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मेरठ: केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग, कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू

Tue, 19 Jun 2018 02:44 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 19 Jun 2018 02:44 PM IST
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Meerut: A heavy fire in the chemical factory, several fire engines on the spot
भीषण आग - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में परतापुर के गगोल रोड स्थित एक केमिकल गोदाम में सोमवार मध्याह्न भीषण आग लग गई। गोदाम में रखे केमिकल और साल्वेंट से भरे ड्रम हवा में आग का गोला बनकर फटने शुरू हुए तो पास के दो गोदाम चपेट में आने से बचे। 30 से ज्यादा दमकल कर्मियों ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

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एफएसओ परतापुर मुकेश कुमार के अनुसार सोमवार मध्याह्न करीब 3:45 बजे परतापुर स्थित प्रगति केमिकल गोदाम में आग लगने की सूचना मिली थी। ये फैक्ट्री दौराला के कपिल चौधरी की बताई जा रही है। मौके पर परतापुर और पुलिस लाइन से दमकल की पांच गाड़ियां पहुंचीं। बताया गया कि गोदाम में मौजूद एक कर्मचारी ने आग बुझाने की कोशिश की थी। लेकिन हाथ झुलसने पर वह वहां से भाग गया था।
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डीएम ने कहा, सीज करें गोदाम
डीएम अनिल ढींगरा और एसएसपी राजेश पांडेय भी मौके पर पहुंचे। लेकिन गोदाम मालिक या कर्मचारी नहीं मिला। डीएम ने पास के दो गोदामों में निरीक्षण किया तो केमिकल और साल्वेंट के ड्रम भरे थे। लेकिन आग पर नियंत्रण के कोई संसाधन नहीं मिले। गोदामों के मालिक और कर्मचारी भी गोदाम खुला छोड़कर गायब थे। डीएम ने तीनों गोदामों को सीज करने और मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए।
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पढ़ें : यूपी: मकान में अचानक लगी भीषण आग, महिला सहित दो की मौत, कई झुलसे

रिपोर्ट दर्ज करने में उलझी पुलिस 

Meerut: A heavy fire in the chemical factory, several fire engines on the spot
गोदाम में लगी भीषण आग - फोटो : अमर उजाला

एफएसओ और इंस्पेक्टर परतापुर के अनुसार एक गोदाम प्रगति केमिकल, दूसरा उन्नति केमिकल शताब्दी नगर निवासी रविंद्र उपाध्याय का बताया गया। तीसरे गोदाम के बारे में स्पष्ट पता नहीं चला। इन गोदामों के मालिक सामने आने पर स्थिति साफ होगी। पुलिस ने गोदामों पर ताला तो लगवा दिया। लेकिन कहा उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देशन पर ही केस दर्ज होगा।

गोदामों में मौत का सामान, बचाव के नहीं इंतजाम
शहर के अधिकांश गोदामों में मौत का सामान भरा है। लेकिन बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पिछले दिनों सिवालखास में भी इसी तरह घर में अवैध रूप से ड्रमों में साल्वेंट और पेट्रोल-डीजल का भंडारण किया हुआ था। आग लगने से बच्ची समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह प्रगति केमिकल में भी 30-35 ड्रम भरे थे जबकि 35-40 ड्रम खुले में रखे थे। सभी ड्रमों में आग लगी थी। गोदाम में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नही थे। सवाल है कि इस तरह के हादसे लगातार सामने आने के बावजूद पुलिस-प्रशासन और दमकल विभाग के अधिकारी एक-दूसरे की जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। एफएसओ मुकेश कुमार के अनुसार फायर विभाग केवल आग बुझाने और लोगों को जागरूक कर सकता है। कार्रवाई का अधिकार उन्हें नहीं है। 

दंग रह गए डीएम
डीएम ने गोदाम में रखीं बोतलों में से एक बोतल का केमिकल चेक किया तो कहा कि इसमें संभवत: स्प्रिट लग रहा है। कुछ कैन में साल्वेंट भी भरा था। ऐसे में अंदेशा है कि कहीं यहां पर साल्वेंट से पेट्रोल तो नही बन रहा। इसलिए डीएम ने तीन गोदाम सीज करा दिए।

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