मुकदमों की संख्या देखकर लखनऊ तक खलबली, पुलिस को हुई टेंशन
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मेरठ में आधी आबादी खतरे में है। योगी सरकार का एंटी रोमियो स्क्वायड, शक्ति मोबाइल और वुमन हेल्पलाइन भी परवान नहीं चढ़ पा रही। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।
हत्या, दुष्कर्म, छेड़छाड़ और लूट की वारदात बढ़ी हैं। मुकदमों की संख्या देखकर लखनऊ तक खलबली मची हुई है। इन मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी ने सभी एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक थानों में खुद जाकर पीड़ित महिलाओं को बुलाकर मॉनीटरिंग करें। एसएसपी ने इसको लेकर अभियान शुरू कर दिया है। एसएसपी का मानना है कि थानों में वाकई महिलाओं के मुकदमों में कार्रवाई नहीं होती। जिसके चलते यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। महिलाओं की सुरक्षा के प्लान बनाए जा रहे हैं। योगी सरकार महिलाओं की सुरक्षा और उनके साथ होने वाले अपराध के प्रति बेहद गंभीर है।
2017 में बढ़ा महिलाओं के प्रति अपराध
पुलिस रिकॉर्ड की मानें तो सन 2015 व सन 2016 की अपेक्षा सन 2017 में महिला अपराध काफी बढ़ा है। सन 2017 में छेड़खानी के 300, हत्या के 70, दुष्कर्म के 79 व पांच महिलाओं की गैंगरेप के बाद हत्या का रिकॉर्ड है। वहीं सन 2016 में छेड़खानी के 270, हत्या के 62, दुष्कर्म के 66 व गैंगरेप के बाद एक भी हत्या नहीं हुई थी। सन 2015 में छेड़खानी के 228, हत्या के 60, दुष्कर्म के 64 और गैंगरेप के बाद हत्या जैसी कोई वारदात नहीं हुई।
मुकदमों की अधूरी चार्जशीट
योगी सरकार जहां महिला अपराध के प्रति गंभीर है, वहीं मेरठ पुलिस बहुत सुस्त है। दुष्कर्म और छेड़खानी के कई मुकदमों में पुलिस ने चार्जशीट तक दाखिल नहीं की। इसको लेकर पुलिस अधिकारियों ने थाना पुलिस पर नाराजगी भी जाहिर की। पुलिस का दावा है कि विवेचक अपने निजी स्वार्थ के लिए महिलाओं के मुकदमों में लापरवाही करते है। इसको लेकर पहले भी कई विवेचकों पर विभागीय कार्रवाई हुई है।
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थानों का बुरा हाल
महिला अपराध के मुकदमों में थानों का हाल बहुत बुरा है। योगी सरकार के निर्देश के बाद एसएसपी ने मेरठ जनपद महिला अपराध का रिकॉर्ड खंगाला। जिसमें 550 से अधिक मुकदमों में पुलिस ने कोई संज्ञान ही नहीं लिया। यह मुकदमे दर्ज तो हुए। लेकिन आरोपियों पर मजबूत कार्रवाई नहीं हुई। अब पुलिस ने उक्त मुकदमों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है।
कहां गायब हैं लड़कियां
पुलिस रिकॉर्ड में सन 2017 में 200 से अधिक लड़कियां व महिलाएं गायब हुई है। जिसमें 120 से अधिक महिलाएं अभी लापता चल रही हैं। जबकि सन 2016 में 155 और सन 2015 में 122 महिला लापता हुई थी। पुलिस का मानना है कि महिलाओं से जुड़े सभी अपराध सन 2017 में बढ़े, जोकि योगी सरकार को टेंशन दे रहे है।
हर थाने में 20 से 25 मुकदमे
बुधवार को मेडिकल थाने पहुंचीं एसएसपी ने बताया कि महिलाओं से जुड़े 20 से 25 मुकदमे हर थाने में ऐसे हैं जिनमें अभी चार्जशीट नहीं लगी। पहले दिन ही महिलाओं के मुकदमों में पुलिस की लापरवाही एसएसपी के सामने आई। एसएसपी का कहना है कि हर थाने की मॉनीटरिंग की जाएगी। पीड़ित महिलाओं को थाने बुलाकर मुकदमे की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी लेंगे।
सुनी जाएंगी शिकायतें
एसएसपी मंजिल सैनी का कहना है कि डीजीपी ओपी सिंह ने निर्देश दिए हैं कि महिला अपराध की खुद एसएसपी समीक्षा करेंगे। इसको लेकर हर थाने में एसएसपी को जाना होगा। पीड़ित महिला और विवेचक आमने सामने होंगे। विवेचक की लापरवाही मिली तो उसे तुरंत सस्पेंड किया जाएगा। महिला अपराध में विवेचक या थानेदार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
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