मेरठ में एनसीईआरटी की नकली पुस्तकें छापने के मामले में परतापुर पुलिस को भेजी आठ बिंदुओं की जांच रिपोर्ट में भाजपा नेता संजीव और सचिन गुप्ता की कलई खोलकर रख दी है। आगे जानिए पूरा अपडेट-
एनसीईआरटी की रिपोर्ट में खुली भाजपा नेताओं की पोल, फिर हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
पुलिस के अनुसार इस रिपोर्ट में बताया गया कि आरोपी संजीव गुप्ता, सचिन गुप्ता और उसके परिवार से जुड़े किसी भी सदस्य का एनसीईआरटी में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। उसकी प्रिंटिंग प्रेस में नकली पुस्तकें छापी जा रही थीं। पुस्तकों में प्रयोग होने वाला कागज, स्याही और प्रत्येक पन्ने पर पाया गया एनसीईआरटी का वाटरमार्क भी नकली है। संजीव और सचिन गुप्ता की प्रिंटिंग प्रेस और गोदाम में नकली किताबें मिलने के बाद एनसीईआरटी नई दिल्ली की टीम ने मेरठ आकर जांच की थी।
पुलिस के अनुसार एनसीईआरटी पहले जवाब देने से बच रही थी। उसके बाद परतापुर पुलिस ने इसे विवेचना का हिस्सा बताते हुए एनसीईआरटी को 25 बिंदुओं पर नोटिस भेजकर जवाब मांगा था।
पुलिस के अनुसार सोमवार को एनसीईआरटी ने परतापुर पुलिस को ई-मेल के जरिये आठ बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट भेजी। जिसमें प्रिंटिंग प्रेस, नकली किताब में इस्तेमाल होने वाला कागज, स्याही, वाटर मार्क और छपाई करने वाली मशीनें एनसीईआरटी के मानकों के विरुद्ध बताई है। बताया गया कि करीब पांच साल पहले भी संजीव गुप्ता की प्रिंटिंग प्रेस से नकली किताबें पकड़ी गई थीं। लेकिन एनसीईआरटी की रिपोर्ट के चलते मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लग गई थी। हालांकि इस बार के प्रकरण में भी एनसीईआरटी ने प्रारंभिक जांच में वाटरमार्क असली बताया था।
जांच रिपोर्ट में यह बताया
- एनसीईआरटी 80 एमएम मोटा पेपर किताब छापने में इस्तेमाल करती है, जबकि नकली किताबों में 60 एमएम मोटा पेपर इस्तेमाल हो रहा था।
- प्रिंटिंग प्रेस की मशीन व कंप्यूटर में फॉन्ट साइज अलग है।
- एनसीईआरटी के मानकों के अनुसार प्रिंटिंग प्रेस में छपने वाली किताबें नकली हैं।
- एनसीईआरटी में आरोपी संजीव, सचिन या उनके किसी परिजन का कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं है।