मेरठ निकाय चुनाव के नतीजे: पिछली बार महापौर, इस बार हाशिये पर पहुंची बसपा, घट गए सभासद
मेरठ नगर निगम में लंबे समय तक कब्जा जमाए रखने वाली बसपा इस बार बसपा प्रत्याशी चौथे स्थान पर पहुंच गए। बसपा प्रत्याशी हशमत महज 54 हजार 76 वोट ही मिले।
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मेरठ में निकाय चुनाव में अभी तक मेयर पद पर काबिज रहने वाली बसपा इस बार हाशिए पर पहुंच गई। पिछले कुल पांच नगर निगम चुनाव में तीन बार बसपा का मेयर चुना गया। साल 2017 में बसपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा ने भााजपा की कांता कर्दम को शिकस्त दी थी। वहीं इस बार बसपा प्रत्याशी चौथे स्थान पर पहुंच गए। पार्टी के पार्षदों की संख्या भी छह पर सिमट गई।
बसपा अभी तक अपने परंपरागत दलित वोट बैंक के साथ ही मुस्लिम मतों के जरिए जीत का स्वागत चखती रही है। पहली बार 1995 में नगर महापालिका चुनाव में अय्यूब अंसारी जीते। इसके बाद वर्ष 2000 में बसपा से ही शाहिद अखलाक मेयर बने।
इसके बाद भाजपा की मधु गुर्जर और हरिकांत अहलूवालिया ने जीत हासिल की जबकि 2017 में फिर से बसपा की सुनीता वर्मा मेयर बनीं। सियासी जानकारों की मानें तो दलित और मुस्लिम समीकरण बसपा को जीत दिलाने में महती भूमिका निभाते रहे।
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पार्टी प्रत्याशी के चयन ने बिगाड़ा गणित
पिछली बार सुनीता वर्मा को दो लाख 34 हजार वोटर 817 मत मिले थे, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी कांता कर्दम को दो लाख पांच हजार 235 मत से संतोष करना पड़ा था। करीब तीस हजार वोटों से उन्होंने जीत हासिल की थी। वहीं इस बार बसपा प्रत्याशी हशमत महज 54 हजार 76 मत ही हासिल कर चौथे पायदान पर फिसल गए। सियासी जानकारों के मुताबिक बसपा की ओर से कमजोर प्रत्याशी का चयन और प्रचार में निष्क्रिय रहना हार का कारण बना। यही वजह रही कि हशमत बसपा के परंपरागत वोट बैंक को भी सहेजने में नाकाम साबित हुए।
28 से रह गए छह सभासद
वर्ष 2017 में बसपा के 25 प्रत्याशी जहां चुनाव चिह्न तो वहीं तीन निर्दलीय लड़कर चुनाव जीते थे। वहीं इस बार यह आंकड़ा चौथाई से भी नीचे गिर गया। छह पार्षद ही निगम में पहुंच सके। वार्ड-1 नई बस्ती लल्लापुरा से तुलसावती, वार्ड-2 मलियाना से दीपक कुमार, वार्ड 36 बुढेरा जाहिदपुर से आशीष चौधरी, वार्ड-6 मोहकमपुर से प्रशांत कसाना, वार्ड-7 पीलना सोफीपुर से नरेश सैनी, वार्ड-22 गोलाबढ़ से मदन पाल जीते। मंडल कोर्डिनेटर ब्रह्मजीत गौतम व दक्षिण विधानसभा अध्यक्ष रामप्रकाश जाटव ने बताया कि भाजपा ने बुरी तरह से ध्रुवीकरण की सियासत की। इसके बावजूद छह सभासद जीते।
-1995 में नगर महापालिका के 60 वार्ड थे तब बसपा प्रत्याशी अय्यूब अंसारी नगर प्रमुख बने। नगर प्रमुख का पद मेयर के नाम से जाना गया।
-वर्ष 2000 में सीमा विस्तार के बाद 70 वार्ड बने। बसपा के हाजी शाहिद अखलाक मेयर निर्वाचित हुए।
-वर्ष 2006 में निगम के 80 वार्ड हो गए। भाजपा की पिछड़ा वर्ग से मधु गुर्जर ने जीत दर्ज की।
-वर्ष 2012 में पिछड़ा वर्ग से भाजपा के हरिकांत अहलूवालिया मेयर बने।
-साल 2017 में 90 वार्ड में चुनाव हुआ। अनुसूचित जाति के कोटे से बसपा की सुनीता वर्मा मेयर बनीं।
जमानत तक नहीं बचा पाए 12 प्रत्याशी, धराशाई हो गए सूरमा
मेरठ में हरिकांत अहलूवालिया दूसरी बार मेयर बनने में कामयाब रहे। महापौर की दौड़ में शामिल सपा और एआईएमआईएम प्रत्याशी ही अपनी जमानत जब्त होने से बचा पाए।
इसके अलावा बसपा और कांग्रेस के साथ ही सियासी रण में उतरे 12 दिग्गजों की जमानत जब्त हो गई। निगम के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब विजेता और उपविजेता के साथ ही तीसरे दल की भी जमानत जब्त न हुई हो।
सियासी जानकार भाजपा और रालोद के बीच ही मुख्य मुकाबला मान रहे थे, लेकिन एआईएमआईएम ने सपा को पीछे छोड़कर नए सियासी ध्रवीकरण के संकेत दिए। भाजपा, सपा और एआईएमआईएम के प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा पाए। जमानत के लिए मतों का 1/6 मत प्राप्त होना जरूरी है।
कुल पड़े पांच लाख 74 हजार 577 मत में से 95 हजार मत पाना जरूरी था। बसपा के हशमत मलिक को 54076 मत मिले, कांग्रेस के नसीम कुरैशी को 15473 और आम आदमी पार्टी की ऋचा सिंह को 6256 मत ही मिल सके। ऐसे में बसपा, कांग्रेस समेत 12 प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में भी कामयाब नहीं हो सके।