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UP: 'बंधुत्व की भावना से मिटेगा भेदभाव', यूजीसी के मुद्दे पर भागवत मौन; संघ से जुड़ने के दिए ये पांच मंत्र
Sat, 21 Feb 2026 10:30 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 21 Feb 2026 10:30 AM IST
सार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि संघ का काम केवल अपना नाम नहीं करना, बल्कि देश का नाम बड़ा करना है। हिंदू समाज में आ रहे विघटन व अलगाव को दूर करने के लिए उन्होंने कहा कि बंधुत्व की भावना से भेदभाव, असमानता, जातिवाद का अलगाव दूर किया जा सकता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ से जुड़ने के पांच मंत्र दिए।
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mohan bhagwat
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मेरठ में शुक्रवार को खिलाड़ी संवाद गोष्ठी में सरसंघचालक का पूरा जोर हिंदू समाज की एकता और संघ को पूरी तरह से जानने पर रहा। उन्होंने साफ कहा कि बंधुत्व की भावना से ही समाज से जातिवाद, भेदभाव, असमानता मिट सकती है। यूजीसी से जुड़े सवालों पर वह मौन रहे। उनका कहना था कि आपसी बंधुत्व की भावना से ही समाज एकजुट होगा।
अपना नहीं, देश का नाम बड़ा करना है
खिलाड़ियों से संवाद में डॉ. मोहन राव भागवत ने साफ कहा कि संघ का काम केवल अपना नाम नहीं करना, बल्कि देश का नाम बड़ा करना है। हिंदू समाज में आ रहे विघटन व अलगाव को दूर करने के लिए उन्होंने कहा कि बंधुत्व की भावना से भेदभाव, असमानता, जातिवाद का अलगाव दूर किया जा सकता है।
संघ के 100 वर्षों की यात्रा हिंदू समाज को संगठित करने पर केंद्रित रही है। खिलाड़ियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने साफ कहा कि संबंधित लोग स्थानीय स्तर पर खेल जगत के लोगों के साथ सहयोग करके चिंतन करें। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि केवल खेल और राजनीति से संघ को नहीं समझा जा सकता।
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अपना नहीं, देश का नाम बड़ा करना है
खिलाड़ियों से संवाद में डॉ. मोहन राव भागवत ने साफ कहा कि संघ का काम केवल अपना नाम नहीं करना, बल्कि देश का नाम बड़ा करना है। हिंदू समाज में आ रहे विघटन व अलगाव को दूर करने के लिए उन्होंने कहा कि बंधुत्व की भावना से भेदभाव, असमानता, जातिवाद का अलगाव दूर किया जा सकता है।
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संघ के 100 वर्षों की यात्रा हिंदू समाज को संगठित करने पर केंद्रित रही है। खिलाड़ियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने साफ कहा कि संबंधित लोग स्थानीय स्तर पर खेल जगत के लोगों के साथ सहयोग करके चिंतन करें। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि केवल खेल और राजनीति से संघ को नहीं समझा जा सकता।
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संघ को समझने के लिए उसके भीतर आकर काम करना होगा। डॉ. हेडगेवार के बारे में उन्होंने कहा कि उस समय अक्सर एक बात कही जाती थी कि चार हिंदू कभी एक साथ एक दिशा में नहीं चल सकते। वह तभी साथ चल सकते हैं जब पांचवां हिंदू कंधे पर हो। ऐसी सब बातों पर गहनता से विचार करके हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संघ स्थापना की।
संघ सत्ता का अभिलाषी नहीं, हिंदुओं को संगठित करना उद्देश्य: मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने शुक्रवार को कहा कि संघ को सत्ता की अभिलाषा नहीं है। संघ का मूल उद्देश्य समस्त हिंदू समाज को संगठित करना है। संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या किसी से स्पर्धा के लिए काम नहीं करता।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने शुक्रवार को कहा कि संघ को सत्ता की अभिलाषा नहीं है। संघ का मूल उद्देश्य समस्त हिंदू समाज को संगठित करना है। संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध या किसी से स्पर्धा के लिए काम नहीं करता।
शताब्दीनगर स्थित माधवकुंज में मेरठ और ब्रज प्रांत के लगभग 950 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघ को समावेशी मानते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि यह राष्ट्र भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी का है। भारत को मात्र भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।
हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, यह एक विशेषण है। जब भी हमारी एकता खंडित हुई, राष्ट्र पर संकट आया। उन्होंने कहा कि पूजा पद्धति और देवी-देवता भिन्न हो सकते हैं, परंतु इस विविधता में एकता का भाव ही हमारी संस्कृति का आधारभूत तत्व है।
उन्होंने कहा कि हमारा समाज चार स्तंभ संस्कार की प्रक्रिया, सनातन संस्कृति, धर्म का भाव और सत्य का साकार पर खड़ा है। संघ का एकमात्र कार्य संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन हेतु व्यक्ति निर्माण करना है। संघ के स्वयंसेवक आज समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के सवालों के जवाब भी दिए।
भागवत ने दिए संघ से जुड़ने के पांच मंत्र
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ से जुड़ने के पांच मंत्र दिए। बताया कि पहला संघ के कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संघ को अंदर से देखें और किसी दायित्व पर कार्य करें। दूसरा संघ के किसी अनुषांगिक संगठन से जुड़कर काम करें। तीसरा संघ के विभिन्न कार्यक्रमों में किसी न किसी तरह सहयोग करें। चौथा आप अपना काम करते हुए संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम अथवा स्वयंसेवकों से संवाद बनाए रखें। अंतिम कोई न कोई अच्छा, प्रमाणिक एवं निस्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करते रहें। फिर आप स्वयंसेवक हों या न हों इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। हम मानते हैं कि आप स्वयंसेवक हैं।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ से जुड़ने के पांच मंत्र दिए। बताया कि पहला संघ के कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संघ को अंदर से देखें और किसी दायित्व पर कार्य करें। दूसरा संघ के किसी अनुषांगिक संगठन से जुड़कर काम करें। तीसरा संघ के विभिन्न कार्यक्रमों में किसी न किसी तरह सहयोग करें। चौथा आप अपना काम करते हुए संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम अथवा स्वयंसेवकों से संवाद बनाए रखें। अंतिम कोई न कोई अच्छा, प्रमाणिक एवं निस्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करते रहें। फिर आप स्वयंसेवक हों या न हों इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। हम मानते हैं कि आप स्वयंसेवक हैं।
आज प्रमुख जनों से संवाद करेंगे मोहन भागवत
सरसंघचालक मोहन भागवत शनिवार को मेरठ व ब्रज प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख जनों से संवाद करेंगे। इनमें अधिवक्ता, शिक्षक, उद्यमी, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता आदि को आमंत्रित किया गया है। संवाद दोपहर दो बजे शुरू होगा। सरसंघचालक प्रमुख जनों के प्रश्नों के उत्तर भी देंगे।
सरसंघचालक मोहन भागवत शनिवार को मेरठ व ब्रज प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख जनों से संवाद करेंगे। इनमें अधिवक्ता, शिक्षक, उद्यमी, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता आदि को आमंत्रित किया गया है। संवाद दोपहर दो बजे शुरू होगा। सरसंघचालक प्रमुख जनों के प्रश्नों के उत्तर भी देंगे।