बड़ी राहत: 57 हजार घरों को रोशन कर रहीं चीनी मिलें और पनबिजली परियोजना, पढ़िए खास रिपोर्ट
यूपी में बिजली संकट के चलते एक बड़ी राहत की बात है। चीनी मिलें और गंगनहर की पनबिजली परियोजनाएं बिजली उत्पादन में बड़ा योगदान कर रही हैं। इस बिजली से दो किलोवाट भार वाले करीब 57 हजार घर रोशन हो रहे हैं।
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कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से प्रदेश में बिजली का संकट गहरा रहा है। ऐसे में पश्चिमी यूपी की चीनी मिलें और गंगनहर की पनबिजली परियोजनाएं बिजली उत्पादन में बड़ा योगदान कर रही हैं। मेरठ मंडल की नौ चीनी मिलों और मेरठ व मुजफ्फरनगर में गंगनहर पर स्थापित पनबिजली परियोजना से पावर ग्रिड को 113333 यूनिट बिजली प्रतिघंटा बिक्री की जा रही है। इस बिजली से दो किलोवाट भार वाले करीब 57 हजार घर रोशन हो रहे हैं।
मेरठ मंडल की मवाना, दौराला, किनौनी, नंगलामल, मोहिउद्दीनपुर, सिंभावली, मलकपुर, रमाला और साबितगढ़ चीनी मिल गन्ने की खोई से 222 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रतिघंटे कर रही हैं। ये चीनी मिलें 107 मेगावाट यानी 107000 यूनिट बिजली प्रतिघंटा पावर ग्रिड को बिक्री कर रहीं हैं। मिलें 115 मेगावाट बिजली का उपयोग प्लांट को चलाने में कर रही हैं।
इसके अलावा गंगनहर पर स्थापित मेरठ जनपद के सलावा और भोला व मुजफ्फरनगर जनपद की चितौड़ा और निरगाजनी पनबिजली परियोजना से 6333 यूनिट बिजली प्रतिघंटा पावर ग्रिड को बिक्री की जा रही है। शुगर मिलों और पनबिजली परियोजना से हर घंटे 113333 यूनिट बिजली दी जा रही है जो दो किलोवाट भार वाले करीब 57 हजार घरों को रोशन करने के लिए पर्याप्त है।
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चीनी मिल बिजली उत्पादन पावर ग्रिड को बिक्री
मवाना 23 9
दौराला 40 14
किनौनी 25 7
नंगलामल 20 11
मोहिउद्दीनपुर 14 9
सिंभावली 45 29
मलकपुर 20 9
रमाला 22 14
साबितगढ़ 13 5
मंडल 222 107
नोट: बिजली उत्पादन और बिक्री मेगावाट में है। आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
पनबिजली परियोजना बिजली उत्पादन
सलावा 3
भोला 1.2
चितोड़ा 3
निरगाजनी 5
कुल 12.20 मेगावाट
खोई रहने तक होगा उत्पादन
मंडल में नौ चीनी मिलें बिजली का उत्पादन कर रही है। स्वयं के प्रयोग के बाद 107 मेगावाट बिजली प्रतिघंटा पावर ग्रिड को दी जा रही है। जब तक शुगर मिलों के पास खोई रहेगी तब तक बिजली का उत्पादन होता रहेगा। - राजेश मिश्र, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र