Meerut: मरम्मत कार्य के दौरान विद्युत पोल से गिरकर लाइनमैन की मौत, विद्युत मजदूर पंचायत ने जताया विरोध
मेरठ में सोफीपुर के सामने 33 केवी की विद्युत लाइन के पोल पर मरम्मत कार्य करने के दौरान लाइनमैन की मौत हो गई। लाइनमैन की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक संविदा कर्मचारी के तौर पर लाइनमैन था।
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मेरठ में विद्युत विभाग के संविदा कर्मचारी की गुरुवार को विद्युत पोल से गिरकर मौत हो गई। सोफीपुर के सामने 33 केवी की विद्युत लाइन के पोल पर मरम्मत कार्य करने के दौरान उसका पैर फिसलने से यह हादसा हुआ। अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।
पीवीवीएनएल मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया कर रहा है। सदर निवासी संजय (51) पुत्र महेंद्र सिंह वर्ष 1996 से बिजली विभाग में संविदा कर्मचारी के तौर पर लाइनमैन था। वह बच्चा पार्क बिजलीघर पर तैनात था। क्षेत्र के जेई प्रवीण कुमार ने बताया कि मोदीपुरम सब स्टेशन से आने वाली 33 केवी की लाइन में सुबह फाल्ट हो गया था।
सोफीपुर के सामने लाइन के विद्युत पोल पर फाल्ट ठीक करने के लिए संजय करीब 11 बजे खम्भे पर चढ़ा था। जंपर खोलते समय पैर फिसलने से वह गिर पड़ा। अन्य कर्मचारी उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। जेई के अनुसार संविदा कर्मचारी के तीन बच्चे हैं जिसमें सबसे बड़ा बेटा दसवीं कक्षा का छात्र है। अधिशासी अभियंता महेश कुमार ने उनके परिजनों से मिलकर सान्तवना दी।
अधीक्षण अभियंता राजेंद्र बहादुर ने बताया कि संविदा कर्मचारी के परिजनों को विभाग की ओर से 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एक सप्ताह के अंदर उनके परिजनों को यह राशि दिलाई जाएगी। परिजनों में अगर किसी की आयु 18 वर्ष से अधिक है तो उसे संविदा पर नौकरी भी दिलाई जाएगी।
विद्युत मजदूर पंचायत ने जताया विरोध
विद्युत मजदूर पंचायत पश्चिमांचल के अध्यक्ष दिलमणि थपलियाल ने कहा कि विभाग की ओर से संविदा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। 8 से 10 हजार रुपये पर संविदा कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य कर रहे हैं।
लाइनमैन के साथ सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। संविदा कर्मचारियों से ही यह कार्य लिया जाता है। रोजाना कई लोगों की जान इस प्रकार के हादसों में जाती है इसके बावजूद सरकार की ओर से इनके विषय में कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
संगठन की ओर से कई बार समान कार्य समान वेतन, संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने आदि मांग की गई, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया जाता।