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MEERUT: योजना नहीं चढ़ पा रही परवान..., चार प्रतिशत लोग भी नहीं हुए आयुष्मान, सिर्फ 47,895 को मिला लाभ

Thu, 20 Jul 2023 12:45 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 20 Jul 2023 12:45 AM IST
सार

मेरठ में आयुष्मान योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। 12.55 लाख लाभार्थी हैं, सिर्फ 47,895 को योजना का लाभ मिला है। पांच साल बाद भी 8,0,3744 लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं।

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MEERUT: Not even four percent people got Ayushman, only 47,895 got the benefit
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना को शुरू हुए इस साल सितंबर माह में पांच साल पूरे हो जाएंगे, मगर ये अभी तक पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ सकी है। मेरठ में 12.55 लाख लाभार्थी हैं, जिनमें सिर्फ 47,895 लोगों को ही इस योजना का लाभ मिला है, जो कुल लाभार्थियों का चार प्रतिशत भी नहीं है।
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इसके अलावा 4,51,256 लोगों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं, जबकि 803744 लोग कार्ड से महरूम हैं। यानी अभी करीब 64 प्रतिशत के कार्ड नहीं बने हैं। योजना का लाभ लेने के लिए कार्ड जरूरी है। वहीं, जिले में 243 निजी अस्पताल हैं, जिनमें से 82 अस्पताल ही योजना से जुड़े हैं। योजना के तहत लाभार्थी परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के उपचार की सुविधा मिलती है। योजना सितंबर 2018 में शुरू हुई थी और इसके लाभार्थी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार हैं।
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की जा रही गोल्डन कार्ड बनाए जाने की अपील
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार लाभार्थियों से अपील करता है कि सभी आयुष्मान कार्ड जरूर बनवा लें। आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डा. आर के सिरोहा ने बताया कि योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके, इसके लिए विभाग निगरानी करता है। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश हैं कि अस्पताल में आने वाले लाभार्थियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं।

दर-साल
साल गोल्डन कार्ड बने
2018-19 1,36,936
2020-21 68,680
2021-22 44,678
2022-23 1,49,706
2023-24 51,256

लाभार्थियों के योजना है वरदान
अगर योजना पूरी तरह से परवान चढ़ जाए तो यह आर्थिक तौर पर कमजोर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जो लाभ ले पा रहे हैं, वे बहुत खुश हैं। मेरठ निवासी आस मोहम्मद को दिल की बीमारी थी। उनके दिल में दो ब्लॉकेज थे। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह दिल की बीमार के इलाज का खर्च उठा पाते। वह आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी हैं और उनके पास आय़ुष्मान कार्ड है। ऐसे में उन्होंने एक निजी अस्पताल में उपचार कराया, जिसमें 3.1 लाख का खर्च आया।

आयुष्मान कार्ड के चलते उनके उपचार का पूरा खर्च सरकार ने उठाया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर निवासी रीटा को भी आयुष्मान कार्ड की बदौलत जिंदगी मिली। वह दिल की मरीज हैं। दिल की दिक्कत होने पर चिकित्सकों ने उन्हें मेरठ रेफर कर दिया। उन्होंने सीएमओ कार्यालय में संपर्क किया, जिस पर उन्हें एक निजी अस्पताल भेजा गया। वहां उनके दिल में स्टेंट डाला गया। इलाज में करीब 1.4 लाख का खर्च आया, जिसे सरकार ने वहन किया।

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