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कोरोना का कहर: चौथी लहर की आशंका के बीच मेरठ में ढाई माह बाद पहली मौत, मेडिकल में व्यवस्था बेहाल
Fri, 29 Apr 2022 12:43 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Fri, 29 Apr 2022 12:43 PM IST
सार
कोरोना की चौथी लहर की आशंकाओं के बीच मेरठ में ढाई महीने बाद कोरोना संक्रमण से एक मरीज की मौत हो गई। शहर के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए बीमार परेशान हैं और उनके तीमारदार लाचार हैं। अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन एक सप्ताह से खराब पढ़ी है। बाहर जांच कराने को लोग मजबूर हो रहे हैं।
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मेरठ में कोरोना अपडेट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मेरठ में कोरोना से करीब ढाई माह बाद किसी मरीज की मौत हुई है। मृतक 70 वर्षीय थे, जो गंगानगर के रहने वाले थे। सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तलियान ने बताया कि बुधवार को इन्हें गंभीर हालत में मेडिकल में भर्ती कराया गया था, वहीं इन्हें जांच में कोरोना की पुष्टि हुई थी। मृतक को पहले से भी गंभीर बीमारियां थीं। इससे पहले जिले में 8 फरवरी को कोरोना से मरीज की मौत हुई थी।
बृहस्पतिवार को 2995 लोगों की जांच की गई, जिनमें कोरोना का एक मरीज मिला। फिलहाल 19 केस सक्रिय हैं। यह सभी होम आइसोलेशन में हैं। दो मरीज ठीक हुए हैं। कोरोना की रफ्तार जनवरी के आखिरी सप्ताह से ही काफी धीमी है। कभी-कभी इक्का दुक्का मरीज ही मिल रहे थे। पिछले कुछ दिनों से लगातार मरीज मिल रहे हैं, हालांकि दिल्ली एनसीआर में जिस तरह मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, उतनी रफ्तार नहीं है, लेकिन फिर भी चौथी लहर की आशंकाओं को बल मिल रहा है।
यह भी पढ़ें: माहौल बिगाड़ने की कोशिश: मुजफ्फरनगर में असामाजिक तत्वों ने जाहरवीर की मूर्ति को किया खंडित, रोष
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चौथी लहर की तैयारियां परखने के लिए मॉक ड्रिल एक और दो मई को
कोविड-19 की संभावित चौथी लहर की तैयारियों को परखने के लिए मेडिकल, जिला चिकित्सालय और चार सीएचसी पर एक और दो मई को मॉक ड्रिल की जाएगी।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, पीएल शर्मा जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी किठौर, सरधना, मवाना और हस्तिनापुर पर मॉक ड्रिल की जाएगी।
इस दौरान मरीजों को बेड पर लिटाकर ऑक्सीजन आपूर्ति, उन्हें दी जाने वाली संभावित दवाइयां, उपकरण व स्टाफ की ट्रेनिंग को जांचा-परखा जाएगा। इन व्यवस्थाओं में नए बनाए गए पीआईसीयू वार्ड की व्यवस्थाओं को विस्तार से देखा जाएगा।
सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में 100 बेड का पीआईसीयू वार्ड तैयार किया गया है।
यह भी पढ़ें: डेढ़ घंटे तक गरजा योगी का बुलडोजर: प्रशासन ने सात दुकानें कर दीं जमींदोज, देखिए बड़ी कार्रवाई की ये खास तस्वीरें
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बृहस्पतिवार को 2995 लोगों की जांच की गई, जिनमें कोरोना का एक मरीज मिला। फिलहाल 19 केस सक्रिय हैं। यह सभी होम आइसोलेशन में हैं। दो मरीज ठीक हुए हैं। कोरोना की रफ्तार जनवरी के आखिरी सप्ताह से ही काफी धीमी है। कभी-कभी इक्का दुक्का मरीज ही मिल रहे थे। पिछले कुछ दिनों से लगातार मरीज मिल रहे हैं, हालांकि दिल्ली एनसीआर में जिस तरह मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, उतनी रफ्तार नहीं है, लेकिन फिर भी चौथी लहर की आशंकाओं को बल मिल रहा है।
