क्रांति धरा में स्कूल खस्ताहाल: ग्राउंड में भरा जल, झड़ता प्लास्टर और दरकतीं दीवारें, सांप मच्छरों का भी डर
मेरठ के एक सरकारी स्कूल की हालत चिंताजनक है। भवन में गहरी दरारें, मैदान में जलभराव, प्लास्टर उखड़ा और सांप-मच्छरों का डेरा है। बच्चे खतरे के बीच पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं।
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प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के दावे कर रही है, लेकिन केसरगंज स्थित राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल और उच्च प्राथमिक विद्यालय की हकीकत इससे इतर है। जर्जर भवन, झड़ता प्लास्टर, दीवारों में दरारें, ग्राउंड में भरा बरसात का पानी और बेंच के अभाव में गीली टाट-पट्टी, जहां बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।
शहर में घंटाघर से चंद कदमों की दूरी पर दोनों विद्यालयों में 217 विद्यार्थियों का नामांकन हैं, लेकिन भवन जर्जर होने की वजह से 100 बच्चे भी प्रतिदिन नहीं पहुंच रहे हैं। भवन की दीवारों से पानी टपकता रहता है और गीली टाट की पटि्टयों पर ही बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।
यहां शिक्षकों की संख्या भी कम मिली। स्कूल के मुख्य द्वार पर कूडा पड़ा हुआ है। इसमें बदबू आ रही है। ग्राउंड में घास खड़ी है। बरसाती पानी के जमाव से सांप और मच्छरों का लार्वा पनपने का भी खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद अधिकारियों के पास निरीक्षण तक का समय नहीं है।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक पारुल शर्मा बताती हैं कि सौ साल पुराना भवन होने की वजह जर्जर है। नगर निगम की ओर से सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कई बार शिक्षाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी है। साल में एक बार 25 हजार रुपये की ग्रांट आती है। इससे कई सारे काम बच्चों के हित के लिए किए जाते हैं, लेकिन इतना पैसा नहीं होता कि सफाई या फिर जर्जर भवन को सही कराया जा सके।
शिक्षा मित्र के भरोसे पढ़ाई
उच्च प्राथमिक विद्यालय में पूर्ण शिक्षक एक है। राजकीय जूनियर हाईस्कूल कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा प्रदान करता है, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालय कक्षा एक से 8 तक की शिक्षा प्रदान करता है। केसरगंज परिसर में दोनों विद्यालय संचालित हैं।
उच्च प्राथमिक विद्यालय में मानक से शिक्षक कम
उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 35:1 है। इसका मतलब है कि प्रत्येक 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। यह अनुपात आरटीई (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम के तहत निर्धारित है। उदाहरण के लिए, यदि किसी उच्च प्राथमिक विद्यालय में 100 छात्र हैं, तो वहां कम से कम 3 शिक्षक होने चाहिए (100/35 = 2.85, जिसे 3 शिक्षक माना जाएगा)।
विद्यार्थी और शिक्षक
उच्च प्राथमिक विद्यालय
विद्यार्थी : 113
शिक्षक : एक शिक्षक,
चार शिक्षामित्र
राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल
विद्यार्थी : 104
शिक्षक : पांच
स्कूल की जांच कराकर समस्या दूर कराएंगे
केसरगंज में स्कूल की स्थिति के बारे में जांच कराएंगे। विद्यार्थियों की परेशानी जानने के बाद समस्या का समाधान कराया जाएगा। -आशा चौधरी, बेसिक शिक्षा अधिकारी
इस मामले का संज्ञान लिया जाएगा। गंभीर मामला है। इसका निस्तारण कराया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर है। -डॉ. दीपक गुप्ता, सांसद प्रतिनिधि
विस में उठाएंगे मुद्दा
स्कूल की जर्जर स्थिति को विधानसभा में उठाया जाएगा। इस बारे में कमिश्नर से मिला जाएगा और मैं मौका मुआयना भी करूंगा। और पता करूंगा अगर मेरी निधि लग सकती है तो वह भी इसमें लगाऊंगा। - रफीक अंसारी, शहर विधायक