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यूपी: 3500 करोड़ का घोटाला... 57 मुकदमे और अब तक 13 गिरफ्तार, ये है पूरा मामला

Tue, 01 Sep 2020 03:42 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 01 Sep 2020 03:42 PM IST
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Meerut News: 57 cases filed in bike boat scam case of 3500 crore and 13 accused arrested
बाइक बोट घोटाला मामले में आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला

बाइक बोट के नाम पर करीब 3500 करोड़ के घोटाले में 57 मुकदमे दर्ज हुए और अब तक 13 आरोपियों की ही गिरफ्तारी हो पाई। इनमें 13वें आरोपी के रूप में सुनील प्रजापति की गिरफ्तारी ईओडब्ल्यू ने छह महीने में पहली बार की, जबकि घोटालेबाज कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के संचालक/ निदेशक संजय भाटी समेत 12 आरोपियों की गिरफ्तारी नोएडा पुलिस ने की थी।

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ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर के एएसपी राम सुरेश यादव ने बताया कि बाइक बोट कंपनी द्वारा किए गए घोटाले के सबसे पहले 57 मुकदमें नोएडा के अलग-अलग थानों में दर्ज हुए थे। इन मुकदमों की पूर्व में जांच नोएडा पुलिस द्वारा ही की गई। जिसके बाद शासन ने 14 फरवरी 2020 को सभी 57 मुकदमों की विवेचना ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को सौंप दी थी। जांच में सामने आया है कि गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के संचालक/ निदेशक संजय भाटी और 19 आरोपियों द्वारा उक्त कंपनी रजिस्टर्ड कराकर बाइक बोट स्कीम में अलग-अलग जिलों व राज्यों में फ्रेंचाइजी बनाकर लोगों से करीब 3500 करोड़ की ठगी की गई। इस घोटाले में जो लोग अभी तक आरोपी हैं और पुलिस पकड़ से दूर हैं, वह सभी विवेचना को प्रभावित करने के लिए बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
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हुई थी सीबीआई जांच की सिफारिश 
यह मामला ईओडब्ल्यू के सुपुर्द करने के समय सीबीआई जांच कराने की सिफारिश भी की गई थी। हालांकि सीबीआई जांच अब तक शुरू नहीं हुई है। जबकि ईओडब्ल्यू के मेरठ सेक्टर के पांच इंस्पेक्टर इन मामलों की विवेचना कर रहे हैं। ईओडब्ल्यू इस मामले में अब तक सवा दो सौ से अधिक बाइक बोट मोटर साइकिल बरामद कर चुकी है।
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25 आरोपी होने हैं गिरफ्तार
इस मामले में केस डायरी में 38 आरोपियों के नाम हैं और अभी 25 आरोपियों की गिरफ्तारी होनी है। फरार आरोपियों में संजय की पत्नी दीप्ती बहल, निजी सहायिका रीता चौधरी, एमडी करनपाल, निदेशक ललित कुमार और बीएन तिवारी आदि हैं। सुनील से पहले गिरफ्तार 12 आरोपी नोएडा की लुकसर जेल में बंद हैं।

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प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर चुका 104 करोड़ की संपत्ति
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी केस दर्ज कर घोटाले के मुख्य सूत्रधार संजय भाटी की 104 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुका है। पिछले महीने प्रवर्तन निदेशालय ने संजय भाटी के नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर नगर और इंदौर में 19 संपत्तियों के अलावा सात अन्य लोगों के नाम पर खरीदी गई संपत्ति भी अटैच की थी। साथ ही गर्वित इनोवेटिव के नाम के 26 प्लॉट भी प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर चुका है। संजय भाटी के खातों में जमा 2.28 करोड़ रुपये भी सीज कर दिए गए थे।

सुनील की रही पूरी भूमिका 
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि सुनील प्रजापति साल 2017 में अतिरिक्त निदेशक के रूप में कंपनी में शामिल हुआ था। उसने साल 2018 में कंपनी से त्यागपत्र भी दे दिया था। लेकिन इस दौरान बाइक बोट के नाम पर भारी निवेश कराया गया। बाइक बोट स्कीम में एक मुश्त 62200 रुपये का निवेश कराया जाता था और उसके बदले साल भर तक 9765 रुपये देने का वादा किया जाता था। बाद में कंपनी के संचालक फरार हो गए तो लोगों ने मुकदमे दर्ज कराने शुरू किए।

करीबियों के नाम की संपत्ति
इनामी सुनील प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद निवेशकों ने खुशी जताई है। दादरी के कोट गांव स्थित बाइक बोट के मुख्य कार्यालय पर लगभग 15 माह से धरना देकर बैठे मुन्ना बालियान और अन्य धरनारत निवेशकों का कहना है कि मुख्य आरोपी संजय भाटी ने फर्जीवाड़े से जमा की गई अरबों की संपत्ति को करीबियों के नाम किया है। आरोपी ने देश-विदेश में कई संपत्तियां खरीदीं। इसके बावजूद केस में नामजद आरोपी के परिवार व अन्य करीबियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। मेरठ ईओडब्ल्यू भी यह बात कह रही है कि फरार आरोपी केस को प्रभावित कर सकते हैं। मुन्ना ने बताया कि संजय भाटी का भाई करन, सचिन और चाचा विदेश भाटी भी अब तक फरार है। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद करन और सचिन ने ही निवेशकों को साधने के लिए लाखों फर्जी चेक दिए थे। आरोपियों ने कई युवकों को दफ्तर में बुलाकर लाखों चेक फर्जी हस्ताक्षर कराकर निवेशकों को भेजे थे।

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