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चौथी लहर की तैयारियां परखने के लिए मॉक ड्रिल एक और दो मई को
कोविड-19 की संभावित चौथी लहर की तैयारियों को परखने के लिए मेडिकल, जिला चिकित्सालय और चार सीएचसी पर एक और दो मई को मॉक ड्रिल की जाएगी।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, पीएल शर्मा जिला अस्पताल के अलावा सीएचसी किठौर, सरधना, मवाना और हस्तिनापुर पर मॉक ड्रिल की जाएगी।
इस दौरान मरीजों को बेड पर लिटाकर ऑक्सीजन आपूर्ति, उन्हें दी जाने वाली संभावित दवाइयां, उपकरण व स्टाफ की ट्रेनिंग को जांचा-परखा जाएगा। इन व्यवस्थाओं में नए बनाए गए पीआईसीयू वार्ड की व्यवस्थाओं को विस्तार से देखा जाएगा।
सीएमओ डॉ अखिलेश मोहन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में 100 बेड का पीआईसीयू वार्ड तैयार किया गया है।
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11208 लोगों ने लगवाई कोरोना से बचाव की वैक्सीन
कोरोनारोधी टीकाकरण लगातार जारी है। बृहस्पतिवार को 11208 लोगों ने कोरोना से बचाव का टीका लगवाया। इनमें 12 से 14 साल उम्र वाले और 15 से 17 साल उम्र वाले 6960 ने टीका लगवाया। 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग शामिल हैं। साथ ही तीसरा टीका (प्रिकॉशन डोज) भी लगाया जा रहा है।
उधर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज का हाल बेहाल है। कहने को तो इसे एम्स जैसा बनाने के दावे किए जाते हैं, मगर हकीकत में यहां सामान्य सरकारी अस्पताल जैसे भी हालात नजर नहीं आते हैं। इलाज के लिए मरीज और तीमारदार परेशान हैं। सीटी स्कैन मशीन एक सप्ताह से खराब है, उसे अभी तक ठीक नहीं कराया गया।
हजारों रुपये लगाकर लोगों को निजी लैब में जांच करानी पड़ रही है। जो दवाइयां डॉक्टर लिखते हैं, उनमें से आधी से ज्यादा दवाइयां लोगों को बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
389 तरह की दवाएं हैं कम, 44 डॉक्टरों की कमी
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है और दवाओं का टोटा है। 839 तरह की दवाएं रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से वहां इन दिनों 450 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। 389 प्रकार की दवाएं नहीं हैं। खासकर सर्जिकल में इस्तेमाल होने वाली दवाएं। 44 चिकित्सा शिक्षकों की कमी है।
फार्मेसी, मेडिसिन, रेडियोथैरेपी, रेडियोडायग्नोसिस, ह्यूमन मेटाबोल्जिम, ईएनटी, गायनोकोलोजी, फार्माकोलोजी, फोरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी में भी पद खाली चल रहे हैं।
यह भी पढ़ें: देवबंद मदरसा : सात साल से रह रहे बांग्लादेशी छात्र को एटीएस ने हिरासत में लिया, पाक कनेक्शन की भी आशंका
कोरोनारोधी टीकाकरण लगातार जारी है। बृहस्पतिवार को 11208 लोगों ने कोरोना से बचाव का टीका लगवाया। इनमें 12 से 14 साल उम्र वाले और 15 से 17 साल उम्र वाले 6960 ने टीका लगवाया। 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग शामिल हैं। साथ ही तीसरा टीका (प्रिकॉशन डोज) भी लगाया जा रहा है।
