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एमडीए की ऑडिट आपित्तयां हुईं ऑनलाइन
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एमडीए की ऑडिट आपित्तयां हुईं ऑनलाइन
मेरठ। सरकारी विभागों पर शिकंजा कसने के लिए डिजिटल व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। जिससे किसी भी तरह के घपले-घोटालों पर रोक लगाई जा सके। शासन ने सभी निकायों और निगमों में ऑनलाइन ऑडिट आपत्तियां लागू करने के निर्देश दिए थे। जिसे मेरठ विकास प्राधिकरण ने शुरू कर दिया है। एमडीए का दावा है कि सबसे पहले इस व्यवस्था को यहां लागू किया गया है।
अभी तक प्रदेश में ऑडिट में तीन साल का समय लग रहा था। इसी को देखते हुए ऑडिट ऑनलाइन मैनेजमेंट की व्यवस्था शुरू की गई है। इससे कैग (कॉम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जरनल) भी ‘ऑडी सॉफ्ट’ सॉफ्टवेयर से सीधे ऑडिट ऑपत्तियों पर नजर रख सकेगा। ऑनलाइन ऑडिट मैनेजमेंट व्यवस्था होने से रिपोर्ट तैयार करने में भी मदद मिलेगी। इससे ऑडिट करने में भी किसी भी तरह की परेशानियां नहीं आ सकेंगी। इस व्यवस्था में ऑडिट टीम ऑडिट के काम को ऑनलाइन अंजाम देती है और इससे ऑडिट के काम को किसी भी समय सुपरवाइजर के स्तर पर देखा जा सकता है।
इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम भी तैयार
इसके अलावा एमडीए अपना इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम भी तैयार करा रहा है। इसके बन जाने के बाद बंधक प्लॉट (मॉडगेज प्लॉट) पर नजर रखी जा सकेगी। इसमें सभी फाइलों को अपलोड किया जाएगा। इसमें आवेदक का नाम, आवेदक के प्लॉट का नाम, कितना उसका बकाया है आदि जानकारी मिल सकेंगी।
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डिजिटल हो रहा एमडीए
एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि मेरठ विकास प्राधिकरण में सभी कार्य ऑनलाइन किए जा रहे हैं। पहले टाउन प्लानिंग की व्यवस्था की गई। इसके बाद फाइनेंस के लिए डिजिटल डायरी से भुगतान, संपत्तियों को ऑनलाइन अपलोड, ओबीपीएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से नक्शे पास करने की सुविधा, अवैध निर्माण होने पर जेई द्वारा ऑनलाइन चालान काटना आदि सुविधाएं दे दी गई हैं।
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मेरठ। सरकारी विभागों पर शिकंजा कसने के लिए डिजिटल व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। जिससे किसी भी तरह के घपले-घोटालों पर रोक लगाई जा सके। शासन ने सभी निकायों और निगमों में ऑनलाइन ऑडिट आपत्तियां लागू करने के निर्देश दिए थे। जिसे मेरठ विकास प्राधिकरण ने शुरू कर दिया है। एमडीए का दावा है कि सबसे पहले इस व्यवस्था को यहां लागू किया गया है।
अभी तक प्रदेश में ऑडिट में तीन साल का समय लग रहा था। इसी को देखते हुए ऑडिट ऑनलाइन मैनेजमेंट की व्यवस्था शुरू की गई है। इससे कैग (कॉम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जरनल) भी ‘ऑडी सॉफ्ट’ सॉफ्टवेयर से सीधे ऑडिट ऑपत्तियों पर नजर रख सकेगा। ऑनलाइन ऑडिट मैनेजमेंट व्यवस्था होने से रिपोर्ट तैयार करने में भी मदद मिलेगी। इससे ऑडिट करने में भी किसी भी तरह की परेशानियां नहीं आ सकेंगी। इस व्यवस्था में ऑडिट टीम ऑडिट के काम को ऑनलाइन अंजाम देती है और इससे ऑडिट के काम को किसी भी समय सुपरवाइजर के स्तर पर देखा जा सकता है।
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इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम भी तैयार
इसके अलावा एमडीए अपना इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम भी तैयार करा रहा है। इसके बन जाने के बाद बंधक प्लॉट (मॉडगेज प्लॉट) पर नजर रखी जा सकेगी। इसमें सभी फाइलों को अपलोड किया जाएगा। इसमें आवेदक का नाम, आवेदक के प्लॉट का नाम, कितना उसका बकाया है आदि जानकारी मिल सकेंगी।
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डिजिटल हो रहा एमडीए
एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि मेरठ विकास प्राधिकरण में सभी कार्य ऑनलाइन किए जा रहे हैं। पहले टाउन प्लानिंग की व्यवस्था की गई। इसके बाद फाइनेंस के लिए डिजिटल डायरी से भुगतान, संपत्तियों को ऑनलाइन अपलोड, ओबीपीएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से नक्शे पास करने की सुविधा, अवैध निर्माण होने पर जेई द्वारा ऑनलाइन चालान काटना आदि सुविधाएं दे दी गई हैं।