सेंट्रल मार्केट: 20 कदम ही चली न्याय यात्रा, तीन गिरफ्तार, कल व्यापारियों का हल्ला बोल, महिलाओं का धरना जारी
मेरठ के सेंट्रल मार्केट में सीलिंग के विरोध में निकाली गई न्याय यात्रा पुलिस ने 20 कदम चलते ही रोक दी। सचिन सिरोही समेत तीन नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि व्यापारी 17 अप्रैल को आवास विकास कार्यालय घेरने की तैयारी में हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को उजड़ने से बचाने के लिए बुधवार को दिल्ली के लिए निकाली जाने वाली न्याय यात्रा शुरू होते ही खत्म हो गई। भारी पुलिस बल ने न्याय यात्रा को 20 कदम चलते ही रोक दिया और अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही समेत तीन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। उधर व्यापारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और 17 अप्रैल को आवास विकास कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है।
अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने व्यापारियों के समर्थन में दिल्ली स्थित गृहमंत्री अमित शाह के आवास तक पैदल न्याय यात्रा का आह्वान किया था। सचिन मंगलवार को ही दिल्ली चले गए थे क्योंकि आशंका थी कि पुलिस उन्हें नजरबंद कर देगी। बुधवार सुबह लगभग 10 बजे वह 9 वाहनों में कार्यकर्ताओं के साथ सेंट्रल मार्केट पहुंचे।
UP: 29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर सकते हैं PM मोदी, प्रशासन ने किया कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण
जैसे ही उन्होंने होर्डिंग लगाकर यात्रा शुरू की पुलिस ने उन्हें रोक लिया। सचिन एसीएम-2 को ज्ञापन दे रहे थे वे उसे पूरा पढ़ भी नहीं पाए थे कि पुलिस ने उन्हें, क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र मलिक और किसान नेता कुलदीप को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने गाड़ी से बैनर भी उतरवा लिए। सचिन सिरोही को पुलिस लाइन में रखा गया जबकि उनके साथियों को नौचंदी थाने में बैठाया गया। शाम लगभग साढ़े छह बजे तीनों को जमानत मिली।
एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने कहा कि इस यात्रा के आयोजक व्यापारी नहीं थे और न ही इनके पास कोई प्रशासनिक अनुमति थी। व्यापारी अपने तरीके से मांग कर रहे हैं। इसी कारण तीन लोगों के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई।
व्हाट्सएप पर वायरल हुआ था मैसेज: यात्रा से पहले मंगलवार रात को ही व्यापारियों के व्हाट्सएप ग्रुप्स पर एक मैसेज तेजी से वायरल हुआ था। इसमें लिखा था दिल्ली यात्रा नहीं, धरना स्थल ही होगा हमारा मोर्चा। पुलिस के दबाव के चलते व्यापारियों ने यात्रा स्थगित करने का मैसेज फ्लैश किया था लेकिन सचिन सिरोही बुधवार को समर्थन मांगने और यात्रा निकालने पर अड़े रहे।
सिर्फ व्यापारी हो रहे उत्पीड़न का शिकार, अब चुप नहीं बैठेंगे
संयुक्त व्यापार संघ (नवीन गुप्ता गुट) की बुधवार को शास्त्रीनगर में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इसमें व्यापारियों के प्रति प्रशासन के सख्त रवैये पर रोष व्यक्त करते हुए 17 अप्रैल को आवास विकास कार्यालय पर होने वाले बड़े प्रदर्शन की अंतिम रणनीति तैयार की गई।
अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में केवल व्यापारियों को ही निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा सेंट्रल मार्केट जैसे दशकों पुराने स्थापित बाजार को उजाड़ दिया गया है जहां 350 दुकानें सील हैं। अब सेक्टर-2 सहित पूरे शास्त्रीनगर और जागृति विहार के बाजारों पर भी कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए जो विकास लाएं न कि व्यापारियों को भुखमरी की ओर धकेलें। इसी के विरोध में 17 अप्रैल को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक आवास विकास कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। पूरे शहर के व्यापारिक संगठनों और व्यापारियों को इस घेराव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। संगठन के पदाधिकारियों ने एसएसपी से मुलाकात कर बाजार बजाजा के व्यापारी प्रदीप अग्रवाल और उनके पुत्र शिवम अग्रवाल पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई का विरोध किया।
