MEERUT: खालापार के सलीम ने लगाई थी पेट्रोल पंप में हैकिंग चिप, यह था पूरा मामला
मेरठ में तमाम प्रयासों के बावजूद तेल का खेल जारी है। मेरठ की नायरा कंपनी के पेट्रोल पंप पर नया खेल उजागर हुआ है। वहीं इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी साफ नजर आ रही है।
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मेरठ में तेल का खेल कराने वालों के खिलाफ एसटीएफ ने सुबूत जुटाए, बावजूद थाना पुलिस विवेचना में साक्ष्य को शामिल नहीं कर रही हैं। जिसको लेकर पुलिस की विवेचना पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक जेल जाने से पहले पंप मालिक अवनीश गोयल ने बताया है कि मुजफ्फरनगर के खालापार में रहने वाले सलीम ने मशीन को हैक करने के लिए चिप लगाई थी। जबकि मैकेनिक देवेंद्र उर्फ सतेंद्र ने मशीन में मदर बोर्ड लगाया था। सलील को पुलिस ने अभी तक नामजद नहीं किया।
मिलावटी तेल की खपत के लिए पंप पर लगी ऑटोमैटिक मशीन के साथ लाक शामली निवासी मैकेनिक देवेंद्र मलिक ने दूसरा मदर बोर्ड लगाया था। मशीन में दो स्वीच होते थे। एक स्विच ऑन करने पर रीडिंग बंद हो जाती थी और तेल सप्लाई होता था।
यह खेल पंपों पर करीब तीन साल तक चला। इसके बाद अवनीश गोयल की मुलाकात मुजफ्फरनगर खालापार निवासी सलीम से हुई। पुलिस के मुताबिक सलीम ने मशीन में लगी दूसरी मदर बोर्ड हटा दिया और एक चिप लगा दी। यह चिप ऑटोमेटिक मशीक को हैक कर देती थी। देवेद्र को जेल भेजा गया हैै, जबकि सलीम को पुलिस ने अभी तक नामजद तक नहीं किया।
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नायरा कंपनी के पेट्रोल पंप पर मिलावट और घटतौली के खेल की विवेचना कठघरे में खड़ी है। नौ दिन बाद मुकदमे में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धारा बढ़ाकर पुलिस ने केस डायरी कोर्ट में पेश रिमांड की अर्जी लगाई। जिस पर कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन रिमांड पर निर्णय नहीं हो सका। सोमवार को फिर सुनवाई के लिए तारीख लगी है।
जमानत पर 15 व अग्रिम जमानत पर 17 को सुनवाई
जेल में बंद तीन पेट्रोल पंप मालिक अवनीश गोयल, राकेश गुप्ता और ऐश्वर्य गुप्ता समेत सात आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई है। जिसमें ईसी कोर्ट मजिस्ट्रेट अमर रावत ने सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तारीख लगाई है। वहीं, नामजद सीमा गुप्ता और प्रिया गुप्ता द्वारा लगाई अर्जी जमानत पर 17 नवंबर को सुनवाई तारीख निर्धारित हुई है।
यह था मामला
एसटीएफ मेरठ ने तीन नवंबर को नायरा कंपनी के मेरठ में 11 व बागपत में एक पेट्रोल पंप पर एक साथ छापा मारा था। मेरठ में परतापुर, ब्रह्मपुरी, इंचौली व हस्तिनापुर में पंपों पर मिलावट और घटतौली का खेल पकड़ा। पूर्व डीआईजी महेश मिश्रा के बेटे क्षेत्रीय प्रबंधक सुशांत मिश्रा, तीन पंप मालिक समेत 15 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।
सात लोग जेल भेजे गए और आठ आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस की ढीली कार्रवाई पर सवाल उठे तो नौवें दिन मेरठ में चारों मुकदमे में 420, 467, 468, 471 व आईटी एक्ट की धारा बढ़ाकर कोर्ट में रिमांड की अर्जी लगाई। पुलिस ने लिखापढ़ी कर कोर्ट में दस्तावेज प्रस्तुत किए। मामले में गुरुवार को कोर्ट में पूरी बहस नहीं हो सकी, जिसके चलते सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय हुई है।
विवेचक ने रजिस्टर तक नहीं जुटाए
एसटीएफ ने तेल के खेल का भंडाफोड़ किया और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को बुलाकर जांच कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचक ने बगैर पड़ताल के धोखाधड़ी की धारा बढ़ा दी। बताया गया कि तकनीकी के जरिये पेट्रोल में मिलावट के साक्ष्य मौके से जुटाए गए। लेकिन पंपों से रजिस्टरों का कोई लेखाजोखा नहीं जुटाया गया।