साइबर अपराधियों का कारनामा: गोपनीय डिजिटल डाटा चुराया, कंपनी के नेटवर्क में लगाई सेंध
Meerut News : कंपनी के निदेशक अभिषेक गायेल की ओर से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी एक महिला समेत दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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डिजिटल सिग्नेचर उपलब्ध कराने वाली पेंटागॉन साइन सिक्योरिटीज कंपनी के डाटाबेस में साइबर अपराधियों ने सेंध लगा दी। कंपनी के कंप्यूटर, नेटवर्क और संचार उपकरण तक हैक कर लिए। आधार, पैन कार्ड और केवाईसी से संबंधी गोपनीय डाटा चोरी कर लिया। इसका दुरुपयोग भी किया गया। कंपनी के निदेशक अभिषेक गायेल की ओर से बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी एक महिला समेत दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कंपनी का कार्यालय सिविल लाइन क्षेत्र में ईस्टर्न कचहरी रोड स्थित सरस्वती प्लाजा में है। कंपनी डिजिटल सिग्नेचर उपलब्ध कराती है और आधार आधारित सेवाएं, केवाईसी संबंधी, पैन आधारित काम करती है। कंपनी के निदेशक अभिषेक ने रिपोर्ट में बताया कि 22 नवंबर को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की ओर से एक ई-मेल भेजा गया। इसमें बताया गया कि वेबसाइट www.print-portal.in अवैध तरीके से आधार की सेवाएं पेंटागॉन कंपनी की वेबसाइट से ले रही है। इसकी जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया।
उन्होंने तत्काल रिपोर्ट देते हुए आधार आधारित और केवाईसी संबंधी सेवाएं बंद कर दीं। इसके अगले दिन फिर से मेल कर पैन और गैर पैन आधारित सेवाएं भी तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सभी सेवाएं बंद कर दीं। इसके बावजूद साइबर अपराधियों ने उनके कंप्यूटर, नेटवर्क और संचार उपकरण हैक कर डाटा और जानकारी चुरा ली।
डाटा चुराकर साइबर अपराधियों ने इसका दुरुपयोग किया और सेंट्रल आइडेंटिटी डाटा रिपोजिटरी (सीआईडीआर) में डाटा को क्षतिग्रस्त कर दिया। अभिषेक गोयल की तहरीर पर बिहार के मुजफ्फरपुर नूरफरा बंद्रा निवासी बबीता देवी पत्नी सुनील राम और मुजफ्फरपुर निवासी रनजीत राम के खिलाफ रिपोर्ट की गई है। एसपी सिटी मेरठ पीयूष सिंह ने बताया कि कंपनी की ओर से शिकायत मिली थी। इस पर सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
इन धाराओं में दर्ज हुई रिपोर्ट
सिविल लाइन पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 66, कॉपीराइट एक्ट की धारा 63, आधार कार्ड अधिनियम की धारा 36, 37, 38, 39, 40, 41, 42 और 43 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। इसके अलावा आईपीसी की धारा 379, 406, 416, 420, 425, 441, 465, 468, 469, 471, 506, 34 और 120-बी भी लगाई गई है।
ये हैं डिजिटल सिग्नेचर से जुड़ी सेवाएं
डिजिटल सिग्नेचर एक सुरक्षित लॉगइन आईडी और पासवर्ड होता है। सरकारी टेंडर या फिर घर या जमीन जायदाद की खरीद बिक्री, इन सभी कार्यों के लिए डिजिटल सिग्नेचर अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा कंपनियों और साझेदारी फर्मों के लिए भी डिजिटल सिग्नेचर जरूरी है। यह एक तरह से कागज पर किए गए सिग्नेचर जैसे ही होते हैं। लेकिन इन्हें डिजिटल रूप में सरकार से मान्यता दी जाती है। पासवर्ड से सुरक्षित होने के चलते इसके गलत इस्तेमाल संभावनाएं काफी कम होती हैं, लेकिन साइबर अपराधी सेंध का प्रयास करते रहे हैं। डिजिटल सिग्नेचर आधार, पैन कार्ड और डिजिटल सिग्नेचर तैयार करने वाली कंपनी के डाटा को मिलाकर कंप्यूटर से तैयार की गई एल्गोरिदम से तैयार होता है। यह एक नंबर या फिर कोड के रूप में होता है। जहां डिजिटल सिग्नेचर मांगा जाता है, वहां यही कोड या नंबर प्रदान किया जाता है।
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कितना हुआ दुरुपयोग, जांच कर रहे साइबर विशेषज्ञ
नामजद किए गए तीन लोगों के अलावा कितने साइबर अपराधी शामिल हो सकते हैं और गोपनीय डाटा हैक कर उसका किस स्तर पर दुरुपयोग किया गया। साइबर अपराधी इसकी जांच कर रहे हैं। इससे पहले भी साइबर अपराधियों ने कई बार सरकारी और गैर सरकारी सेवाओं से जुड़ी सिक्योरिटीज कंपनियों के डाटा में सेंध लगाने की कोशिश की है।
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