महामंत्री संजय जैन ने आरोप लगाया कि एक मामूली मारपीट के मामले को अनावश्यक रूप से बड़ा बनाया गया है। पुलिस ने इतनी अधिक तेजी दिखाई कि मात्र 12 दिनों के भीतर कुर्की तक की तैयारी कर ली गई। उपाध्यक्ष तरुण गुप्ता ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी को घटना के फुटेज भी दिखाए। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ अभिषेक तिवारी को निष्पक्ष जांच और समाधान के निर्देश दिए हैं।
मतभेद रहे तो उनकी शक्ति कमजोर होगी
वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज मित्तल ने कहा कि अधिवक्ता और व्यापारी हमेशा एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। सेंट्रल मार्केट के मामले में भी अधिवक्ताओं का पूर्ण सहयोग मिल रहा है। मंत्री विकास गिरधर व संजीव जिंदल ने चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों में आपसी मतभेद रहे तो उनकी शक्ति कमजोर होगी। आज पूरे शास्त्रीनगर और जागृति विहार को एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर मनीष शर्मा, अमित बंसल, सुधांशु, संजीव रस्तौगी, लल्लू मक्कड़, अनुज सिंघल, सुमित और अपार मेहरा सहित कई व्यापारी नेता उपस्थित रहे।
गृहमंत्री को संबोधित ज्ञापन की मुख्य मांगें
आवासीय भूमि के काॅमर्शियल उपयोग को लेकर संसद के दोनों सदनों में कानून बनाया जाए ताकि देश भर के व्यापारियों को राहत मिले। जैसा मेरठ में हुआ वैसा कहीं और न हो।
भाजपा की ओर से एक प्राइवेट वकील सुप्रीम कोर्ट में पीड़ित व्यापारियों और परिवारों को नि:शुल्क दिया जाए।
संगठन और 5 पीड़ित परिवारों के प्रतिनिधिमंडल को 18 अप्रैल 2026 को गृहमंत्री से मिलने का मौका दिया जाए।
महिलाओं का धरना जारी, गूंजा...इतनी शक्ति हमें देना दाता
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट और आसपास के सेक्टरों में दुकानों को सील करने और 800 से अधिक भूखंडों पर कार्रवाई की लटकी तलवार के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश थमता नजर नहीं आ रहा है। बुधवार को भी भारी संख्या में महिलाएं सेक्टर-2 में धरने पर डटी रहीं। इस दौरान महिलाओं ने आवास विकास के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना स्थल पर इनती शक्ति हमें देना दाता... जैसे गीतों के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शास्त्रीनगर के विभिन्न सेक्टरों के 800 से अधिक भूखंडों पर कार्रवाई होनी है। आदेश के तहत आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी और अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाएगा। सभी स्वामियों को आवास विकास के नक्शे के अनुरूप ही निर्माण करना होगा।
इसके विरोध में महिलाएं लगातार लामबंद हैं। इस दौरान हम किसी से नहीं डरेंगे..., नारी शक्ति एक है... और हमारी एकता जिंदाबाद... जैसे नारों से क्षेत्र गूंज रहा है। जैसे-जैसे धरना लंबा खिंच रहा है प्रशासन पर शासन की ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है। बुधवार को भी एडीएम सिटी और सीओ सिविल लाइन धरना स्थल पर पहुंचे।
अधिकारियों ने एक स्थानीय व्यापारी के साथ बंद कमरे में लगभग एक घंटे तक वार्ता की। माना जा रहा है कि प्रशासन व्यापारियों के जरिए धरना समाप्त कराने की रणनीति बना रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से धरना स्थल पर भारी मात्रा में पीएसी और सादी वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है ताकि गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।