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मां तुझे प्रणाम: संन्यासी ने फूंका क्रांति बिगुल, केंद्र बना था मेरठ, अमर हो गई 10 मई 1857 की तिथि

Tue, 09 May 2023 09:54 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 09 May 2023 09:54 AM IST
सार

भारत के इतिहास में 10 मई 1857 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन मेरठ से आजादी के पहले आंदोलन की शुरुआत हुई थी। यही वह दिन था जब इतिहास में मेरठ क्रांति का केंद्र बनकर उभरकर सामने आया।

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Maa Tujhe Pranam: Sanyasi blew the revolution bugle, Meerut was made the center
1857 की क्रांति (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की स्वतंत्रता में 1857 की क्रांति का पहला आंदोलन रहा जो इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। संन्यासी ने क्रांति की एसी चिंगारी फूंकी, जिसमें सैनिक से लेकर आम नागरिक भी शामिल हो गए। इतिहास में मेरठ क्रांति का केंद्र बनकर उभरकर सामने आया। 85 वीर सैनिकों ने स्थानीय लोगों को साथ लेकर स्वतंत्रता का बोध कराया। 10 मई को मेरठ से दिल्ली रोड क्रांति की ज्वाला जल उठी। उत्तर प्रदेश सहित देश भर के विभिन्न जिलों में अंग्रेजों का विरोध शुरू हो गया।  

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मैसूर ज्यूडिशियल कमिशन में आता है संन्यासी का नाम 
1855-86 में ऋषिकेश, हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, मथुरा और वृंदावन के साधु संतों ने लोगों को जागरूक करना आरंभ किया। इन चारों स्थानों पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में तीर्थयात्री आते थे। स्वामी विरजानंद जी ने काफी समय तक अलवर के महल में रहकर उन्हें संस्कृत सिखाई और पूरे राजस्थान को क्रांति के लिए जागरूक किया। इतिहासकार डॉ. अमित पाठक ने बताया कि 1857 में दक्षिण भारत में एक संन्यासी को पुलिस ने पकड़ा और मैसूर ज्यूडिशियल कमिशन बनाया गया। इस कमिश्नर की रिपोर्ट में भी मेरठ में आने वाले संन्यासी का उल्लेख आता है।
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सूरजकुंड पर होती थी गुप्त मंत्रणाएं
गाय और सुअर की चर्बी युक्त कारतूस के विषय में जिसने लोगों को सर्वप्रथम जागरूक किया वह सन्यासी था। सैनिकों के साथ बैठक सूरजकुंड और बाबा औघड़नाथ मंदिर में गुप्त मंत्रणाएं की जाती थीं। संन्यासी के पास हाथी भी था। वह लोगों को स्वतंत्रता का महत्व बताता था। केडी शर्मा ने बताया कि आबू के मकबरे पर भी क्रांतिकारियों की बैठक हुई थी। 1857 की घटना को राष्ट्रीय क्रांति माना है।

21 दिन पहले शुरू हो गई क्रांति
ऋषिकेश में आयोजित संन्यासियों के सम्मेलन में नाना साहब पेशवा और अजीमुल्ला खा न शामिल हुए। 31 मई 1857 को क्रांति का आगाज होना था, जिसके लिए कमल और रोटी का वितरण कर सभी तैयारियां पूर्ण हो गई। लोगों से कमल का फूल और रोटी देकर संकल्प लिया गया। इस बीच कारतूस में गाय और सुअर की चर्बी की बात उड़ा दी गई और क्रांति 10 मई को ही आरंभ हो गई। 

क्रांति की ज्वाला पूरे देश में फैली
शहर में जो क्रांति की  ज्वाला फूटी वह संपूर्ण देश में फैल गई। मेरठ के बाद मुंबई और मद्रास की भी सैनिक बटालियनों ने अंग्रेजों का विरोध शुरू कर दिया। अंग्रेजों ने कई स्थानों पर भारतीय सैनिकों से हथियार भी वापस लेने शुरू कर दिए। मेरठ के सैनिकों के साथ बड़ी  संख्या में लोगों ने दिल्ली पहुंचकर बहादुर शाह जफर को देश का बादशाह घोषित कर दिया।

क्रांति दिवस पर करेंगे शहीदों को नमन
भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से आजादी दिलाने में 10 मई का बड़ा महत्व है। 1857 में जो मशाल जलीं, वह पूरे देश में रोशन हो गई। क्रांति की अलख जगाकर 85 भारतीय सैनिक अमर हो गए। इन वीरों को नमन करनेे के लिए इस साल भी अमर उजाला के मां तुझे प्रणाम अभिनव अभियान की शुरुआत 10 मई से होगी। बाबा औघड़नाथ मंदिर में सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर पुष्पांजलि सभा होगी। इसमें सभी शहर के लोग जुटेंगे।

दरअसल, 10 मई 1857 को मेरठ में क्रांति की पहली चिंगारी भड़की थी और इसने भारत के इतिहास को बदल दिया। स्वतंत्रता संगाम के 85 नायकों ने हर कदम पर अपने प्राणोें की बाजी लगा दी। कैंट स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर पर काली पल्टन क्रांति का केंद्र रहा। औघड़नाथ मंदिर में इन शहीदों को आज भी अमर उजाला के साथ पूरा शहर याद करता  है और पुष्पांजलि देता है। इस अभिनव अभियान में निरंतर लोग जुड़ते जा रहे हैं। 
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