के तरीके अलग
मेरठ में दो दिन के भीतर आए दोनों फैसलों में चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया गया। सौरभ राजपूत हत्याकांड में शव को नीले ड्रम में सीमेंट से छिपाने का मामला सामने आया, जबकि अमित कश्यप हत्याकांड में पति की गला घोंटकर हत्या कर उसे सर्पदंश का रूप देने की बात सामने आई। दोनों मामलों में अदालतों ने अपराध की क्रूरता और विश्वासघात को गंभीरता से रेखांकित किया।

फैसलों के बाद युवा वकीलों ने मृत्युदंड के निर्णयों का स्वागत किया। उनका कहना था कि इन फैसलों से पुरुषों के बीच बना डर खत्म होने में मदद मिलेगी।

दोनों मामलों ने वैवाहिक संबंधों में विश्वासघात और हत्या जैसे गंभीर अपराधों पर न्यायिक रुख को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अदालतों की टिप्पणियों में स्पष्ट रूप से अपराध की गंभीरता, पीड़ित के विश्वास और समाज पर उसके प्रभाव को महत्व दिया गया।

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