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टाटा संस के मामले में आरबीआई का बड़ा कदम: बंबई हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर की यह बड़ी अपील, जानिए पूरा मामला

Tue, 15 Sep 2026 10:18 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 15 Sep 2026 10:18 AM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस का एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का आवेदन खारिज कर दिया है। अब कंपनी को तुरंत सार्वजनिक सूचीबद्धता की तैयारी करनी होगी। आरबीआई ने मुंबई उच्च न्यायालय में कैविएट याचिका भी दायर की है।

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RBI's Big Blow to Tata Sons: NBFC License Surrender Application Rejected, Public Listing Mandatory
टाटा संस - फोटो : amarujala.com

विस्तार

आरबीआई ने बंबई उच्च न्यायालय में एक कैविएट याचिका दायर की है। यह याचिका टाटा संस की अनिवार्य सूचीबद्धता से संबंधित मामले में दायर की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत द्वारा कोई भी आदेश पारित करने से पहले आरबीआई को सुना जाए। ईटी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया है।

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आरबीआई ने कहा है कि यदि कोई याचिकाकर्ता इस मामले में अदालत का रुख करता है, तो आरबीआई अपना पक्ष रख पाएगा। कई सूत्रों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। आरबीआई ने टाटा संस के मुख्य वित्तीय अधिकारी को सूचित किया है कि उनका लाइसेंस सरेंडर करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
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इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) लाइसेंस सरेंडर करने का आवेदन खारिज कर दिया है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने कंपनी को तुरंत सार्वजनिक सूचीबद्धता की तैयारी करने का निर्देश दिया है। यह घटनाक्रम टाटा समूह के हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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टाटा संस का आवेदन क्यों खारिज हुआ?

आरबीआई ने टाटा संस के एनबीएफसी लाइसेंस को सरेंडर करने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को तत्काल सार्वजनिक सूचीबद्धता के लिए तैयार रहना चाहिए। यह निर्णय टाटा समूह के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। आरबीआई चाहता है कि टाटा संस एक सूचीबद्ध इकाई के रूप में काम करे।

इस फैसले के क्या निहितार्थ हैं?

आरबीआई के इस कदम से टाटा समूह के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ेगा। सार्वजनिक सूचीबद्धता से कंपनी में अधिक पारदर्शिता आएगी। यह निर्णय टाटा संस के लिए नियामक अनुपालन को और मजबूत करेगा। टाटा संस को अब अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करना होगा।

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