उधर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज का हाल बेहाल है। कहने को तो इसे एम्स जैसा बनाने के दावे किए जाते हैं, मगर हकीकत में यहां सामान्य सरकारी अस्पताल जैसे भी हालात नजर नहीं आते हैं। इलाज के लिए मरीज और तीमारदार परेशान हैं। सीटी स्कैन मशीन एक सप्ताह से खराब है, उसे अभी तक ठीक नहीं कराया गया।
हजारों रुपये लगाकर लोगों को निजी लैब में जांच करानी पड़ रही है। जो दवाइयां डॉक्टर लिखते हैं, उनमें से आधी से ज्यादा दवाइयां लोगों को बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं।
389 तरह की दवाएं हैं कम, 44 डॉक्टरों की कमी
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है और दवाओं का टोटा है। 839 तरह की दवाएं रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से वहां इन दिनों 450 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। 389 प्रकार की दवाएं नहीं हैं। खासकर सर्जिकल में इस्तेमाल होने वाली दवाएं। 44 चिकित्सा शिक्षकों की कमी है।
फार्मेसी, मेडिसिन, रेडियोथैरेपी, रेडियोडायग्नोसिस, ह्यूमन मेटाबोल्जिम, ईएनटी, गायनोकोलोजी, फार्माकोलोजी, फोरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी में भी पद खाली चल रहे हैं।
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यहां सही इलाज नहीं मिल रहा
मुरादनगर से आए हैं। पत्नी किडनी की मरीज है। यहां सही इलाज नहीं मिल रहा, दवाइयां भी बाहर से लानी पड़ रही हैं। छुट्टी कराकर ले जा रहा हूं। - शकील अहमद
सीटी स्कैन नहीं हुआ
पत्नी के सिर में चोट लगी है। न तो सीटी स्कैन हो पाया है और न ही कोई सही से इलाज कर रहा है। और तो और स्टाफ परेशानी सुनने तक को तैयार नहीं है। - शमीम अहमद
ऑपरेशन नहीं किया, छुट्टी कराकर ले जा रहे
बुलंदशहर से आए हैं। 14 माह के पोते का हर्निया का ऑपरेशन कराना है। यहां भर्ती किया, लेकिन ऑपरेशन तो छोड़िए कोई देखने तक नहीं आया। छुट्टी कराकर ले जा रहे हैं। - जितेंद्र कुमार
बाहर से लिख रहे जांचें
बिजनौर से आए हैं। मरीज को काला पीलिया है। सब जांचें बाहर से लिख रहे हैं। बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है। क्या करें, परेशान हैं। - गौरव कुमार
एचओडी को दिए निर्देश, इलाज में न हो लापरवाही
सीटी स्कैन मशीन खराब है। पुरानी हो गई है। अभी सही होने में 8-10 दिन लगेंगे। सभी विभागों के एचओडी की मीटिंग कर बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
मुरादनगर से आए हैं। पत्नी किडनी की मरीज है। यहां सही इलाज नहीं मिल रहा, दवाइयां भी बाहर से लानी पड़ रही हैं। छुट्टी कराकर ले जा रहा हूं। - शकील अहमद
सीटी स्कैन नहीं हुआ
पत्नी के सिर में चोट लगी है। न तो सीटी स्कैन हो पाया है और न ही कोई सही से इलाज कर रहा है। और तो और स्टाफ परेशानी सुनने तक को तैयार नहीं है। - शमीम अहमद
ऑपरेशन नहीं किया, छुट्टी कराकर ले जा रहे
बुलंदशहर से आए हैं। 14 माह के पोते का हर्निया का ऑपरेशन कराना है। यहां भर्ती किया, लेकिन ऑपरेशन तो छोड़िए कोई देखने तक नहीं आया। छुट्टी कराकर ले जा रहे हैं। - जितेंद्र कुमार
बाहर से लिख रहे जांचें
बिजनौर से आए हैं। मरीज को काला पीलिया है। सब जांचें बाहर से लिख रहे हैं। बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है। क्या करें, परेशान हैं। - गौरव कुमार
एचओडी को दिए निर्देश, इलाज में न हो लापरवाही
सीटी स्कैन मशीन खराब है। पुरानी हो गई है। अभी सही होने में 8-10 दिन लगेंगे। सभी विभागों के एचओडी की मीटिंग कर बेहतर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज